
देश की राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन की सबसे मजबूत कड़ियों में से एक दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बस सेवाएं संविदा चालकों की हड़ताल के कारण बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन करने वाले हजारों अनुबंधित चालकों के अचानक चक्का जाम करने से दिल्ली के विभिन्न इलाकों, बस स्टॉप्स और प्रमुख टर्मिनलों पर लाखों दैनिक यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुबह के व्यस्त समय में दफ्तर, कॉलेज और स्कूल जाने वाले लोग घंटों सड़कों पर खड़े होकर बसों का इंतजार करते नजर आए।
सड़क परिवहन पर आए इस अप्रत्याशित संकट को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने तुरंत कमान संभाल ली है। मेट्रो प्रशासन ने भारी भीड़ और यात्रियों के अतिरिक्त दबाव को नियंत्रित करने के लिए पूरे मेट्रो नेटवर्क पर 20 अतिरिक्त ट्रेन फेरे (ट्रेन ट्रिप्स) बढ़ाने और 8 अतिरिक्त ट्रेनें ट्रैक पर उतारने का बड़ा फैसला किया है। इस त्वरित कदम से सड़क पर फंसे लाखों यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए एक सुगम, सुरक्षित और समयबद्ध विकल्प मिल गया है।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए परिचालन व्यवस्था में तत्काल बदलाव किए हैं। डीएमआरसी के आधिकारिक बयान के अनुसार, बस सेवाएं ठप होने के चलते बड़ी संख्या में मुसाफिर मेट्रो स्टेशनों का रुख कर रहे हैं। भीड़ के कारण प्लेटफॉर्म्स और ट्रेनों के भीतर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए तुरंत प्रभाव से नेटवर्क के विभिन्न कोरिडोरों पर 20 अतिरिक्त ट्रिप्स जोड़े गए हैं।
इसके साथ ही मेट्रो प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह विशेष प्रबंध केवल एक दिन के लिए नहीं है, बल्कि स्थिति सामान्य होने तक जारी रहेगा। आवश्यकता के अनुरूप सुबह 8:00 बजे से लेकर रात 8:00 बजे तक 8 अतिरिक्त ट्रेनों को रिजर्व में रखकर आवश्यकतानुसार लाइन पर उतारा जा रहा है। विशेष रूप से सुबह और शाम के पीक आवर्स (व्यस्ततम घंटों) में जब यात्रियों का दबाव सबसे अधिक होता है, तब इन अतिरिक्त ट्रेनों की फ्रिक्वेंसी बढ़ाकर यात्रियों को राहत दी जा रही है।
दिल्ली में करीब 6,500 डीटीसी और क्लस्टर बसें प्रतिदिन सड़कों पर उतरती हैं, जिनके जरिए रोजाना लगभग 60 लाख से अधिक लोग सफर करते हैं। ऐसे में संविदा चालकों का विरोध प्रदर्शन सीधे दिल्ली की लाइफलाइन पर असर डाल रहा है। प्रदर्शनकारी ड्राइवरों का कहना है कि वे निजी कंसेशनर्स और ठेकेदारों के जरिए नई इलेक्ट्रिक और सीएनजी बसों को संचालित कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी श्रम अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
चालकों की मुख्य मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
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दैनिक वेतन में सम्मानजनक वृद्धि: ड्राइवरों का आरोप है कि उन्हें अकुशल या न्यूनतम मजदूरी दर (लगभग ₹862 प्रतिदिन) पर भारी वाहन चलाने को मजबूर किया जा रहा है, जो उनकी जोखिम भरी जिम्मेदारी के मुकाबले बेहद कम है।
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मेडिकल व ईएसआई (ESI) सुविधाएं: किसी बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में ड्राइवरों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य बीमा और कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
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ओवरटाइम और सामाजिक सुरक्षा: तय घंटों से अधिक ड्यूटी करने पर पारदर्शी ओवरटाइम भुगतान, भविष्य निधि (PF) और सवेतन अवकाश (Paid Leaves) दिए जाएं।
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दुर्घटना व टूट-फूट पेनल्टी पर रोक: बस में किसी भी मामूली तकनीकी खराबी या सड़क पर होने वाले डेंट-खरोंच का हर्जाना ड्राइवरों के वेतन से काटे जाने की व्यवस्था को तुरंत रद्द किया जाए।
यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार और निजी ऑपरेटर उनकी जायज मांगों पर ठोस लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक शांतिपूर्ण चक्का जाम जारी रहेगा।
बसों के सड़कों से नदारद होने का सीधा असर दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के बीच आवाजाही करने वाले लोगों पर पड़ा। कश्मीरी गेट, आनंद विहार, सराय काले खां, उत्तम नगर, बदरपुर, रोहिणी और धौला कुआं जैसे बड़े बस अड्डों पर यात्रियों की लंबी कतारें देखी गईं। स्थिति का फायदा उठाते हुए कई इलाकों में ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा और कैब चालकों ने सर्ज प्राइसिंग के नाम पर यात्रियों से दोगुना से तिगुना किराया वसूलना शुरू कर दिया।
स्कूल जाने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों को भी भारी असुविधा झेलनी पड़ी, क्योंकि कई निजी और सरकारी स्कूलों के ट्रांसपोर्ट रूट डीटीसी बसों के संचालन पर निर्भर थे। ऐसे संकट के समय दिल्ली मेट्रो का आगे आना आम नागरिकों, खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के दैनिक यात्रियों के लिए किसी बड़े वरदान से कम साबित नहीं हुआ।
परिवहन व्यवस्था में आए इस व्यवधान पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली के परिवहन मंत्री ने हड़ताली चालकों से जनहित में काम पर लौटने की भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी सभी वाजिब चिंताओं को सुनने और निजी कंसेशनर कंपनियों के साथ बातचीत कर समाधान निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन आम नागरिकों को बंधक बनाकर आवश्यक सेवाओं को ठप नहीं किया जाना चाहिए।
वहीं, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने यात्रियों के लिए विशेष परामर्श (Travel Advisory) जारी किया है:
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समय पूर्व यात्रा की योजना: स्टेशनों पर टिकट काउंटरों और सुरक्षा जांच (CISF Frisking) पर अधिक भीड़ होने की संभावना है, इसलिए घर से 15 से 20 मिनट का अतिरिक्त समय लेकर निकलें।
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डिजिटल टिकटिंग का उपयोग: कतारों से बचने के लिए DMRC Saarthi App, WhatsApp टिकटिंग या नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) और स्मार्ट कार्ड का उपयोग करें ताकि टोकन काउंटरों पर समय बर्बाद न हो।
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पीक आवर से बचना: यदि संभव हो, तो अत्यधिक भीड़भाड़ वाले समय (सुबह 9 से 11 और शाम 6 से 8) के बजाय गैर-व्यस्त घंटों में यात्रा करने को प्राथमिकता दें।
दिल्ली मेट्रो की यह त्वरित प्रतिक्रिया साबित करती है कि संकट की घड़ी में आधुनिक मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम किसी भी महानगर की रीढ़ की हड्डी के रूप में कैसे काम करता है।
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