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अटल पेंशन योजना: क्या 60 साल से पहले निकाल सकते हैं जमा पैसा? जानिए प्रीमेच्योर एग्जिट और रिफंड के नियम

अटल पेंशन योजना (APY) भारत सरकार द्वारा विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के कामगारों और नागरिकों के वृद्धावस्था को वित्तीय सुरक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई एक राष्ट्रीय पेंशन योजना है। पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) द्वारा संचालित इस योजना में 18 से 40 वर्ष की आयु का कोई भी भारतीय नागरिक शामिल हो सकता है।

इस योजना के तहत अंशधारक (सब्सक्राइबर) को 60 वर्ष की आयु तक एक निश्चित मासिक, त्रैमासिक या छमाही प्रीमियम जमा करना होता है। इसके बदले में 60 वर्ष पूरे होने पर सरकार द्वारा जीवनभर प्रति माह ₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, ₹4,000 या ₹5,000 की गारंटीकृत न्यूनतम पेंशन प्रदान की जाती है। अंशधारक की मृत्यु के बाद उसके जीवनसाथी (पति/पत्नी) को उतनी ही पेंशन जीवनभर मिलती है और दोनों के निधन के बाद कुल संचित पेंशन फंड (कॉर्पस) नामित व्यक्ति (नॉमिनी) को लौटा दिया जाता है।

हाँ, अटल पेंशन योजना में 60 वर्ष की आयु से पहले भी खाता बंद करके जमा पैसा निकाला जा सकता है। योजना की शुरुआत में 60 वर्ष से पहले निकासी की अनुमति केवल असाधारण परिस्थितियों (जैसे गंभीर बीमारी या मृत्यु) में ही दी जाती थी—लेकिन बाद में नियमों को व्यावहारिक बनाते हुए स्वैच्छिक निकासी (Voluntary Exit) की सुविधा भी जोड़ दी गई।

हालांकि, समय से पहले खाता बंद कराने पर मिलने वाली राशि सामान्य मैच्योरिटी से अलग होती है और कुछ वित्तीय कटौतियों का सामना करना पड़ता है।

अटल पेंशन योजना के तहत 60 साल से पहले बाहर निकलने की स्थितियों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:

एग्जिट की स्थिति क्या मिलेगा? क्या कटेगा?
1. स्वैच्छिक निकासी (Voluntary Exit) आपका स्वयं का कुल जमा अंशदान + उस पर अर्जित शुद्ध वास्तविक रिटर्न। खाता रखरखाव (Maintenance) और निवेश प्रबंधन शुल्क काटा जाएगा। सरकार का सह-अंशदान (Co-contribution) व उसका ब्याज वापस नहीं मिलेगा।
2. गंभीर/असाध्य बीमारी (Terminal Illness) संपूर्ण संचित कॉर्पस (अंशदान + सरकार का अंशदान + कुल अर्जित लाभ)। कोई दंडात्मक कटौती नहीं।
3. 60 वर्ष से पहले मृत्यु (Death of Subscriber) जीवनसाथी को खाता जारी रखने का विकल्प। खाता बंद कराने पर पूरा कॉर्पस जीवनसाथी/नॉमिनी को। कोई कटौती नहीं।

यदि कोई अंशधारक 60 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्तिगत या वित्तीय कारण से खाता बंद करना चाहता है, तो उसे अपनी बैंक शाखा में आवेदन करना होता है:

  • वापसी राशि: सब्सक्राइबर द्वारा जमा किया गया पूरा मूलधन और उस पर हुआ वास्तविक शुद्ध लाभ वापस कर दिया जाता है।

  • सरकारी अंशदान की जब्ती: यदि शुरुआती वर्षों में ग्राहक को सरकारी सह-अंशदान (Govt Co-contribution) मिला था, तो वह हिस्सा और उस पर अर्जित ब्याज जब्त कर लिया जाएगा।

  • मेंटेनेंस शुल्क: बैंक और सीआरए (CRA) द्वारा लगाए जाने वाले खाता संचालन और निवेश प्रबंधन शुल्क काटकर शेष राशि सीधे पंजीकृत बचत खाते में क्रेडिट कर दी जाती है।

पीएफआरडीए के नियमों के अनुसार यदि सब्सक्राइबर किसी गंभीर असाध्य बीमारी (जैसे कैंसर, किडनी फेल्योर, ऑर्गन ट्रांसप्लांट, हार्ट सर्जरी या स्ट्रोक आदि) से पीड़ित होता है, तो वह प्रमाण पत्र देकर समय से पहले एग्जिट ले सकता है। इस स्थिति में बिना किसी पेनल्टी के पूरा संचित फंड (सरकारी हिस्से और रिटर्न सहित) वापस किया जाता है ताकि इलाज का खर्च उठाया जा सके।

यदि किसी कारणवश 60 वर्ष पूरे होने से पहले मुख्य खाताधारक की मृत्यु हो जाती है, तो उसके जीवनसाथी (पति/पत्नी) को दो विकल्प दिए जाते हैं:

  • खाता जारी रखना: जीवनसाथी मूल खाताधारक की 60 वर्ष की आयु पूरी होने तक शेष वर्षों का प्रीमियम खुद जमा कर सकता है और 60 वर्ष पूरे होने पर निर्धारित पेंशन का हकदार बन सकता है।

  • खाता बंद कराना: यदि जीवनसाथी योजना जारी नहीं रखना चाहता, तो कुल संचित फंड (Corpus) एकमुश्त जीवनसाथी के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है। (जीवनसाथी न होने की स्थिति में यह राशि पंजीकृत नॉमिनी को दी जाती है)।

समय से पहले खाता बंद करने के लिए सब्सक्राइबर को अपनी उस बैंक या डाकघर शाखा में जाना होगा जहां एपीवाई खाता खुला था। वहां ‘APY Account Closure Form (Voluntary Exit)’ भरना होता है। फॉर्म में प्रान (PRAN) नंबर, बचत खाता विवरण और खाता बंद करने का कारण दर्ज करके जमा करना होता है। सत्यापन के बाद कुछ कार्यदिवसों में राशि सीधे बैंक खाते में आ जाती है।

अटल पेंशन योजना लंबी अवधि में नियमित आय सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम है। अत्यधिक आपातकालीन स्थिति न हो, तो 60 वर्ष तक निवेश जारी रखना ही आर्थिक दृष्टिकोण से सबसे लाभकारी रहता है ताकि आजीवन पेंशन का सुरक्षा कवच बना रहे।