
भारतीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक बुलियन बाजार के मोर्चे पर एक चौंकाने वाला और सुखद आंकड़ा सामने आया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा विदेशी व्यापार आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में भारत के सोने के आयात (Gold Imports) में सालाना आधार पर 57.7 प्रतिशत यानी लगभग 57 फीसदी की भारी-भरकम गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल अगस्त 2025 में भारत ने विदेशों से 5.4 अरब अमेरिकी डॉलर का सोना खरीदा था, जो इस बार के अगस्त महीने में सिमटकर मात्र 2.3 अरब अमेरिकी डॉलर पर आ गया है। यदि इसकी तुलना ठीक पिछले महीने यानी जुलाई 2026 के 4.16 अरब डॉलर के सोने के आयात से भी करें, तब भी इसमें महीने-दर-महीने करीब 45 फीसदी की भारी कमी देखी गई है। केवल एक महीने के भीतर सोने के आयात बिल में आई 3.1 अरब डॉलर (लगभग 26,000 करोड़ रुपये से अधिक) की इस भारी कटौती ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को न केवल बड़ा सहारा दिया है, बल्कि भारत के चालू खाता घाटे (CAD) पर पड़ने वाले अवांछित दबाव को भी काफी हद तक हल्का कर दिया है।
आयात बिल में आई इस ऐतिहासिक गिरावट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस बारंबार की गई सार्वजनिक अपील से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से गैर-जरूरी विदेशी वस्तुओं और सोने की अंधाधुंध खरीद को सीमित करने का आह्वान किया था। प्रधानमंत्री ने अपने हालिया संबोधनों में रेखांकित किया था कि भारत जब 5 ट्रिलियन डॉलर और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेज विकास दर से आगे बढ़ रहा है, तो देश को अपनी बहुमूल्य विदेशी मुद्रा (Forex) का इस्तेमाल उत्पादक संपत्तियों के निर्माण में करना चाहिए। पीएम मोदी का तर्क था कि भारत को अपने विनिर्माण, सेमीकंडक्टर मिशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए अत्याधुनिक मशीनरी, जीपीयू (GPU), सीपीयू (CPU), हाई-टेक कंपोनेंट्स और कच्चे तेल के आयात के लिए विदेशी मुद्रा की भारी दरकार है। ऐसे में यदि खरबों रुपये का डॉलर केवल गैर-उत्पादक भौतिक सोने (Physical Gold) के आयात में खर्च हो जाएगा, तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर अनावश्यक जोखिम बढ़ेगा। प्रधानमंत्री द्वारा विदेश यात्राओं, भव्य शादियों के फिजूलखर्च और सोने की अनावश्यक होल्डिंग को कम करने की अपील ने मध्यमवर्ग और संस्थागत खरीदारों के मानस पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाला है, जिसका प्रत्यक्ष प्रतिबिंब अब व्यापारिक आंकड़ों में साफ दिखने लगा है।
प्रधानमंत्री की अपील के साथ-साथ बुलियन मार्केट के तकनीकी और मूल्य निर्धारण कारकों ने भी सोने के आयात को थामने में बड़ी भूमिका निभाई है। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी ब्याज दरों के अनुमानों के चलते सोने की कीमतें अपने सर्वकालिक उच्च स्तर (All-Time High) के आसपास बनी हुई हैं। घरेलू वायदा बाजार यानी एमसीएक्स (MCX) और स्थानीय सराफा बाजारों में 24 कैरेट सोने की कीमतें 74,000 से 76,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड दायरे में कारोबार कर रही हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ के चौक सराफा बाजार, कानपुर के बिरहाना रोड, वाराणसी के ठठेरी बाजार से लेकर दिल्ली के चांदनी चौक और मुंबई के जवेरी बाजार तक खुदरा खरीदारों ने इस रिकॉर्ड महंगाई के चलते नई खरीदारी से हाथ खींच लिया है। आम मध्यमवर्गीय ग्राहक सोने की इतनी ऊंची कीमतों पर नए गहने बनवाने के बजाय पुराने आभूषणों को गलाकर एक्सचेंज कराने (Old Gold Recycling) को प्राथमिकता दे रहे हैं। खुदरा मांग में आई इस नरमी के चलते बड़े ज्वैलर्स और बुलियन डीलरों के पास पहले से ही पर्याप्त इनवेंटरी मौजूद थी, जिसके चलते उन्होंने अगस्त के दौरान विदेशों से नया सोना मंगाने के ऑर्डर्स को काफी हद तक टाल दिया या रद्द कर दिया।
सोने के आयात में आई 3.1 अरब डॉलर की इस सीधी बचत का सबसे बड़ा और सकारात्मक असर देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) पर देखने को मिला है। ब्लूमबर्ग और वैश्विक अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया था कि कच्चे तेल और विनिर्माण इनपुट्स के बढ़ते आयात के कारण अगस्त में भारत का व्यापार घाटा 32.15 अरब डॉलर के पार निकल सकता है। लेकिन वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों ने सभी विश्लेषकों को चौंका दिया। अगस्त महीने में भारत का व्यापार घाटा घटकर 26.86 अरब डॉलर (लगभग 26.9 अरब डॉलर) पर सिमट गया, जो जुलाई में 31.98 अरब डॉलर के स्तर पर था। सीधे शब्दों में कहें तो व्यापार घाटे में एक महीने के भीतर 5 अरब डॉलर से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई। जहां एक तरफ देश का कुल मर्चेंडाइज आयात घरेलू औद्योगिक मांग और ऊर्जा जरूरतों के चलते 14.1 प्रतिशत बढ़कर 70.67 अरब डॉलर रहा, वहीं सोने के आयात में आई 57% की गिरावट ने आयात बिल के बेकाबू होने की आशंका को पूरी तरह कुचल दिया।
अगस्त के व्यापारिक आंकड़ों की सबसे चमकदार तस्वीर भारत के निर्यात (Exports) के मोर्चे पर देखने को मिली है। जहां सोने की खरीद में कमी आई, वहीं भारतीय वस्तुओं का कुल वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 26.12 प्रतिशत की छलांग लगाकर 43.81 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने नई दिल्ली में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स और टेक्सटाइल्स की मांग अमेरिका, यूरोपीय संघ, ब्रिक्स देशों और दक्षिण-पूर्व एशियाई उभरती अर्थव्यवस्थाओं में जबरदस्त बनी हुई है। सोने के आयात पर विदेशी मुद्रा की बचत और निर्यात से होने वाली डॉलर की इस रिकॉर्ड आमद ने भारतीय रुपये (INR) को भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्थिरता प्रदान की है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जो 3.1 अरब डॉलर सोने के लॉकरों में बंद होने से बचाए गए हैं, उनका उपयोग देश में आगामी सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स, डेटा सेंटर्स, सोलर पीवी मॉड्यूल्स और कैपिटल गुड्स के आयात में किया जा सकेगा, जो आने वाले वर्षों में देश की जीडीपी ग्रोथ को 7 से 8 प्रतिशत की दर से रफ्तार देने के लिए सबसे बड़ा ईंधन बनेंगे।
अगस्त में सोने के आयात में आई इस ऐतिहासिक गिरावट के बाद अब पूरे बुलियन उद्योग की निगाहें आगामी त्योहारी और वैवाहिक सीजन पर टिक गई हैं। भारतीय संस्कृति में पितृपक्ष की समाप्ति के बाद नवरात्रि, दशहरा, करवाचौथ, धनतेरस और दिवाली पर सोने-चांदी की खरीदारी को अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके ठीक बाद नवंबर और दिसंबर में हिंदू शादियों का सबसे बड़ा लग्न सीजन शुरू होगा। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) और जेम्स एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के प्रतिनिधियों का मानना है कि अगस्त की यह गिरावट एक ‘अस्थायी ठहराव’ हो सकती है। बुलियन विश्लेषकों का आकलन है कि अगर सितंबर के अंतिम सप्ताह तक सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में थोड़ा भी करेक्शन (मुनाफावसूली) आता है, तो भारतीय ज्वैलर्स धनतेरस की भारी मांग को पूरा करने के लिए सितंबर के आखिर और अक्टूबर के शुरुआती पखवाड़े में सोने के आयात में दोबारा तेजी ला सकते हैं। हालांकि, सरकार द्वारा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) के प्रति निवेशकों के बढ़ते रुझान और डिजिटल गोल्ड व गोल्ड ईटीएफ (ETF) में आ रहे निवेश ने यह भी सुनिश्चित किया है कि लोग अब लॉकर में ईंटें या बिस्कुट रखने के बजाय वित्तीय संपत्तियों में निवेश कर रहे हैं, जिससे देश के आयात बिल को लंबे समय तक सुरक्षित और संतुलित रखने में मदद मिल रही है।
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