
देश के महानगरों और टियर-2 शहरों में दैनिक आवागमन के लिए कैब और बाइक-टैक्सी सेवाओं पर निर्भर रहने वाले करोड़ों यात्रियों के अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार ने एक कड़ा और नजीर पेश करने वाला कदम उठाया है। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली सर्वोच्च विनियामक संस्था ‘केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण’ (CCPA) ने प्रमुख राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म रैपिडो (Rapido – Roppen Transportation Services Pvt Ltd) पर अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) और भ्रामक तौर-तरीके अपनाने के आरोप में 10 लाख रुपये का भारी जुर्माना ठोंक दिया है। मुख्य उपभोक्ता आयुक्त के नेतृत्व में हुई इस उच्चस्तरीय कार्रवाई ने कैब एग्रीगेटर कंपनियों के उन छुपे हुए एल्गोरिदम और व्यावसायिक हथकंडों को बेनकाब कर दिया है, जिनके जरिए आम मुसाफिरों से मजबूरी का फायदा उठाकर अतिरिक्त पैसे वसूले जा रहे थे। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी से लेकर दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई जैसे भीड़भाड़ वाले शहरों में हर रोज लाखों कामकाजी लोग, छात्र और बुजुर्ग इन राइड-हेलिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं। सीसीपीए की इस दंडात्मक कार्रवाई के बाद साफ हो गया है कि अब तकनीक के नाम पर उपभोक्ताओं की जेब काटने वाली कंपनियों की मनमानी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस पूरे विवाद और जुर्माने की जड़ में रैपिडो ऐप पर पेश किया गया वह विवादास्पद फीचर और दावा था, जिसमें ग्राहकों को यह लालच दिया जाता था कि यदि वे मानक किराए से अधिक भुगतान करेंगे, तो उन्हें तुरंत यानी कुछ ही मिनटों के भीतर कैब या बाइक मिल जाएगी। आम तौर पर जब कोई यात्री ऑफिस पहुंचने की जल्दी में या किसी मेडिकल इमरजेंसी के दौरान ऐप खोलता था, तो स्क्रीन पर पहले यह दिखाया जाता था कि आस-पास कोई ड्राइवर उपलब्ध नहीं है या वेटिंग टाइम 15 से 20 मिनट का है। इसके ठीक नीचे एक ‘प्रीमियम/प्रायोरिटी’ या अधिक किराए वाला विकल्प पॉप-अप होता था, जिस पर क्लिक करते ही अतिरिक्त 30 से 50 रुपये या उससे अधिक की रकम जुड़ जाती थी और चमत्कारिक रूप से ड्राइवर तुरंत असाइन हो जाता था। सीसीपीए की जांच में यह पाया गया कि कंपनी ने ‘फास्टर राइड’ (जल्दी पिकअप) का यह भ्रामक तंत्र कृत्रिम रूप से तैयार किया था। यह सीधे तौर पर उपभोक्ता को मानसिक दबाव में डालकर उससे अधिक पैसे ऐंठने का एक सुनियोजित प्रयास था, जिसे उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत गंभीर धोखाधड़ी और भ्रामक प्रचार माना गया है।
रैपिडो पर की गई यह कार्रवाई केवल ज्यादा किराए के वादे तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस्तेमाल होने वाले ‘डार्क पैटर्न्स’ (Dark Patterns) के खिलाफ भी एक बड़ा प्रहार है। सीसीपीए को राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) पर हजारों ऐसी शिकायतें मिली थीं, जिनमें यात्रियों ने आरोप लगाया था कि राइड बुक करने के बाद ड्राइवर जानबूझकर फोन नहीं उठाते या पिकअप लोकेशन की तरफ बढ़ने के बजाय एक ही जगह खड़े रहते हैं ताकि थक-हारकर यात्री खुद ही राइड कैंसिल कर दे। जैसे ही उपभोक्ता परेशान होकर बुकिंग रद्द करता था, ऐप तुरंत उसके खाते पर ‘कैंसिलेशन फीस’ (Cancellation Fee) थोप देता था। अगली बार ऐप खोलते ही जब तक वह पिछला जुर्माना नहीं चुकाया जाता, तब तक नई राइड बुक करने की अनुमति नहीं दी जाती थी। इसके विपरीत, यदि ड्राइवर अपनी मर्जी से राइड कैंसिल करता था या 15 मिनट तक नहीं आता था, तो यात्री को कोई हर्जाना नहीं दिया जाता था। नियामक ने इस एकतरफा व्यवस्था को पूरी तरह गैर-कानूनी और उपभोक्ता-विरोधी करार दिया है।
राइड-हेलिंग इंडस्ट्री में सबसे बड़ा खेल ‘डायनेमिक प्राइसिंग’ या ‘सर्ज प्राइसिंग’ (Surge Pricing) के नाम पर खेला जाता है। जब भी मौसम खराब होता है, बारिश होती है या ऑफिस छूटने का पीक आवर (सुबह 9 से 11 और शाम 6 से 8 बजे) होता है, तो कंपनियों के एल्गोरिदम कृत्रिम मांग का हवाला देकर सामान्य से दोगुना या तीन गुना तक किराया बढ़ा देते हैं। उपभोक्ता आयोग की जांच में यह सवाल भी उठा कि आखिर कैब कंपनियों के बैकएंड एल्गोरिदम किस आधार पर किराया तय करते हैं? कई मामलों में देखा गया कि एक ही स्थान पर खड़े दो अलग-अलग यात्रियों को एक ही गंतव्य के लिए अलग-अलग किराया दिखाया जा रहा था—जिसके फोन की बैटरी कम थी या जो प्रीमियम आईफोन इस्तेमाल कर रहा था, उससे ज्यादा किराया मांगा गया। सीसीपीए ने माना कि मूल्य निर्धारण (Pricing Transparency) में पूर्ण खुलासे का अभाव प्रतिस्पर्धा को नष्ट करता है और डिजिटल एकाधिकार का फायदा उठाकर उपभोक्ताओं का खुला शोषण करता है।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने रैपिडो को ₹10 लाख का वित्तीय जुर्माना भरने का आदेश देने के साथ-साथ कई कड़े निर्देश भी जारी किए हैं। प्राधिकरण ने कंपनी को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वह अपने मोबाइल ऐप से किसी भी ऐसे फीचर, विज्ञापन या दावों को तत्काल प्रभाव से हटाए जो यह वादा करते हैं कि ‘अतिरिक्त किराया देने पर जल्दी गाड़ी मिलेगी।’ नियामक ने कंपनी से कहा है कि राइड असाइनमेंट की प्रक्रिया निष्पक्ष, भौगोलिक निकटता (GPS Proximity) और पारदर्शी कतार प्रणाली पर आधारित होनी चाहिए, न कि इस बात पर कि कौन ग्राहक ज्यादा पैसे फेंकने को तैयार है। इसके अलावा, रैपिडो को अपने कैंसिलेशन पॉलिसी को पूरी तरह संशोधित करने और यदि ड्राइवर की गलती से राइड रद्द होती है तो ग्राहक पर कोई पेनल्टी न लगाने का सख्त अनुपालन हलफनामा (Compliance Report) तय समयसीमा के भीतर जमा करने का आदेश दिया गया है।
रैपिडो पर हुआ यह एक्शन ओला (Ola), उबर (Uber) और इनड्राइव (inDrive) जैसी अन्य सभी कैब एग्रीगेटर कंपनियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ‘मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2020’ के अनुसार, कोई भी कैब कंपनी बिना किसी ठोस कारण के बेस फेयर से अधिक मनमाना सर्ज नहीं लगा सकती और न ही यात्रियों को अनुचित तरीके से परेशान कर सकती है। यदि आप भी किसी कैब या बाइक-टैक्सी ऐप द्वारा अवैध कैंसिलेशन चार्ज, गलत किराए की वसूली या अभद्र व्यवहार का शिकार होते हैं, तो चुप रहने के बजाय अपने अधिकारों का प्रयोग करें:
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राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH): केंद्र सरकार के टोल-फ्री नंबर 1915 पर सीधे कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
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वॉट्सऐप से शिकायत: उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आधिकारिक वॉट्सऐप नंबर 8800001915 पर मैसेज भेजकर शिकायत का विवरण और बिल की फोटो साझा करें।
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ऑनलाइन पोर्टल: केंद्र सरकार के consumerhelpline.gov.in (INGRAM) पोर्टल पर जाकर अपने मोबाइल नंबर से लॉगिन करें और संबंधित कैब कंपनी के खिलाफ औपचारिक परिवाद दाखिल करें।
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डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें: जब भी किसी राइड में विवाद हो, तो ऐप स्क्रीन के स्क्रीनशॉट, ड्राइवर की लोकेशन का मैप और कटे हुए पैसे का बैंक मैसेज तुरंत सुरक्षित रख लें।
डिजिटल भारत के इस दौर में तकनीक का उद्देश्य नागरिकों के जीवन को सुगम बनाना है, न कि कंपनियों के मुनाफे के लिए उपभोक्ताओं को बंधक बनाना। सीसीपीए का यह ₹10 लाख का जुर्माना भले ही वित्तीय रूप से एक कॉर्पोरेट कंपनी के लिए छोटा लगे, लेकिन इसने यह स्पष्ट और कड़ा संदेश दे दिया है कि भारत के उपभोक्ता कानून अब डिजिटल शोषण के खिलाफ पूरी ताकत से जाग चुके हैं।
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