
रसोई के बजट और आम आदमी की थाली का सबसे जरूरी हिस्सा माने जाने वाले प्याज की आसमान छूती कीमतों पर अब ब्रेक लग गया है। त्योहारी सीजन से ठीक पहले रसोई के बजट को बिगाड़ रहे प्याज के दामों में देश भर की थोक मंडियों के भीतर बड़ी नरमी दर्ज की गई है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2 सितंबर से 11 सितंबर के बीच देश भर की थोक मंडियों में प्याज के ऑल-इंडिया मॉडल भाव (All-India Average Modal Price) में 9.1 प्रतिशत की सीधी गिरावट आई है। जो प्याज थोक बाजार में 3,721 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर कारोबार कर रहा था, उसका औसत भाव गिरकर अब 3,383 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, प्रयागराज से लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर, पटना, कोलकाता और मुंबई तक के उपभोक्ताओं के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। कुछ सप्ताह पहले तक जो प्याज खुदरा बाजार में 60 से 70 रुपये प्रति किलो तक बिकने लगा था, सरकारी दखल और मंडियों में बढ़ी आवक के चलते उसकी कीमतों में अब तेज करेक्शन शुरू हो गया है।
प्याज की कीमतों में आई इस तेज गिरावट के पीछे केंद्र सरकार की सुनियोजित और आक्रामक मार्केट इंटरवेंशन स्ट्रैटेजी है। जब अगस्त के महीने में प्याज के दाम अचानक उछलने लगे थे, तब केंद्र सरकार ने अपने ‘प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड’ (PSF) के तहत बनाए गए बफर स्टॉक का रणनीतिक इस्तेमाल शुरू किया। सरकार ने नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) को सीधे मैदान में उतार दिया। 27 अगस्त से सरकार ने राजधानी दिल्ली समेत देश के प्रमुख उपभोग केंद्रों में मात्र 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर प्याज की खुदरा बिक्री शुरू करा दी। इसके लिए केंद्रीय भंडार, सफल (Safal) आउटलेट्स, नेफेड और एनसीसीएफ के 100 से अधिक स्टोर्स के साथ-साथ दर्जनों मोबाइल वैन को कॉलोनियों और चौराहों पर तैनात कर दिया गया। जब उपभोक्ताओं को सरकारी वैन से 35 रुपये प्रति किलो में बढ़िया क्वालिटी का प्याज मिलने लगा, तो खुदरा और थोक व्यापारियों के लिए ऊंची कीमतों पर प्याज बेचना नामुमकिन हो गया और बाजार में जमाखोरी की अटकलें पल भर में धराशायी हो गईं।
कीमतों को नियंत्रित करने के लिए इस बार सरकार ने लॉजिस्टिक्स के मोर्चे पर जो सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला, वह था भारतीय रेलवे के सहयोग से चलाई गई ‘कांदा एक्सप्रेस’ (Kanda Express)। अब तक देश के प्रमुख प्याज उत्पादक केंद्र यानी महाराष्ट्र के नासिक और लासलगांव से उत्तर और पूर्वी भारत के शहरों तक प्याज मुख्य रूप से ट्रकों और भारी वाहनों के जरिए भेजा जाता था। सड़क मार्ग से लंबी दूरी तय करने में न केवल भारी डीजल भाड़ा लगता था, बल्कि 4 से 6 दिन का समय लगने के कारण रास्ते में प्याज सड़ने और वजन घटने का नुकसान भी होता था। सरकार ने इस समस्या को हल करने के लिए पूरी की पूरी मालगाड़ी (Railway Rakes) बुक करके नासिक से सीधे दिल्ली, गुवाहाटी, चेन्नई, मदुरै, वाराणसी और पटना जैसे बड़े उपभोग केंद्रों के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ रवाना की। अकेले नासिक से हजारों टन प्याज के विशेष रैक 24 से 36 घंटे के भीतर सीधे बड़े शहरों के रेलवे यार्ड तक पहुंचे। रेलवे और सड़क परिवहन के इस हाइब्रिड मॉडल से माल ढुलाई लागत में भारी बचत हुई और मंडियों में प्याज की उपलब्धता रातों-रात बढ़ गई, जिससे थोक आढ़तियों के पास दाम गिराने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।
थोक मंडियों में प्याज के भाव टूटने का दूसरा बड़ा वैज्ञानिक कारण मंडियों में होने वाली आवक (Arrivals) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में 2 अप्रैल से 11 सितंबर के बीच देश भर की मंडियों में लगभग 85.06 लाख मीट्रिक टन (LMT) प्याज की आवक दर्ज की गई है। पिछले साल इसी समान अवधि के दौरान यह आंकड़ा 82.48 लाख मीट्रिक टन था, यानी इस साल मंडियों में प्याज की आवक में सालाना आधार पर 3.14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्य महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में भी दाम गिरे हैं। महाराष्ट्र की मंडियों में औसत भाव 4,011 रुपये प्रति क्विंटल से गिरकर 3,842 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया, जो लगभग 4.2 प्रतिशत की शुद्ध गिरावट दर्शाता है। जब आढ़तियों और बड़े स्टॉकिस्टों को यह अहसास हुआ कि सरकार अपने बफर स्टॉक से 1.21 लाख टन से अधिक प्याज चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारने जा रही है, तो उन्होंने अपने गोदामों में दबाकर रखा गया पुराना रबी प्याज भी तेजी से मंडियों में बेचना शुरू कर दिया, जिससे सप्लाई में अचानक उछाल आ गया।
आगामी नवरात्रि, दशहरा, दिवाली और छठ पूजा के दौरान प्याज की कीमतों को लेकर आम उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह राहत आगे भी बरकरार रहेगी। उपभोक्ता मामले मंत्रालय के सचिव और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, देश में प्याज की कुल उपलब्धता पूरी तरह से संतोषजनक और आरामदायक स्थिति में है। कृषि मंत्रालय के ताजा अनुमानों के मुताबिक, फसल वर्ष 2025-26 के दौरान देश में कुल प्याज उत्पादन लगभग 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 307.67 लाख टन के बंपर उत्पादन के लगभग बराबर है। इसके अलावा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ इलाकों से अगेती खरीफ प्याज की नई फसल की आवक सितंबर के अंतिम सप्ताह और अक्टूबर की शुरुआत से मंडियों में पहुंचनी शुरू हो जाएगी। इसके बाद मुख्य खरीफ और लेट-खरीफ की आवक शुरू होगी। नई फसल की दस्तक और सरकार के पास मौजूद मजबूत बफर स्टॉक के चलते आने वाले त्योहारी सीजन में प्याज की कीमतों में किसी बड़े और बेकाबू उछाल की कोई संभावना नहीं दिखाई दे रही है।
कीमतों में आई इस 9.1% की गिरावट के बाद देश के अलग-अलग प्रमुख शहरों में प्याज के भाव काफी हद तक संतुलित हो गए हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की दुबग्गा और सीतापुर रोड नवीन गल्ला मंडी में प्याज का थोक भाव 3,100 से 3,400 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में आ गया है, जिसके चलते स्थानीय खुदरा बाजारों (हजरतगंज, गोमती नगर, आलमबाग) में अच्छा प्याज 40 से 45 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की एशिया की सबसे बड़ी आजादपुर मंडी में थोक भाव 3,000 से 3,500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास दर्ज किया गया है, जबकि एनसीसीएफ और नेफेड की वैन तथा आउटलेट्स पर आम जनता को यह 35 रुपये प्रति किलो की तय सरकारी कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है। महाराष्ट्र के नासिक और लासलगांव एपीएमसी में उत्तम क्वालिटी के प्याज का मॉडल भाव 3,200 से 3,600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बना हुआ है। मुंबई के वाशी थोक बाजार में प्याज 3,300 से 3,700 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। बिहार की राजधानी पटना और पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी कांदा एक्सप्रेस से रैक पहुंचने के बाद खुदरा कीमतों में 8 से 10 रुपये प्रति किलो की नरमी देखी गई है और वहां भाव 42 से 48 रुपये प्रति किलो के आसपास आ गए हैं।
सरकार केवल प्याज बेचने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह आधुनिक तकनीक और डेटा एनालिटिक्स के जरिए देश भर में मूल्य नियंत्रण का एक मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार कर चुकी है। उपभोक्ता मामले विभाग देश भर के 579 प्रमुख मूल्य निगरानी केंद्रों (Price Monitoring Centres) से रोज सुबह प्याज सहित 41 आवश्यक खाद्य वस्तुओं के दैनिक खुदरा और थोक भावों की रियल-टाइम ट्रैकिंग कर रहा है। किस राज्य में प्याज की आवक कम हो रही है और कहां कृत्रिम किल्लत पैदा करने की कोशिश की जा रही है, इसका डेटा सीधे केंद्र सरकार के डैशबोर्ड पर आ जाता है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी भी राज्य या उपभोग केंद्र में कीमतें दोबारा बढ़ने के संकेत मिलते हैं, तो बिना किसी देरी के वहां तुरंत अतिरिक्त बफर स्टॉक और विशेष ट्रेनें भेजी जाएंगी। इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन को कोल्ड स्टोरेज और थोक व्यापारियों के गोदामों की औचक जांच करने और अवैध स्टॉक लिमिट का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार की इस बहुआयामी रणनीति ने साबित कर दिया है कि समय रहते उठाए गए नीतिगत और तकनीकी कदमों से महंगाई पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सकता है।
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