
रायबरेली में धार्मिक आयोजन के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीमद्भागवत कथा की प्राचीन परंपरा और भारतीय संस्कृति में आस्था की भूमिका पर विस्तार से बात की। सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की धरती का भागवत कथा से हजारों वर्षों पुराना संबंध रहा है। उन्होंने बताया कि करीब पांच हजार वर्ष पहले यह क्षेत्र भागवत भूमि के रूप में जाना जाता था और इसी धरती के शुकतीर्थ में शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को पहली भागवत कथा सुनाई थी।
शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को सुनाई थी पहली भागवत कथा
सीएम योगी ने भागवत कथा की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शुकतीर्थ में शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत की कथा सुनाई थी। यही प्रसंग सनातन परंपरा में भागवत कथा के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में माना जाता है। योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत को रेखांकित करते हुए कहा कि इस भूमि ने ज्ञान, तप और धार्मिक परंपराओं को लंबे समय से संरक्षित किया है।
हिमालय से रामेश्वरम तक आस्था से जुड़ा भारत
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की एकता केवल राजनीतिक सीमाओं या नक्शे तक सीमित नहीं है। देश की सांस्कृतिक एकता आस्था और धार्मिक परंपराओं की मजबूत कड़ियों से जुड़ी हुई है। उन्होंने हिमालय से लेकर दक्षिण भारत के रामेश्वरम तक मौजूद ज्योतिर्लिंगों का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी परंपराएं होने के बावजूद भगवान शिव के प्रति श्रद्धा पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ती है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि तमिलनाडु के श्रद्धालुओं में महादेव के प्रति जो आस्था दिखाई देती है, वही भावना उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वोत्तर और महाराष्ट्र समेत देश के दूसरे हिस्सों में भी देखने को मिलती है। उनके मुताबिक यही धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं भारत की एकता को मजबूत करती हैं।
अवध में हनुमान भक्ति का भी किया जिक्र
सीएम योगी ने अवध क्षेत्र की धार्मिक पहचान का उल्लेख करते हुए भगवान हनुमान की भक्ति को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि रामायण में प्रभु राम की अनन्य भक्ति के कारण हनुमान जी संसारभर में पूजनीय हुए। आज सनातन परंपरा को मानने वाले लोग हनुमान जी की पूजा करके स्वयं को धन्य मानते हैं।
उन्होंने भगवान शिव को सनातन परंपरा की बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि महादेव लोकमंगल के देवता हैं। उन्होंने लोककल्याण के लिए विष तक धारण किया और समाज में मौजूद नकारात्मक शक्तियों तथा विकारों को दूर करने का संदेश दिया।
विदेशी आक्रमणों के दौर में कथाओं ने बचाए रखी सांस्कृतिक एकता
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भारत के मध्यकालीन इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कमजोरियों के कारण देश को अलग-अलग समय में विदेशी आक्रांताओं का सामना करना पड़ा। इस दौरान धार्मिक स्थलों और लोगों की आस्था को भी नुकसान पहुंचाने के प्रयास हुए।
योगी आदित्यनाथ के अनुसार, ऐसे कठिन दौर में व्यासपीठ से सुनाई जाने वाली धार्मिक कथाओं ने समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मुताबिक कथाओं और धार्मिक परंपराओं ने भारत की सांस्कृतिक एकता को कमजोर नहीं होने दिया।
नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों की तपस्या का उल्लेख
सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश को केवल धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि ज्ञान और तप की भूमि भी बताया। उन्होंने नैमिषारण्य का जिक्र करते हुए कहा कि यहां 88 हजार ऋषियों ने तपस्या की और ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाया। इसी तप और साधना से जुड़ी ज्ञानधारा को पुराणों में सुरक्षित रखा गया, जिसका महत्व आज भी बना हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक उत्तर प्रदेश की धरती पर ऐसी पवित्र कथाओं और धार्मिक परंपराओं का प्रवाह जारी रहेगा, तब तक सनातन संस्कृति की परंपरा मजबूत बनी रहेगी। उन्होंने भारतीय संस्कृति और आस्था को देश की एकता और शक्ति से जोड़ते हुए अपना संदेश रखा।
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