
उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में फर्जी प्रमाण पत्रों (Fake Documents) के सहारे नौकरी हथियाने वाले शिक्षकों के खिलाफ बेसिक शिक्षा विभाग ने अब तक का सबसे कड़ा और सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। शासन और विभाग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन शिक्षकों ने फर्जी शैक्षिक योग्यता, जाली टीईटी (TET) प्रमाण पत्र या अनामिका शुक्ला जैसे बहुचर्चित मामलों की तर्ज पर किसी अन्य के अभिलेखों पर नौकरी हासिल की थी, उन्हें न केवल तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जा रहा है, बल्कि सेवा अवधि के दौरान ली गई पूरी तनख्वाह (Salary Recovery) ब्याज सहित वापस वसूलने का आदेश जारी कर दिया गया है। 10 से 15 साल से अधिक समय तक सेवा दे चुके फर्जी शिक्षकों की भी अब कोई दलील काम नहीं आ रही है।
विभागीय जांच और विजिलेंस पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों (जैसे गोंडा, बस्ती, देवरिया, कुशीनगर, प्रयागराज, अलीगढ़ आदि) में कई शिक्षक पिछले 10 से 15 वर्षों से फर्जी डिग्रियों के सहारे आराम से पढ़ा रहे थे और पदोन्नति पाकर प्रधानाध्यापक तक बन चुके थे। जब मानव संपदा पोर्टल (Manav Sampada Portal) पर दस्तावेजों के डिजिटल सत्यापन और विश्वविद्यालयों (जैसे डॉ. बी. आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय) से रिकॉर्ड का क्रॉस-वेरिफिकेशन कराया गया, तो इन डिग्रियों की पोल खुल गई। कई शिक्षकों ने यह तर्क देकर राहत पाने की कोशिश की कि वे लंबे समय से सेवा में हैं और उन्होंने नियमित रूप से अध्यापन कार्य किया है, लेकिन उच्च न्यायालय और बेसिक शिक्षा परिषद के स्पष्ट आदेशों के तहत फर्जीवाड़े के आधार पर की गई किसी भी नियुक्ति को ‘शून्य’ (Void-ab-initio) माना गया है।
जारी आदेश के मुताबिक फर्जी पाए गए शिक्षकों से रिकवरी की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट रूपरेखा तय की गई है:
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वेतन और भत्तों की पूरी वसूली: शिक्षक के रूप में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से लेकर बर्खास्तगी के दिन तक सरकार के खजाने से जितना भी वेतन, महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और बोनस दिया गया है, उन सभी की वसूली की जाएगी।
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भू-राजस्व बकाए (Land Revenue) की तरह वसूली: यदि बर्खास्त शिक्षक स्वेच्छा से सरकारी धन वापस जमा नहीं करते हैं, तो जिला प्रशासन (जिलाधिकारी कार्यालय) के माध्यम से ‘राजस्व वसूली प्रमाण पत्र’ (R.C.) जारी किया जाएगा। इसके तहत आरोपी की अचल संपत्ति कुर्क करके रकम वसूली जाएगी।
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पीएफ और ग्रेच्युटी के लाभ भी समाप्त: फर्जी पाए जाने पर प्रोविडेंट फंड (PF) पर सरकारी अंशदान और ग्रेच्युटी समेत किसी भी प्रकार के पेंशनरी लाभ का कोई अधिकार नहीं रहेगा।
बेसिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक और सचिव द्वारा सभी जनपदों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को निर्देशित किया गया है कि वे केवल सेवा समाप्ति तक सीमित न रहें। फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं—जैसे धोखाधड़ी (Cheating), जाली दस्तावेज तैयार करना (Forgery) और सरकारी धन का गबन—के तहत संबंधित थानों में अनिवार्य रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराएं। इसके साथ ही, इस पूरे सिंडिकेट में शामिल दलालों और फर्जी अंकतालिकाएं जारी करने वाले गिरोहों की जड़ों तक पहुंचने के लिए एसटीएफ (STF) को भी जांच से जोड़ा जा रहा है।
विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए लागू किए गए डिजिटल सिस्टम ने फर्जी शिक्षकों की पहचान को आसान बना दिया है:
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मानव संपदा पोर्टल पर पैन और आधार सीडिंग: शिक्षकों के पैन कार्ड, आधार कार्ड और सर्विस बुक के डेटा का जब केंद्रीय स्तर पर मिलान हुआ, तो एक ही नाम, रोल नंबर या पैन पर कई-कई जिलों में नौकरी करने के चौंकाने वाले मामले पकड़े गए।
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यूनिवर्सिटी डेटाबेस से ऑटो-वेरिफिकेशन: राज्य विश्वविद्यालयों के डिजिटल अभिलेखों से सीधे 10वीं, 12वीं, स्नातक और बीएड/बीटीसी प्रमाण पत्रों का मिलान कराया गया, जिससे हाथ से बनी या प्रिंट की गई जाली मार्कशीट का भेद तुरंत खुल गया।
सरकार के इस कड़े कदम से उन लाखों योग्य और वास्तविक अभ्यर्थियों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है जो वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं लेकिन फर्जीवाड़े के कारण वंचित रह जाते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग का यह स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा के मंदिर में धोखेबाजी के जरिए प्रवेश करने वालों को चाहे जितने वर्ष बीत चुके हों, कानून के शिकंजे और सरकारी वसूली से बच पाना अब पूरी तरह नामुमकिन है।
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