
बिहार की प्रशासनिक और राजनीतिक गलियों में इस समय हड़कंप मचा हुआ है, जिसका मुख्य केंद्र मिथिलांचल का ऐतिहासिक और प्रमुख शहर दरभंगा बना हुआ है। भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर नकेल कसने के लिए राज्य की विशेष आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक बहुत ही बड़ा और कड़ा कदम उठाते हुए दरभंगा जिले के बहादुपुर प्रखंड के खंड विकास अधिकारी (BDO) आनंद कुमार विभूति के विभिन्न ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की है। इस हाई-प्रोफाइल रेड के दौरान जैसी ही विजिलेंस और ईओयू की टीमों को लेकर प्रशासनिक अमला संबंधित ठिकानों पर पहुंचा, वहां एक नाटकीय मोड़ आ गया क्योंकि जांच दल के पहुंचने से ठीक पहले ही बीडीओ आनंद कुमार विभूति को इसकी भनक लग गई और वे मौके से फरार होने में कामयाब हो गए। इस सनसनीखेज घटना के बाद से पूरे प्रशासनिक महकमे में भूचाल आ गया है और यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि आखिर एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी को इस तरह की गोपनीय कार्रवाई की लीक पहले ही कैसे मिल गई।
ईओयू की इस अचानक और बड़ी कार्रवाई की पूरी पृष्ठभूमि और शुरुआती सुराग
बिहार में भ्रष्ट अधिकारियों और बेहिसाब संपत्ति अर्जित करने वाले लोक सेवकों के खिलाफ पिछले कुछ समय से आर्थिक अपराध इकाई (EOU) का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इसी निरंतर चल रही जांच प्रक्रिया के तहत बहादुपुर के बीडीओ आनंद कुमार विभूति के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) और भ्रष्टाचार के कई गंभीर मामलों की गुप्त सूचनाएं ईओयू तक पहुंच रही थीं। जब विभाग ने इन शिकायतों के आधार पर प्राथमिक साक्ष्यों को खंगाला और उनके वित्तीय लेन-देन तथा चल-अचल संपत्तियों का आकलन किया, तो मामला प्रथम दृष्टया काफी संदिग्ध पाया गया। इसके बाद नियमों के तहत अदालत से सर्च वारंट प्राप्त करके ईओयू की विशेष टीमों का गठन किया गया, जिन्हें दरभंगा के बहादुपुर स्थित उनके कार्यालय, आधिकारिक आवास और पैतृक ठिकानों पर एक साथ छापेमारी करने के लिए भेजा गया था, ताकि वित्तीय अनियमितताओं के पुख्ता दस्तावेज और सबूत बरामद किए जा सकें।
छापेमारी की भनक मिलते ही बीडीओ का फरार होना, सुरक्षा तंत्र और लीक पर उठते सवाल
यह पूरा ऑपरेशन जितना चौंकाने वाला था, उससे कहीं अधिक हैरान करने वाली वह बात रही जब विजिलेंस की टीम तय ठिकानों पर पहुंची तो वहां मुख्य आरोपी यानी बीडीओ आनंद कुमार विभूति नदारद मिले। स्थानीय सूत्रों और जांच टीम से मिली जानकारी के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि छापेमारी की इस गोपनीय कार्रवाई की भनक किसी अंदरूनी सूत्र के जरिए ठीक वक्त से पहले ही बीडीओ तक पहुंच गई थी, जिसका फायदा उठाकर वे मौके से रफूचक्कर हो गए। एक सरकारी अधिकारी द्वारा इस तरह जांच एजेंसियों को चकमा देकर फरार हो जाना प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान खड़ा करता है। ईओयू के उच्च अधिकारियों ने इस बात को बेहद गंभीरता से लिया है और अब इस बात की भी आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है कि आखिर इस गोपनीय रेड की जानकारी लीक कहां से हुई और कौन-कौन लोग इस लीकेज में शामिल हो सकते हैं।
ठिकानों पर तलाशी के दौरान मिले अहम दस्तावेज और वित्तीय अनियमितताओं के सुराग
भले ही मुख्य आरोपी बीडीओ मौके पर हाथ नहीं लग सके, लेकिन ईओयू की टीमों ने उनके आवास और अन्य ठिकानों पर अपनी तलाशी अभियान को बिना रुके पूरी सख्ती के साथ जारी रखा। इस दौरान विजिलेंस के हाथ कई ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक पासबुक, निवेश से जुड़े कागजात और जमीन-जायदाद के ब्योरे लगे हैं, जो उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से कई गुना अधिक संपत्ति का संकेत दे रहे हैं। टीम ने डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित करने के लिए उनके लैपटॉप, कंप्यूटर और मोबाइल फोन्स की क्लोनिंग और डेटा रिकवरी का काम भी शुरू कर दिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने भ्रष्टाचार के जरिए कहां-कहां और कितनी संपत्ति छिपा रखी है। जांच अधिकारियों का यह मानना है कि इन दस्तावेजों की गहन स्क्रूटनी के बाद इस पूरे रैकेट और इसमें शामिल अन्य संदिग्ध लोगों के चेहरे भी बेनकाब हो जाएंगे, जिससे आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।
प्रशासनिक गलियारों में मचा हड़कंप और फरार अधिकारी की तलाश में तेज हुई दबिश
दरभंगा के बहादुपुर बीडीओ के ठिकानों पर हुई इस कार्रवाई के बाद से पूरे उत्तर बिहार के प्रशासनिक हलकों में दहशत का माहौल है और हर भ्रष्ट अधिकारी के मन में ईओयू का खौफ साफ तौर पर देखा जा सकता है। सरकार और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों का यह स्पष्ट संदेश है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर सख्ती से अमल किया जाएगा, चाहे आरोपी कितना भी रसूखदार क्यों न हो। फरार चल रहे बीडीओ आनंद कुमार विभूति की गिरफ्तारी के लिए ईओयू की टीमों ने उनके संभावित ठिकानों, रिश्तेदारों और करीबी सहयोगियों के यहां लगातार दबिश देना शुरू कर दिया है, और उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर तथा अन्य कानूनी प्रक्रियाएं भी तेज कर दी गई हैं। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि कानून की लंबी बाहें इस फरार अधिकारी तक कब पहुंचती हैं और भ्रष्टाचार के इस काले कारोबार की तह तक जाकर विजिलेंस क्या-क्या खुलासे करती है।
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