
भारत में करियर की शुरुआत करते हुए लाखों वेतनभोगी पेशेवर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश शुरू करते हैं। हालांकि, बेहतर अवसरों के चलते जब कोई व्यक्ति विदेश शिफ्ट हो जाता है और आयकर कानूनों के तहत अनिवासी भारतीय (NRI) बन जाता है, तो उसके मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि भारत में चल रहे उसके एनपीएस खाते का क्या होगा? क्या खाता बंद कराना पड़ेगा, या विदेश से भी इसमें पैसे जमा किए जा सकते हैं?
पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, विदेश शिफ्ट होने पर आपका एनपीएस खाता बंद नहीं होता है। एनपीएस पूरी तरह से ‘पोर्टेबल’ (Portability) है, जिसका अर्थ है कि नौकरी या भौगोलिक स्थिति (देश) बदलने पर भी आपका परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) हमेशा सक्रिय और वैध रहता है। हालांकि, रेजिडेंट से एनआरआई बनने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और निवेश के कुछ नियमों में अहम बदलाव जरूर आ जाते हैं।
यदि आप भारतीय नागरिक के रूप में विदेश शिफ्ट हुए हैंभारत में नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) अकाउंट खोलने के बाद यदि कोई व्यक्ति विदेश शिफ्ट हो जाता है (NRI बन जाता है), तो उसका खाता बंद नहीं होता। PFRDA (पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण) और FEMA (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) के नियमों के अनुसार यह खाता पूरी तरह सक्रिय रह सकता है, बशर्ते बैंक डिटेल्स और केवाईसी स्टेटस को अपडेट कर लिया जाए।
क्या बदलेगा और क्या जरूरी बदलाव करने होंगे?
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रेजिडेंशियल स्टेटस (KYC अपडेट): अपने PoP (पॉइंट ऑफ प्रेजेंस) या बैंक को स्टेटस ‘Resident’ से ‘Non-Resident Indian (NRI)’ में बदलने की सूचना दें।
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बैंक खाता लिंक करना: एनपीएस में योगदान केवल भारतीय बैंक खाते से ही संभव है। विदेश जाने के बाद आपको अपना सामान्य रेजिडेंट बैंक खाता बंद करके NRE (Non-Resident External) या NRO (Non-Resident Ordinary) खाता खुलवाना होगा और उसे ही NPS से लिंक करना होगा।
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टियर-2 (Tier-II) अकाउंट पर पाबंदी: एनआरआई केवल टियर-1 (Tier-I) अनिवार्य रिटायरमेंट खाते में निवेश जारी रख सकते हैं। नियमों के मुताबिक एनआरआई टियर-2 (स्वैच्छिक बचत खाता) नहीं खोल सकते; यदि पहले से खुला है, तो उसे बंद करना पड़ सकता है।
क्या नहीं बदलेगा?
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PRAN नंबर: आपका परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) वही रहेगा, नया खाता खोलने की कोई जरूरत नहीं है।
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निवेश पोर्टफोलियो व पेंशन फंड: इक्विटी (E), कॉरपोरेट डेट (C), और गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (G) का मौजूदा एलोकेशन और फंड मैनेजर वैसे ही काम करते रहेंगे।
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मैच्योरिटी व एग्जिट नियम: 60 वर्ष की आयु पर मैच्योरिटी नियम समान रहेंगे (कम से कम 40% राशि से एन्युइटी/पेंशन खरीदना और अधिकतम 60% एकमुश्त टैक्स-फ्री निकालना)। समय से पहले निकासी (प्री-मैच्योर एग्जिट) की शर्तें भी रेजिडेंट्स जैसी ही लागू होंगी।
NPS: रेजिडेंट बनाम एनआरआई (NRI) स्थिति
| नियम / सुविधा | रेजिडेंट भारतीय | विदेश शिफ्ट होने पर (NRI) |
| PRAN वैधता | सक्रिय | सक्रिय (अपरिवर्तित) |
| बैंक खाता प्रकार | सामान्य सेविंग्स अकाउंट | NRE या NRO अकाउंट अनिवार्य |
| फंड ट्रांसफर रूट | घरेलू नेट बैंकिंग / UPI | NRE (रेपैट्रिएबल) या NRO (नॉन-रेपैट्रिएबल) |
| Tier-II अकाउंट | अनुमति है | अनुमति नहीं है |
| टैक्स लाभ (Sec 80CCD) | भारतीय कर व्यवस्था के तहत उपलब्ध | केवल भारतीय कर योग्य आय पर लागू |
अगर नागरिकता बदल जाए तब क्या होगा?
यदि आप किसी अन्य देश की नागरिकता ले लेते हैं (यानी भारतीय पासपोर्ट सरेंडर कर विदेशी नागरिक या OCI बन जाते हैं), तो NPS नियमों के अनुसार आपको अकाउंट तुरंत बंद (Close) करना होगा। विदेशी नागरिकों के लिए NPS All Citizen मॉडल में निवेश जारी रखने की अनुमति नहीं है। खाता बंद होने पर उस समय के नियमों के तहत कॉर्पस वापस मिल जाता है।
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