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8th Pay Commission: 18 में से 10 महीने खत्म, 56% समय बीता; जानिए कहां तक पहुंची तैयारी और कब खाते में आएगी नई सैलरी

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) को लेकर इंतजार हर बीतते दिन के साथ और उत्सुकता भरा होता जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से केंद्र सरकार द्वारा हर वेतन आयोग को अपनी विस्तृत सिफारिशें तैयार करने और अंतिम रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपने के लिए 18 महीने का मानक समय दिया जाता रहा है। यदि सामान्य कार्यप्रणाली के 18 महीनों की समयसीमा का आकलन करें, तो लगभग 10 महीने यानी 55 से 56 प्रतिशत समय का चक्र बीत चुका है।

इसके बावजूद अभी तक आयोग के आधिकारिक चेयरमैन, सदस्यों की पूर्ण नियुक्ति और टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) की औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। इस प्रशासनिक देरी ने एक करोड़ से अधिक सेवारत केंद्रीय कर्मचारियों, रेलवे कर्मियों, रक्षा कर्मियों और पेंशनर्स की धड़कनें बढ़ा दी हैं। वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, आंतरिक स्तर पर प्रारंभिक डेटा संकलन, विभिन्न मंत्रालयों से वित्तीय प्रभाव के आकलन और नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम (JCM) के ज्ञापनों की स्क्रूटनी का काम चल रहा है, लेकिन आयोग के औपचारिक गठन का प्रस्ताव अंतिम कैबिनेट मंजूरी की दहलीज पर खड़ा है।

किसी भी केंद्रीय वेतन आयोग के लागू होने की पूरी प्रक्रिया चार प्रमुख चरणों से होकर गुजरती है:

  1. गठन और टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) की घोषणा: केंद्रीय कैबिनेट आयोग के अध्यक्ष (अक्सर सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश) और सदस्यों के नामों को मंजूरी देती है। साथ ही आयोग के कार्यक्षेत्र और शर्तों को अधिसूचित किया जाता है।

  2. हितधारकों से परामर्श और ज्ञापन: आयोग विभिन्न कर्मचारी यूनियनों, विभागों, राज्य सरकारों और अर्थशास्त्रियों से ज्ञापन आमंत्रित करता है और विस्तृत चर्चा करता है।

  3. सिफारिशों का मसौदा और रिपोर्ट सौंपना: सभी पहलुओं, मुद्रास्फीति और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ का अध्ययन कर रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाती है।

  4. कैबिनेट की अंतिम मंजूरी और गजट नोटिफिकेशन: सरकार सिफारिशों पर व्यय सचिव की अगुवाई में समीक्षा समिति बनाती है, जिसके बाद कैबिनेट संशोधन के साथ इसे लागू करती है।

सैलरी बढ़ोतरी को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी प्रभावी तारीख (Effective Date) का है। वेतन आयोगों का 10-वर्षीय पारंपरिक चक्र 1 जनवरी 2026 से शुरू होना निर्धारित है, क्योंकि 7वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2016 से प्रभावी हुआ था। भले ही आयोग की सिफारिशों को औपचारिक रूप देने और कैबिनेट की मंजूरी मिलने में 2026 का मध्य या अंतिम हिस्सा लग जाए, लेकिन संशोधित मूल वेतन और पेंशन 1 जनवरी 2026 की पूर्वव्यापी तिथि (Retrospective Effect) से ही लागू किए जाने की परंपरा रही है।

इसका सीधा अर्थ यह है कि यदि सरकार आयोग की सिफारिशों को लागू करने का गजट नोटिफिकेशन 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में भी जारी करती है, तो कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 1 जनवरी 2026 से लेकर क्रियान्वयन की तारीख तक का पूरा बकाया (Arrears) एकमुश्त एरियर के रूप में दिया जाएगा। 7वें वेतन आयोग के समय भी सिफारिशें देर से लागू हुई थीं, लेकिन एरियर का भुगतान समय पर किया गया था।

8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों के वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी का मुख्य आधार ‘फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) ही तय करेगा। 7वें वेतन आयोग में 2.57x का फिटमेंट फैक्टर दिया गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक पे 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये प्रति माह हुई थी।

विभिन्न कर्मचारी संगठन और जेसीएम के प्रतिनिधि वर्तमान में 2.86x से लेकर 3.0x तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग उठा रहे हैं, जबकि वित्त मंत्रालय के वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि 2.28x से 2.57x के बीच का फिटमेंट फैक्टर राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को संतुलित रखने के लिए सबसे व्यावहारिक रहेगा:

  • 2.28x फिटमेंट फैक्टर पर: न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 41,040 रुपये हो जाएगा।

  • 2.57x फिटमेंट फैक्टर पर: न्यूनतम मूल वेतन सीधे बढ़कर 46,260 रुपये के स्तर पर पहुंचेगा।

  • 2.86x फिटमेंट फैक्टर पर: न्यूनतम बेसिक पे उछलकर 51,480 रुपये तक पहुंच जाएगी।

मूल वेतन में संशोधन के साथ ही मकान किराया भत्ता (HRA), परिवहन भत्ता (TPTA) और बच्चों की शिक्षा भत्ते (CEA) में भी स्वतः बड़ा संशोधन दर्ज होगा। वहीं नया वेतनमान लागू होने पर महंगाई भत्ता (DA) शून्य पर रीसेट कर दिया जाएगा।

वेतन आयोग के गठन में हो रही देरी को लेकर नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) जेसीएम ने कैबिनेट सचिव और वित्त मंत्रालय को कड़े शब्दों में ज्ञापन सौंपा है। यूनियनों का तर्क है कि खुदरा महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और कोविड काल के बाद आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में आए उछाल को देखते हुए आयोग के गठन में और विलंब नहीं होना चाहिए।

यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई, तो देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी संसद सत्र के दौरान या उससे ठीक पहले सरकार 8वें वेतन आयोग के आधिकारिक ढांचे और अध्यक्ष के नाम की घोषणा कर कर्मचारियों को बड़ी राहत दे सकती है।

चरण / प्रक्रिया मानक समय सीमा वर्तमान स्थिति संभावित पूर्णता तारीख
ToR और अध्यक्ष की घोषणा प्रारंभिक चरण कैबिनेट विचार-विमर्श में लंबित आगामी कुछ सप्ताह में अपेक्षित
कर्मचारी यूनियनों से ज्ञापन 4 से 6 महीने प्रारंभिक डेटा संकलन जारी ToR के 6 महीने बाद
सिफारिशों की अंतिम रिपोर्ट 18 महीने लगभग 10 महीने का समय व्यतीत 2026 के उत्तरार्ध में
सैलरी में वृद्धि और एरियर कैबिनेट मंजूरी के बाद 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होने की प्रबल संभावना लागू होते ही एरियर सहित भुगतान