
कैंसर दुनिया भर में जानलेवा बीमारियों में दूसरे स्थान पर आता है, और इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह बीमारी का देर से पता चलना है। अधिकांश मामलों में मरीज तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं जब कैंसर तीसरे या चौथे चरण में पहुंच चुका होता है, जहां इलाज जटिल और अत्यधिक खर्चीला हो जाता है। इसी चुनौती को समाप्त करने के लिए आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान और बायोमेडिकल रिसर्च ने एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। अब जटिल बायोप्सी और दर्दनाक प्रक्रियाओं से पहले मरीज घर बैठे ही कई तरह के कैंसर की शुरुआती स्क्रीनिंग (Home-based Cancer Screening) कर सकते हैं।
वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों और अनुसंधान संस्थानों ने ऐसे सरल, गैर-आक्रामक (Non-Invasive) टेस्ट किट तैयार किए हैं, जो ठीक उसी तरह काम करते हैं जैसे प्रेग्नेंसी टेस्ट किट या कोविड-19 रैपिड एंटीजन टेस्ट काम करते हैं। इन किट्स की मदद से शरीर में मौजूद शुरुआती कैंसर कोशिकाओं, डीएनए म्यूटेशन और विशिष्ट प्रोटीन बायोमार्कर्स की पहचान घर पर एकत्र किए गए सैंपल्स से की जा सकती है। यह तकनीक विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले उन लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो अस्पताल जाने में झिझकते हैं।
घर पर कैंसर का परीक्षण करने की यह नई पद्धति शरीर के प्राकृतिक तरल पदार्थों और उत्सर्जनों पर आधारित है। इसमें किसी सुई या जटिल मशीनरी की आवश्यकता नहीं होती। वर्तमान में मुख्य रूप से चार प्रकार के नमूनों के आधार पर घर पर प्राथमिक जांच की सुविधा मिल रही है:
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लार (Saliva) और ओरल स्वैब टेस्ट: मुंह, गले और सिर-गर्दन के कैंसर के लिए मरीज को केवल अपनी लार का सैंपल एक स्टेराइल ट्यूब में देना होता है। यह टेस्ट कोशिकाओं में होने वाले जेनेटिक बदलावों और ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के डीएनए की जांच करता है।
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स्टूल-बेस्ड डीएनए टेस्ट (Stool DNA / FIT Kit): कोलोरेक्टल (आंत) के कैंसर की पहचान के लिए मल के नमूने में छिपे सूक्ष्म रक्त (Occult Blood) और ट्यूमर कोशिकाओं के डीएनए की पहचान की जाती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह दर्द रहित है और कोलोनोस्कोपी की आवश्यकता को काफी हद तक कम करती है।
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यूरिन बायोमार्कर टेस्ट: मूत्राशय (Bladder) और प्रोस्टेट कैंसर के शुरुआती संकेतों को पकड़ने के लिए यूरिन में निकलने वाले विशिष्ट प्रोटीन और आरएनए अंशों का परीक्षण किया जाता है।
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सेल्फ-सैंपलिंग वेजाइनल स्वैब: सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर की रोकथाम के लिए महिलाएं घर की निजता में स्वयं स्वैब एकत्र कर हाई-रिस्क एचपीवी स्ट्रेन की जांच कर सकती हैं।
ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर का इलाज संभव है, बशर्ते उसका समय पर पता चले। स्टेज-1 में अगर कैंसर की पहचान हो जाए, तो आधुनिक कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और लक्षित सर्जरी के जरिए मरीज के 5 साल तक जीवित रहने की दर (Survival Rate) 90 प्रतिशत से अधिक हो जाती है। वहीं स्टेज-4 पर पहुंचने के बाद यह संभावना घटकर मात्र 15 से 20 प्रतिशत रह जाती है।
घर पर की जाने वाली स्क्रीनिंग किसी भी ट्यूमर के बड़ा रूप लेने से महीनों या सालों पहले ही शरीर में हो रही सेलुलर गड़बड़ी को पकड़ लेती है। जब होम टेस्ट में परिणाम पॉजिटिव या संदिग्ध आता है, तो व्यक्ति तुरंत विशेषज्ञ ऑन्कोलॉजिस्ट से संपर्क कर विस्तृत डायग्नोस्टिक जांच (जैसे पीईटी स्कैन, एमआरआई या बायोप्सी) करवा सकता है। इससे न केवल मरीज की जान बचती है, बल्कि परिवार पर पड़ने वाले लाखों रुपयों के आर्थिक बोझ से भी राहत मिलती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, होम-बेस्ड कैंसर स्क्रीनिंग किट हर आम व्यक्ति के लिए सुलभ जरूर है, लेकिन कुछ खास श्रेणियों के लोगों को इसे अपनी नियमित स्वास्थ्य जांच का हिस्सा बनाना चाहिए:
40 वर्ष से अधिक आयु के वे सभी व्यक्ति जिनके परिवार में माता-पिता या भाई-बहन को किसी भी प्रकार का कैंसर रहा हो, उन्हें आनुवंशिक जोखिम (Genetic Predisposition) के कारण नियमित स्क्रीनिंग करानी चाहिए। इसके अतिरिक्त लंबे समय से तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी या गुटखे का सेवन करने वाले लोगों को ओरल कैंसर स्क्रीनिंग किट का इस्तेमाल हर छह महीने में करना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति को बिना किसी कारण के तेजी से वजन घटने, लगातार थकान, पुरानी खांसी, मल-मूत्र में रक्त आना, या शरीर में किसी असामान्य गांठ की समस्या महसूस हो रही हो, तो उन्हें किसी भी देरी के बिना तुरंत शुरुआती टेस्ट का सहारा लेना चाहिए।
यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि ‘स्क्रीनिंग टेस्ट’ (Screening) और ‘कन्फर्म डायग्नोसिस’ (Diagnosis) में अंतर होता है। होम-बेस्ड किट यह बताती है कि आपके शरीर में कैंसर से जुड़े बायोमार्कर मौजूद हैं या नहीं, लेकिन यह अंतिम चिकित्सीय पुष्टि नहीं होती। यदि किसी टेस्ट का परिणाम पॉजिटिव आता है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि मरीज अंतिम चरण में है; इसका अर्थ केवल यह है कि अब विस्तृत चिकित्सकीय जांच की तुरंत आवश्यकता है।
टेस्ट का नतीजा संदिग्ध आने पर घबराने के बजाय किसी मान्यता प्राप्त कैंसर अस्पताल या ऑन्कोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर अतिरिक्त ब्लड टेस्ट (जैसे CA-125, PSA, CEA) और इमेजिंग टेस्ट के जरिए स्थिति की पुष्टि करते हैं। होम-बेस्ड टेस्टिंग का सबसे बड़ा लाभ यही है कि यह अनजाने में बीमारी के फैलने के खतरे को खत्म कर देती है और मरीज को सही समय पर सही दिशा में कदम उठाने का अवसर प्रदान करती है।
| कैंसर का प्रकार | होम स्क्रीनिंग का तरीका | मुख्य बायोमार्कर | लक्षित आयु वर्ग |
| कोलोरेक्टल (आंत का कैंसर) | स्टूल डीएनए / FIT किट | छिपा हुआ रक्त व म्यूटेटेड डीएनए | 45 वर्ष और उससे अधिक |
| ओरल (मुंह व गले का कैंसर) | सलाइवा (लार) स्वैब टेस्ट | एचपीवी स्ट्रेन 16/18 व माइक्रोआरएनए | तंबाकू उपयोगकर्ता व 35+ |
| सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) | सेल्फ-वेजाइनल स्वैब | हाई-रिस्क एचपीवी डीएनए | 25 से 65 वर्ष की महिलाएं |
| प्रोस्टेट व ब्लैडर कैंसर | यूरिन बायोमार्कर टेस्ट | विशिष्ट प्रोटीन व जीन ट्रांसक्रिप्ट | 50 वर्ष और उससे अधिक |
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