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24 राज्यों में सक्रिय हुआ मानसून: बंगाल की खाड़ी के वेदर सिस्टम से बदला देश का मिजाज

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के विशाल भूभाग पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के पुनर्सक्रिय होने के बाद 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मूसलाधार वर्षा, तेज आंधी और आकाशीय बिजली (वज्रपात) का व्यापक अलर्ट जारी किया है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के उत्तरी-पश्चिमी हिस्से में बना निम्न दबाव का क्षेत्र और मध्य भारत से होकर गुजर रही मानसूनी ट्रफ लाइन इस समय अत्यधिक सक्रिय अवस्था में है। इसके साथ ही अरब सागर से आने वाली नमी युक्त पछुआ हवाओं और बंगाल की खाड़ी से उठने वाली पूर्वी हवाओं के संगम ने उत्तर भारत, पूर्वोत्तर और गंगा के मैदानी इलाकों में घने मानसूनी बादलों का एक शक्तिशाली घेरा तैयार कर दिया है।

इस मौसमी तंत्र के प्रभाव से दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों में अगले 48 से 72 घंटों के दौरान व्यापक वर्षा की गतिविधियां देखने को मिलेंगी। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि कई मैदानी और तटीय इलाकों में तेज हवाओं के झोंके 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकते हैं, जिससे कमजोर संरचनाओं, बिजली के तारों और फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी तरह मेहरबान है और राज्य के अधिकांश संभागों में बादलों की सक्रियता बनी हुई है। मौसम केंद्र लखनऊ द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर अवध और पूर्वांचल के जिलों तक भारी बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है।

विभाग ने मेरठ, मुजफ्फरनगर, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, बिजनौर, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर, उन्नाव, कानपुर, रायबरेली, इटावा, आजमगढ़, अयोध्या, देवरिया और गोरखपुर सहित 20 से अधिक जिलों में मध्यम से भारी बारिश का यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

राजधानी लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में रुक-रुक कर रिमझिम और तेज बौछारों का दौर जारी रहने से तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे उमस भरी गर्मी से लोगों को राहत मिली है। हालांकि, तराई और ग्रामीण इलाकों में जलभराव के चलते धान और तिलहन की फसलों को लेकर किसानों को जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है।

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली और इससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर)—नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में आसमान में घने बादल छाए हुए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली के प्राथमिक मौसम केंद्र सफदरजंग और पालम में दिनभर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश के कई दौर दर्ज किए जा सकते हैं। कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ एक-दो स्पेल भारी बारिश के भी होने का अनुमान है।

दिन का अधिकतम तापमान 29 से 31 डिग्री सेल्सियस के बीच सिमटने की संभावना है, जिससे मौसम खुशनुमा रहेगा। हालांकि, लगातार होने वाली बारिश के कारण दिल्ली और गुरुग्राम के निचले इलाकों, अंडरपासों और प्रमुख जंक्शनों पर जलभराव और भारी ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा हो सकती है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों को संभलकर चलने और जलमग्न सड़कों पर दोपहिया वाहन ले जाने से बचने की सलाह दी है।

पूर्वी भारत के राज्य बिहार में मौसम विभाग ने सबसे संवेदनशील स्थिति की चेतावनी जारी की है। मौसम केंद्र पटना ने राज्य के 15 से अधिक जिलों में भीषण आकाशीय बिजली (वज्रपात/ठनका) गिरने और बादलों की तीव्र गर्जना की आशंका जताई है।

विभाग के अनुसार पटना, गया, जहानाबाद, भोजपुर, समस्तीपुर, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार, भागलपुर, बेगूसराय, गोपालगंज, रोहतास, बक्सर और वैशाली जनपदों में तेज गरज के साथ मूसलाधार बारिश का अनुमान है।

बिहार में मानसून के दौरान आकाशीय बिजली गिरना जान-माल के लिए एक बड़ी आपदा साबित होता रहा है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा है और विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में मुनादी कराकर किसानों, चरवाहों और मजदूरों को खुले खेतों में जाने से रोकने के निर्देश दिए हैं। गंगा, गंडक, कोसी और बागमती नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही वर्षा के कारण जलस्तर पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है।

पड़ोसी राज्य झारखंड में भी मौसमी उथल-पुथल का दौर तेज हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र रांची ने राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का यलो अलर्ट जारी किया है।

रांची, जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम), देवघर, बोकारो, रामगढ़, खूंटी, पलामू, धनबाद, गिरिडीह, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम और लातेहार में मध्यम से भारी दर्जे की वर्षा होने की पूरी संभावना है।

लगातार हो रही वर्षा के कारण राज्य के प्रमुख डैमों—पतरातू, तेनुघाट और चांडिल डैम का जलस्तर बढ़ रहा है, जिसके चलते सिंचाई विभाग द्वारा अतिरिक्त पानी छोड़े जाने की तैयारी की जा रही है। पहाड़ी ढलानों और कच्ची बस्तियों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा गया है। बिजली विभाग ने भी तेज हवाओं के दौरान खंभों और ट्रांसफार्मरों के पास न जाने की सार्वजनिक चेतावनी जारी की है।

उत्तर और पूर्व के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी मानसूनी सिस्टम का गहरा असर दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर संभागों में तेज हवाओं और बिजली की चमक के साथ भारी बारिश का दौर बना हुआ है।

पूर्वी राजस्थान के कोटा, उदयपुर, जयपुर और भरतपुर इलाकों में मूसलाधार बारिश दर्ज की जा रही है।

वहीं पर्वतीय राज्यों—उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के चलते भूस्खलन (Landslides) और पहाड़ी मलबे के सड़कों पर आने का खतरा बढ़ गया है। उत्तराखंड के चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और नैनीताल जिलों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले चारधाम तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को मौसम साफ होने तक सुरक्षित पड़ावों पर ही रुकने के निर्देश दिए गए हैं। उधर पूर्वोत्तर के असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भी ब्रह्मपुत्र नदी के उफान के चलते निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है।

खराब मौसम और विशेषकर आकाशीय बिजली (Lightning) के बढ़ते जोखिम को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और मौसम विभाग ने नागरिकों के लिए जीवन रक्षक दिशानिर्देश जारी किए हैं:

  • पेड़ों और खंभों से दूरी: तेज बारिश या बादलों की गर्जना के समय कभी भी किसी ऊंचे पेड़, बिजली के खंभे, मोबाइल टावर या टीन शेड के नीचे आश्रय न लें। बिजली हमेशा ऊंची वस्तुओं पर सबसे पहले गिरती है।

  • खुले मैदान में न रहें: यदि आप खेत या खुले मैदान में हैं और कोई पक्का मकान आसपास नहीं है, तो जमीन पर लेटने के बजाय दोनों पैरों को आपस में सटाकर, घुटनों पर सिर रखकर उकड़ू बैठ जाएं और कानों को हाथों से ढक लें।

  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्रयोग बंद करें: घर के भीतर रहने पर टीवी, फ्रिज, कंप्यूटर आदि के प्लग दीवार के सॉकेट से निकाल दें। तार वाले लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल न करें और मोबाइल फोन को चार्जिंग पर लगाकर बात करने से बचें।

  • धातु की वस्तुओं और पानी से बचें: खेतों में काम कर रहे किसान लोहे के हल, कुदाल, ट्रैक्टर या तारबंदी से तुरंत दूर हो जाएं। तालाब, नदी या भरे हुए पानी से तत्काल बाहर निकल आएं।

  • दामिनी ऐप का उपयोग: केंद्र सरकार के ‘दामिनी’ (DAMINI) मोबाइल ऐप को डाउनलोड करें, जो आपके क्षेत्र में आकाशीय बिजली गिरने से 20 से 30 मिनट पहले अलर्ट जारी करता है, जिससे जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।