
वास्तु शास्त्र में दिशाओं और उनसे जुड़ी ऊर्जा का हमारे जीवन, स्वास्थ्य, रिश्तों और आर्थिक स्थिति पर सीधा प्रभाव माना गया है। घर की हर दिशा किसी न किसी तत्व और ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है। इनमें दक्षिण-पश्चिम दिशा यानी नैऋत्य कोण (South-West Direction) को सबसे अधिक महत्वपूर्ण और स्थिरता देने वाली दिशा माना गया है। यह दिशा ‘पृथ्वी तत्व’ (Earth Element) से जुड़ी होती है और इसका स्वामी राहु ग्रह व इसके अधिपति देव ‘निर्रति’ हैं।
यदि घर का दक्षिण-पश्चिम कोना वास्तु सम्मत हो, तो परिवार के मुखिया को समाज में मान-सम्मान, कार्यक्षेत्र में स्थिरता, मजबूत आर्थिक स्थिति और परिवार में एकजुटता मिलती है। वहीं यदि इस दिशा में वास्तु दोष हो, तो धन की बर्बादी, मानसिक तनाव, वैवाहिक कलह और बीमारियों का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं कि इस दिशा को कैसे शक्तिशाली और भाग्यशाली बनाया जाए।
वास्तु विज्ञान के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम कोना घर का सबसे स्थिर और वजनदार हिस्सा होता है। इसलिए इस दिशा में घर के मुखिया (परिवार के सबसे बड़े कमाऊ सदस्य) का मास्टर बेडरूम होना सबसे शुभ माना जाता है:
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सोने की सही दिशा: सोते समय सिर हमेशा दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। कभी भी उत्तर दिशा की ओर सिर करके न सोएं।
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बेड की स्थिति: बेड को कमरे के दक्षिण-पश्चिम कोने में इस तरह रखें कि सिरहाने के पीछे ठोस दीवार हो। बेड के ठीक सामने शीशा (Mirror) नहीं होना चाहिए, जिससे सोते समय शरीर का प्रतिबिंब दिखे।
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रंगों का चयन: बेडरूम की दीवारों पर हल्के भूरे, क्रीम, बेज या हल्के मिट्टी के रंग (Earthy Tones) का प्रयोग करें। यहां गहरे नीले या काले रंग से बचें।
यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में बरकत बनी रहे और धन संचय में कोई रुकावट न आए, तो धन रखने की अलमारी या तिजोरी को दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थापित करना सबसे उत्तम है:
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लॉकर का मुख: तिजोरी या अलमारी को दक्षिण-पश्चिम कोने में इस तरह रखें कि उसका दरवाजा उत्तर (कुबेर की दिशा) या पूर्व दिशा की ओर खुले।
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ठोस आधार: तिजोरी के नीचे का फर्श मजबूत होना चाहिए और यह किसी बीम के ठीक नीचे नहीं होनी चाहिए।
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लॉकर के अंदर क्या रखें: तिजोरी में एक लाल या पीले कपड़े पर चांदी का सिक्का, कौड़ियां या कुबेर यंत्र रखने से आर्थिक स्थिरता और समृद्धि में निरंतर वृद्धि होती है।
वास्तु शास्त्र का एक बुनियादी नियम है कि उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) जितना हल्का और खुला होना चाहिए, दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) उतना ही भारी, ऊंचा और बंद होना चाहिए:
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भारी फर्नीचर की जगह: भारी अलमारियां, लोहे की तिजोरियां, भारी शोकेस या इनडोर बड़े पौधे (जैसे भारी गमले) दक्षिण-पश्चिम हिस्से में रखने चाहिए।
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ऊंचाई का संतुलन: घर की छत या निर्माण में दक्षिण-पश्चिम का हिस्सा उत्तर और पूर्व की तुलना में थोड़ा ऊंचा होना चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा घर के भीतर संचित रहती है।
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पानी की ओवरहेड टंकी: छत पर पानी की ओवरहेड सीमेंटेड या सिंटेक्स टंकी लगाने के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा सबसे आदर्श मानी जाती है, क्योंकि यह इस हिस्से को प्राकृतिक रूप से भारी बनाती है।
नैऋत्य कोण में कुछ चीजों का होना गंभीर वास्तु दोष पैदा करता है, जिससे भारी आर्थिक और पारिवारिक नुकसान हो सकता है:
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भूमिगत पानी की टंकी या बोरवेल (Underground Water Tank): दक्षिण-पश्चिम में अंडरग्राउंड वाटर टैंक, कुआं या बोरवेल कभी न बनवाएं। यह पृथ्वी तत्व की दिशा है, यहां गड्ढा या पानी होने से भारी कर्ज और मानसिक अशांति का सामना करना पड़ता है।
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पूजा घर या मंदिर: इस दिशा में पूजा घर बनाने से बचें। पूजा घर के लिए ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सर्वोत्तम होता है।
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मुख्य द्वार (Main Gate): यदि मुख्य प्रवेश द्वार दक्षिण-पश्चिम में हो, तो इसे बड़ा वास्तु दोष माना जाता है। इससे घर में अप्रत्याशित खर्च और कलह बढ़ती है।
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शौचालय (Toilet) या सेप्टिक टैंक: यहां शौचालय या सेप्टिक टैंक होने से परिवार के मुखिया का स्वास्थ्य खराब रहता है और तरक्की के अवसर रुक जाते हैं।
यदि आपके घर के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में पहले से कोई निर्माण दोष है, तो बिना तोड़फोड़ के भी कुछ उपायों से उसकी नकारात्मक ऊर्जा को कम किया जा सकता है:
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पीले रंग का प्रयोग: इस दिशा की दीवारों पर हल्का पीला या भूरा पेंट कराएं या पीले रंग के पर्दे लगाएं।
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पृथ्वी तत्व के सिंबल: इस कोने में ब्रास (पीतल) की धातु से बनी वस्तुएं, पीतल का शेर या पहाड़-पर्वतों की सुंदर पेंटिंग लगाएं।
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राहु यंत्र या क्रिस्टल बॉल: कोने में एक लेड क्रिस्टल (Lead Crystal) या राहु पिरामिड स्थापित करने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव काफी हद तक शांत हो जाता है।
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