राहुल गांधी के ‘चाय की दुकान’ वाले दावे का बीजेपी का ग्राउंड जीरो फैक्ट चेक: कनॉट प्लेस के चायवाले ने खोली पोल

भारतीय राजनीति में इन दिनों बयानों के तीर और उनके फैक्ट चेक का दौर तेजी से चल रहा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान ने देश की राजनीतिक फिजा में गर्माहट पैदा कर दी है। राहुल गांधी ने एक सार्वजनिक मंच से दावा किया था कि देश की चाय की दुकानों और टपरियों पर भी जातिगत भेदभाव का जहर फैला हुआ है। उनके इस दावे के अनुसार, दलित समुदाय के लोगों को चाय पीने के लिए अलग से प्लास्टिक या डिस्पोजेबल कप दिए जाते हैं, जबकि अन्य लोगों को कांच के गिलास या कप में चाय परोसी जाती है। इस सनसनीखेज बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर संसद तक एक तीखी बहस छिड़ गई कि क्या वाकई आम भारतीय समाज की रोजमर्रा की जिंदगी और चाय की टपरियों पर इस तरह का भेदभाव होता है। इस आरोप के बाद राजनीतिक गलियारों में जुबानी जंग तेज हो गई और यह सवाल उठने लगा कि क्या राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए समाज में दूरियां बढ़ाने वाले ऐसे बयान दिए जा रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कनॉट प्लेस पहुंचकर किया ‘ग्राउंड जीरो’ फैक्ट चेक

राहुल गांधी के इस दावे की सच्चाई को परखने के लिए और देश के सामने जमीनी हकीकत लाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी खुद मैदान में उतर आए। बिना समय गंवाए प्रदीप भंडारी सीधे नई दिल्ली के पॉश और व्यस्त इलाके कनॉट प्लेस पहुंचे, जहां उन्होंने एक आम चाय की टपरी पर जाकर असलियत की थाह ली। इस पूरी प्रक्रिया का एक वीडियो बनाकर उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर शेयर किया, जो देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गया। वीडियो की शुरुआत में प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी के उस मूल बयान की क्लिप को भी जोड़ा जिसमें उन्होंने जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया था। इसके बाद उन्होंने सीधे उस चाय विक्रेता से बातचीत की जिसकी दुकान पर आम लोग रोजाना चाय पीने आते हैं। इस ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग ने राहुल गांधी के उस दावे की हवा निकाल दी जिसमें समाज को जातियों के आधार पर बांटने की बात कही जा रही थी।

चाय विक्रेता मोनू गौतम ने राहुल गांधी के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया

कनॉट प्लेस में जिस चाय की दुकान पर भाजपा प्रवक्ता पहुंचे, उसे ‘मोनू गौतम’ नाम का एक शख्स चलाता है। सबसे दिलचस्प और गौर करने वाली बात यह है कि चाय विक्रेता मोनू गौतम खुद अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। प्रदीप भंडारी ने मोनू गौतम से बहुत ही सीधे और स्पष्ट सवाल किए, जिनका दुकानदार ने बेबाकी से जवाब दिया। जब भंडारी ने पूछा कि क्या वह अपनी दुकान पर आने वाले ग्राहकों की जाति देखकर उन्हें कप या गिलास देते हैं, तो मोनू गौतम ने साफ शब्दों में इससे इनकार करते हुए कहा, “नहीं, नहीं, बिल्कुल नहीं।” इसके अलावा जब चाय की कीमतों और वहां आने वाले ग्राहकों के बारे में पूछा गया, तो दुकानदार ने बताया कि उनकी दुकान पर 20, 25, 30 और 40 रुपये तक की चाय बिकती है और देश के हर समाज, वर्ग और पेशे का व्यक्ति बिना किसी भेदभाद के यहां आकर चाय की चुस्कियां लेता है।

समझिए क्या है चाय की दुकानों पर इस्तेमाल होने वाले कपों की असलियत?

वीडियो के दौरान जब दुकानों पर रखे कपों और गिलासों की असलियत टटोली गई, तो यह स्पष्ट हो गया कि अलग-अलग तरह के कप होने के पीछे कोई जातिगत भेदभाव नहीं है। काउंटर पर बड़ी संख्या में डिस्पोजेबल और रीयूज्ड (कांच या स्टील के) कप रखे हुए थे। दुकानदार और ग्राहकों की बातचीत से यह बात सामने आई कि कप का चुनाव पूरी तरह से ग्राहक की व्यक्तिगत पसंद, सुविधा, स्वच्छता के लिहाज से उसकी जरूरत और चाय की वैरायटी पर निर्भर करता है। कई लोग हाइजीन के कारण डिस्पोजेबल गिलास मांगते हैं, तो कुछ लोग कांच के कप में चाय पीना पसंद करते हैं। इसका जाति या धर्म से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। इस प्रकार की व्यवस्था देश की हर छोटी-बड़ी टपरी पर सामान्य रूप से देखने को मिलती है, जहां दुकानदार का एकमात्र उद्देश्य ग्राहक को उसकी पसंद की चाय परोसना होता है, न कि उसकी सामाजिक या जातीय पृष्ठभूमि की जांच करना।

प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी को बताया ‘लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा’, देश को न बांटने की सलाह

फैक्ट चेक के इस वीडियो के अंत में भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी के इस बयान को कड़ा राजनीतिक प्रहार करते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने वीडियो के ऊपर अंग्रेजी में ‘LOP – Leader of Propaganda’ लिखकर राहुल गांधी के नेतृत्व पर बड़ा सवालिया निशान लगाया। भंडारी ने कड़े शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने कभी जीवन में सड़क किनारे की किसी चाय की टपरी पर खड़े होकर चाय नहीं पी है, वे जमीनी हकीकत से पूरी तरह अनजान हैं। ऐसे नेता बिना किसी ठोस आधार के केवल सनसनी फैलाने और राजनीतिक लाभ के लिए समाज में झूठीnarrative गढ़ने का काम कर रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता ने राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि उन्हेंन सिर्फ इस तरह के भ्रामक बयान देना बंद करना चाहिए, बल्कि देश की जनता को जातियों के नाम पर बांटने की अपनी इस राजनीति से बाज आना चाहिए। यह पूरा वाकया एक बार फिर यह साबित करता है कि राजनीतिक फायदे के लिए धरातल की वास्तविकताओं को कैसे तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है, जिसका पर्दाफाश अब जागरूक नागरिक और जमीनी हकीकत खुद कर रही है।