
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की दुनिया में कई बार रन और शतकों से ज्यादा खिलाड़ियों का आपसी व्यवहार, उनका अनुशासन और कठिन समय में टीम के प्रति उनका समर्पण मायने रखता है। भारतीय क्रिकेट टीम के शानदार और विस्फोटक बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव ने हाल ही में विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है जिसने खेल प्रेमियों और क्रिकेट विशेषज्ञों का दिल जीत लिया है। आधुनिक क्रिकेट के व्यस्त और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी माहौल में जहां हर खिलाड़ी अपनी जगह पक्की करने के लिए संघर्ष कर रहा है और प्लेइंग इलेवन से बाहर होने पर निराशा या नाराजगी आम बात है, वहीं संजू सैमसन ने जिस परिपक्वता और सकारात्मकता का परिचय दिया है, उसने कप्तान और टीम प्रबंधन को अंदर तक प्रभावित किया है। सूर्यकुमार यादव द्वारा साझा किया गया यह संस्मरण इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारतीय ड्रेसिंग रूम के भीतर खिलाड़ियों के बीच आपसी सम्मान, भाईचारा और देश व टीम के प्रति निष्ठा सर्वोच्च प्राथमिकता पर है।
जब प्लेइंग इलेवन से बाहर होने के बावजूद संजू सैमसन ने नहीं दिखाई कोई नाराजगी
क्रिकेट के खेल में टीम का संयोजन (Team Combination), मैदान की परिस्थितियां और विरोधी टीम की रणनीति यह तय करती है कि किस मैच में किस खिलाड़ी को मैदान पर उतारा जाएगा। कई बार शानदार फॉर्म में होने के बावजूद बेहतरीन खिलाड़ियों को भी रणनीतिक कारणों से बेंच पर बैठना पड़ता है। संजू सैमसन के साथ भी कई मौकों पर ऐसा हुआ है जब उन्हें टीम का हिस्सा होने के बावजूद प्लेइंग इलेवन से बाहर बैठना पड़ा। आम तौर पर ऐसी परिस्थितियों में खिलाड़ियों का निराश होना या टीम मैनेजमेंट से अनबन होना एक स्वाभाविक मानवीय प्रतिक्रिया मानी जाती है, लेकिन संजू सैमसन का रवैया पूरी तरह से अलग और अनुकरणीय रहा है। सूर्यकुमार यादव ने एक इंटरव्यू के दौरान उस वाकये को याद किया जब संजू को टीम से बाहर रखा गया था, लेकिन इसके बाद भी उनके चेहरे पर शिकन तक नहीं थी और न ही उनके बर्ताव में किसी प्रकार की कड़वाहट या हताशा देखने को मिली।
सूर्यकुमार यादव ने की तारीफ, कहा- ‘मुझे जब भी जरूरत होगी, वे तैयार मिलेंगे’
संजू सैमसन के इस पेशेवर और बड़े दिल वाले रवैये से गहराई से प्रभावित होकर सूर्यकुमार यादव ने उनके समर्पण को याद करते हुए एक बेहद भावुक और प्रेरक बयान दिया है। सूर्या ने बताया कि जब उन्होंने संजू से बात की और उन्हें टीम की वर्तमान रणनीतिक मजबूरियों के बारे में बताया, तो संजू का जवाब बेहद सकारात्मक था। संजू ने कप्तान से कहा कि भले ही उन्हें आज प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिल रही है, लेकिन वह अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ेंगे और नेट्स में ऐसे पसीना बहाएंगे जैसे कि वह आज ही मैच खेलने जा रहे हैं। संजू ने यह भी स्पष्ट किया कि टीम को जब भी, जहां भी और जैसी भी जरूरत होगी, वह पूरी तरह से उपलब्ध मिलेंगे और साथी खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाएंगे। इस वाकये को याद करते हुए सूर्यकुमार यादव ने कहा कि ऐसे क्षणों में जब कोई खिलाड़ी बिना किसी स्वार्थ के केवल टीम के हित के बारे में सोचता है, तो कप्तान का आत्मविश्वास खुद-ब-खुद बहुत बढ़ जाता है। इसी संदर्भ में सूर्या ने हैरानी और प्रशंसा जताते हुए कहा था कि ‘ऐसे भी लोग होते हैं लाइफ में’, जो अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को ताक पर रखकर हमेशा टीम को सबसे पहले रखते हैं।
ड्रेसिंग रूम की एकता और संजू सैमसन का क्रिकेट जगत में बढ़ता कद
सूर्यकुमार यादव के इस खुलासे से यह साफ तौर पर जाहिर होता है कि संजू सैमसन ने केवल अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के दम पर ही नहीं, बल्कि अपने शानदार व्यक्तित्व और मिलनसार स्वभाव के कारण भी भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में एक खास और सम्मानित जगह बना ली है। एक खिलाड़ी के तौर पर यह बात बेहद महत्वपूर्ण होती है कि जब समय आपके अनुकूल न हो, तब भी आपका आचरण यह तय करे कि आप टीम के लिए कितने मूल्यवान हैं। टी20 क्रिकेट जैसे तेज फॉर्मेट में चयनकर्ताओं और टीम मैनेजमेंट को लगातार कड़े फैसले लेने पड़ते हैं, और कई बार डिजर्विंग खिलाड़ियों को भी बाहर बैठना पड़ जाता है। ऐसे में संजू सैमसन का यह दृष्टिकोण युवा खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी सीख है कि कैसे एक टीम मैन बनकर कठिन परिस्थितियों का सामना किया जाता है। कप्तान और वरिष्ठ खिलाड़ियों द्वारा इस तरह खुले तौर पर प्रशंसा किया जाना यह बताता है कि आने वाले समय में भी भारतीय क्रिकेट योजनाओं में संजू का महत्व कितना अधिक रहने वाला है।
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