
भारत में बच्चों के पोषण और शारीरिक विकास के नाम पर बेचे जाने वाले पॉपुलर ड्रिंक ‘बोर्नविटा’ (Bournvita) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा भ्रामक विज्ञापनों और पैकेजिंग लेबल्स पर सख्त रुख अपनाए जाने के बाद, बोर्नविटा की निर्माता कंपनी ‘मॉन्डलेज इंडिया’ (Mondelez India) ने अपने प्रॉडक्ट से जुड़े कई बड़े हेल्थ क्लेम और पोषक तुलनात्मक दावों (Nutrient-comparison claims) को वापस ले लिया है। इसके साथ ही कंपनी ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन रिटेल माध्यमों से संबंधित भ्रामक विज्ञापनों को भी पूरी तरह हटा दिया है।
FSSAI ने हाल ही में देश के प्रमुख फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) की गहन जांच की थी, जिसमें पाया गया कि कई कंपनियां अपने उत्पादों को लेकर ऐसे दावे कर रही हैं जो वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह प्रमाणित नहीं हैं या उपभोक्ताओं को गलत धारणा में डालते हैं। बोर्नविटा के विज्ञापनों और पैकेजिंग पर पोषक तत्वों की तुलना और बच्चों की इम्युनिटी व मानसिक-शारीरिक विकास से जुड़े दावे किए जा रहे थे। नियामक संस्था ने इसे खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम का उल्लंघन माना और कंपनी को नोटिस जारी किया। नोटिस के बाद कंपनी ने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाते हुए इन दावों और विज्ञापनों को वापस लेने का फैसला किया।
यह पहली बार नहीं है जब बोर्नविटा की पोषण गुणवत्ता पर सवाल उठे हों। इससे पहले सोशल मीडिया और स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा बोर्नविटा में मौजूद उच्च चीनी (Added Sugar) के स्तर को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई थी। बाल रोग विशेषज्ञों और न्यूट्रिशनिस्ट्स ने चिंता जताई थी कि बच्चों को हेल्दी ड्रिंक के नाम पर अत्यधिक चीनी पिलाई जा रही है, जिससे बचपन में मोटापा (Childhood Obesity), दांतों की सड़न और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और FSSAI ने भी पहले सभी ई-कॉमर्स कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे बोर्नविटा और अन्य पेय पदार्थों को ‘हेल्थ ड्रिंक’ या ‘एनर्जी ड्रिंक’ की श्रेणी से हटाएं, क्योंकि भारतीय खाद्य कानूनों के तहत ‘हेल्थ ड्रिंक’ की कोई आधिकारिक परिभाषा नहीं है।
बोर्नविटा पर हुई यह कार्रवाई FSSAI के एक बड़े राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा है। खाद्य नियामक ने भ्रामक मार्केटिंग, गलत लेबिलिंग और ‘100% शुद्ध’ जैसे अतिशयोक्तिपूर्ण दावों को लेकर 150 से अधिक प्रमुख खाद्य कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं। इनमें पेप्सिको, कोका-कोला, एबॉट, रेड बुल, डैनोन और एमवे जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। नियामक ने साफ कर दिया है कि किसी भी उत्पाद पर ऐसा कोई दावा नहीं लिखा जा सकता जो उपभोक्ता को धोखे में रखे या भ्रामक स्वास्थ्य लाभ का वादा करे।
पीडियाट्रिशियन और पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता को पैकेज्ड पेय पदार्थों पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय उनके पोषण लेबल (Nutrition Fact Label) को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
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एडेड शुगर की जांच करें: उत्पाद में प्रति 100 ग्राम कितनी रिफाइंड शुगर या माल्टोडेक्सट्रिन है, इसकी मात्रा जरूर देखें।
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प्राकृतिक पोषण को प्राथमिकता दें: बच्चों के शारीरिक विकास के लिए सादा गुनगुना दूध, घर का बना बादाम पाउडर, भुने चने, मौसमी फल, हरी सब्जियां, उबले अंडे और दालें सबसे सुरक्षित और बेहतरीन स्रोत हैं।
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विज्ञापनों की अतिशयोक्ति से बचें: किसी भी पैकेज्ड पाउडर से बच्चों की लंबाई या याददाश्त रातों-रात नहीं बढ़ती, इसके लिए संतुलित आहार और नियमित खेलकूद आवश्यक है।
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