
महाराष्ट्र की संस्कृति और परंपराओं की जब भी बात होती है, तो गणेशोत्सव का नाम सबसे पहले आता है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक पूरे 10 दिनों तक चलने वाले इस महापर्व पर पूरा राज्य गणपति बप्पा के जयकारों, पारंपरिक वेशभूषा, सुगंधित मोदक और रोंगटे खड़े कर देने वाले ‘ढोल-ताशा’ (Dhol-Tasha Pathak) की गूंज से सराबोर रहता है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा शुरू किए गए इस सार्वजनिक गणेशोत्सव का जो असली रंग, भव्यता और भक्ति महाराष्ट्र की धरती पर देखने को मिलती है, वह दुनिया में कहीं और नहीं दिखती।
अगर आप इस गणेश चतुर्थी पर बप्पा की अलौकिक भक्ति और महाराष्ट्र के पारंपरिक उत्सव के जीवंत रूप के साक्षी बनना चाहते हैं, तो राज्य के इन 6 प्रमुख शहरों की यात्रा जरूर करें:
पुणे को गणेशोत्सव की सांस्कृतिक राजधानी कहा जाता है। यहां का अनुशासन, पारंपरिक रीति-रिवाज और युवाओं के ढोल-ताशा पथक पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। पुणे में सदियों पुराने ‘मानाचे 5 गणपति’ का दर्शन सबसे पवित्र माना जाता है:
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श्री कस्बा गणपति (पहला मान): पुणे के ग्रामदेवता और सबसे पूजनीय गणपति।
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तांबड़ी जोगेश्वरी (दूसरा मान): पारंपरिक चांदी की पालकी में निकलने वाले बप्पा।
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गुरुजी तालीम (तीसरा मान): हिंदू-मुस्लिम एकता का ऐतिहासिक प्रतीक मंडल।
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तुलसीबाग गणपति (चौथा मान): विशालकाय कांच और आभूषणों से सुसज्जित प्राचीन प्रतिमा।
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केसरी वाड़ा गणपति (पांचवां मान): लोकमान्य तिलक द्वारा स्थापित ऐतिहासिक मंडल।
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श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति: पुणे का सबसे भव्य और धनी पंडाल, जहां बप्पा को करोड़ों के सोने के आभूषणों और अलौकिक मंदिर रूपी थीम से सजाया जाता है।
सपनों का शहर मुंबई गणेशोत्सव के दौरान आस्था के महासागर में तब्दील हो जाता है। यहां के पंडालों की भव्यता, मशहूर हस्तियों का जमावड़ा और लाखों श्रद्धालुओं का हुजूम देखते ही बनता है:
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लालबागचा राजा (Lalbaugcha Raja): मन्नत पूरी करने वाले बप्पा के नाम से विख्यात, जहां दर्शन के लिए 24 से 30 घंटे तक लंबी कतारें लगती हैं।
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जीएसबी सेवा मंडल (GSB Seva Mandal Kings Circle): भारत का सबसे अमीर पंडाल, जहां बप्पा की प्रतिमा को 60 से 70 किलो से अधिक शुद्ध सोने और 300 किलो चांदी से मढ़ा जाता है।
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गिरगांव चौपाटी विसर्जन: अनंत चतुर्दशी के दिन गिरगांव चौपाटी और जुहू बीच पर रातभर चलने वाला विसर्जन जुलूस, गुलाल की बौछार और ढोल-ताशा की थाप एक अविस्मरणीय अनुभव होता है।
तीर्थनगरी नासिक में गणेशोत्सव पारंपरिक पेशवाई वैभव और भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है।
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गोदावरी नदी के घाट: रामकुंड और गोदावरी नदी के तटों पर शाम के समय होने वाली विशेष गणेश महाआरती का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है।
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प्राचीन मंडल: नासिक के पुराने शहर के ‘नासिकचा राजा’ और ‘पेशवे गणेशोत्सव’ में पारंपरिक वाद्य यंत्रों, लेजिम और ढोल-ताशा की अनूठी धुनें सुनने को मिलती हैं।
दक्षिण काशी कहे जाने वाले कोल्हापुर में गणेशोत्सव का रंग बेहद अनूठा होता है।
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जीवंत झांकियां (Live Tableaus): कोल्हापुर के गणेश मंडल छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास, मराठा साम्राज्य के शौर्य और सामाजिक संदेशों पर आधारित चलती-फिरती लाइव झांकियों के निर्माण के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं।
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पारंपरिक जुलूस: मिरज और कोल्हापुर की संकरी गलियों में पारंपरिक फेंटा (पगड़ी) बांधे युवा जब ढोल-ताशा बजाते हैं, तो पूरा वातावरण ऊर्जा से भर उठता है।
विदर्भ क्षेत्र की राजधानी नागपुर में गणेश चतुर्थी का त्योहार अद्वितीय उत्साह के साथ मनाया जाता है।
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श्री टेकड़ी गणपति मंदिर: रेलवे स्टेशन के पास एक छोटी पहाड़ी पर स्थित यह स्वयंभू प्राचीन गणेश मंदिर विदर्भ के सबसे पवित्र आस्था केंद्रों में से एक है, जहां उत्सव के दौरान लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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नागपुरचा राजा (रेशिमबाग) व अन्य मंडल: मध्य भारत के सबसे बड़े पंडालों में शामिल रेशिमबाग और इतवारी के पंडाल अपनी विशाल मूर्तियों और भव्य थीम के लिए जाने जाते हैं।
ऐतिहासिक धरोहरों के शहर छत्रपति संभाजीनगर में गणेशोत्सव मराठवाड़ा की अनूठी लोक-कलाओं का संगम प्रस्तुत करता है।
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संस्थान गणपति: शहर के सबसे प्राचीन संस्थान गणपति मंदिर में सैकड़ों वर्षों की परंपरा के अनुसार वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।
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क्रांति चौक और गुलमंडी: उत्सव के दिनों में क्रांति चौक और गुलमंडी के इलाके रंग-बिरंगी रोशनी, लोक-नृत्य और ढोल-ताशा मंडलियों के शक्ति प्रदर्शन से जगमगा उठते हैं।
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