
सड़क हादसों के पीछे अक्सर तेज रफ्तार और लापरवाही के अलावा एक सबसे बड़ा और अनदेखा कारण होता है ड्राइवर की थकान (Fatigue) और चलती गाड़ी में झपकी (Microsleep) आ जाना। हाईवे और एक्सप्रेसवे पर लंबी दूरी तय करते समय कुछ सेकंड के लिए भी आंख बंद होना जानलेवा साबित हो सकता है। इसी जोखिम को जड़ से खत्म करने के लिए आधुनिक ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने कारों को इतना स्मार्ट और सेंसिटिव बना दिया है कि अब गाड़ी खुद ड्राइवर के शरीर की हर हरकत, चेहरे के हाव-भाव और स्टीयरिंग व्हील पर उसकी पकड़ की लाइव निगरानी करती है।
इस जीवनरक्षक तकनीक को ऑटोमोटिव जगत में ड्राइवर अटेंशन वार्निंग (DAW), ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम (DMS) या ड्राउजिनेस डिटेक्शन सिस्टम (DDS) कहा जाता है। यह सिस्टम ड्राइवर की सतर्कता में जरा भी कमी आते ही तुरंत कई स्तरों पर अलार्म बजाकर उसे अलर्ट कर देता है।
आधुनिक प्रीमियम और मास-मार्केट कारों के स्टीयरिंग कॉलम, डैशबोर्ड या रियर-व्यू मिरर के पीछे एक हाई-डेफिनिशन इंफ्रारेड (IR) ड्राइवर-फेसिंग कैमरा लगा होता है। यह कैमरा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कंप्यूटर विजन एल्गोरिदम के साथ मिलकर काम करता है।
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आई-ब्लिंक रेट (पलक झपकने की दर): सिस्टम लगातार यह मापता है कि ड्राइवर सामान्य गति से पलकें झपका रहा है या उसकी आंखें सामान्य से ज्यादा समय (1 से 2 सेकंड) के लिए बंद हो रही हैं।
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गेज ट्रैकिंग (नजर का भटकाव): यदि ड्राइवर सामने सड़क पर ध्यान देने के बजाय लगातार मोबाइल स्क्रीन की तरफ देख रहा है या साइड में ज्यादा देर तक घूर रहा है, तो कैमरा उसकी पुतलियों की दिशा से डिस्ट्रैक्शन को पहचान लेता है।
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हेड-ड्रॉप (सिर का झुकना): झपकी आते ही जब ड्राइवर की गर्दन आगे या साइड की तरफ झुकती है, तो 3D फेशियल मैपिंग तकनीक तुरंत इस असामान्य पोस्चर को डिटेक्ट कर लेती है।
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अंधेरे और चश्मे में भी काम: चूंकि यह इंफ्रारेड नाइट-विजन तकनीक पर काम करता है, इसलिए यह अंधेरी रात में या ड्राइवर द्वारा सनग्लासेस (धूप का चश्मा) लगाने पर भी सटीक निगरानी करने में सक्षम होता है।
कार केवल चेहरे को ही नहीं देखती, बल्कि स्टीयरिंग व्हील के माध्यम से ड्राइवर के ड्राइविंग बिहेवियर का भी निरंतर विश्लेषण करती है:
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अचानक और जर्की स्टीयरिंग इनपुट: जब कोई ड्राइवर थका हुआ होता है, तो वह स्मूथ टर्न लेने के बजाय गाड़ी को अचानक झटके से सीधा करने की कोशिश करता है। स्टीयरिंग एंगल सेंसर प्रति सेकंड सैकड़ों डेटा पॉइंट्स रिकॉर्ड करता है और यदि स्टीयरिंग पैटर्न अनियमित पाया जाता है, तो यह थकान का संकेत माना जाता है।
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हैंड्स-ऑफ डिटेक्शन (HOD): स्टीयरिंग व्हील के अंदर कैपेसिटिव टच सेंसर्स (Capacitive Sensors) लगे होते हैं। यदि ड्राइवर ने स्टीयरिंग से दोनों हाथ हटा लिए हैं या सिर्फ एक उंगली से लापरवाही से पकड़ा हुआ है, तो सिस्टम 5 से 10 सेकंड के भीतर तुरंत हाथ स्टीयरिंग पर वापस रखने का अलर्ट देता है।
कार की विंडशील्ड पर लगा फ्रंट-फेसिंग कैमरा लगातार सड़क की सफेद और पीली ‘लेन मार्किंग्स’ (Lane Markings) को ट्रैक करता है।
यदि कार बिना इंडिकेटर दिए बार-बार अपनी लेन से बाहर भटक रही है या गाड़ी जिग-जैग (Z-पैटर्न) तरीके से चल रही है, तो ईसीयू (Electronic Control Unit) तुरंत भांप लेता है कि ड्राइवर का नियंत्रण कमजोर हो रहा है। इसके साथ ही वाहन के चलने का समय (ड्राइविंग ड्यूरेशन) भी ट्रैक किया जाता है; आमतौर पर 2 घंटे से अधिक लगातार ड्राइविंग होने पर सिस्टम स्वतः ही ब्रेक लेने का सुझाव प्रदर्शित करने लगता है।
जैसे ही सिस्टम ड्राइवर की थकान या भटकाव को पहचानता है, कार तीन अलग-अलग तरीकों से तत्काल चेतावनी जारी करती है:
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विजुअल अलर्ट (Visual Warning): डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और हेड-अप डिस्प्ले (HUD) पर एक चमकता हुआ ‘कॉफी कप’ (Coffee Cup Icon) का सिंबल दिखाई देता है और स्क्रीन पर मैसेज आता है—“Take a Break!” या “Driver Attention Warning: Please Rest”।
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ऑडियो बीप्स (Acoustic Chime): केबिन में एक तीखा और बार-बार बजने वाला अलार्म बजना शुरू हो जाता है, जो झपकी आने की स्थिति में ड्राइवर को तुरंत जगा देता है।
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हैप्टिक फीडबैक (Haptic Vibration): स्टीयरिंग व्हील और ड्राइवर सीट में तेज वाइब्रेशन (कंपन) शुरू हो जाता है। साथ ही सीटबेल्ट को मोटर के जरिए हल्का सा कस दिया जाता है (Pre-tensioner Tug), जिससे ड्राइवर शारीरिक रूप से पूरी तरह सतर्क हो जाए।
यदि दृश्य, ध्वनि और वाइब्रेशन की चेतावनियों के बावजूद ड्राइवर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता (जैसे अचानक बेहोश होने या हार्ट अटैक आने की स्थिति में), तो आधुनिक ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) से लैस कारें आपातकालीन सुरक्षा मोड में चली जाती हैं:
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लेन कीप असिस्ट (LKA): कार को स्वतः ही लेन के बीच में बनाए रखती है।
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हैजार्ड लाइट्स ऑन: गाड़ी के चारों इंडिकेटर अपने आप जल जाते हैं ताकि पीछे और अगल-बगल आ रहे अन्य वाहनों को खतरे की सूचना मिल सके।
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ऑटोनॉमस इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) और सेफ स्टॉप: कार अपनी गति को धीरे-धीरे कम करते हुए सुरक्षित तरीके से सड़क के किनारे रुक जाती है, पार्किंग ब्रेक लगा देती है और आपातकालीन कॉल (e-Call) के जरिए नजदीकी इमरजेंसी सेवाओं व परिजनों को लोकेशन के साथ एसओएस (SOS) अलर्ट भेज देती है।
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