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ITR समय पर भरने के बाद भी नहीं आया टैक्स रिफंड? तुरंत चेक करें ये 5 जरूरी चीजें, पता चल जाएगा कहां और क्यों अटका है आपका पैसा

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) अंतिम तिथि से पहले दाखिल करने के बाद लाखों करदाता अपने रिफंड का बेसब्री से इंतजार करते हैं। कई बार रिटर्न प्रोसेस होने का मैसेज आने के बावजूद बैंक खाते में रिफंड की राशि क्रेडिट नहीं होती या रिटर्न की प्रोसेसिंग अधर में लटकी रहती है। आयकर विभाग के अनुसार, रिफंड जारी होने में देरी केवल विभागीय कारणों से नहीं, बल्कि करदाता की प्रोफाइल या डेटा में छोटी-मोटी विसंगतियों के कारण भी होती है। अगर आपका भी टैक्स रिफंड अभी तक नहीं आया है, तो आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर इन 5 महत्वपूर्ण चीजों की तुरंत जांच करें:

कई करदाता ITR सबमिट करने के बाद यह मान लेते हैं कि उनकी प्रक्रिया पूरी हो गई है, जबकि रिटर्न को ई-वेरिफाई करना अनिवार्य होता है।

नियमों के अनुसार, ITR फाइल करने के 30 दिनों के भीतर आधार ओटीपी (Aadhaar OTP), नेट बैंकिंग या ईवीसी (EVC) के जरिए रिटर्न को ई-वेरिफाई करना जरूरी है। जब तक रिटर्न वेरिफाई नहीं होता, सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) उसकी जांच और प्रोसेसिंग शुरू ही नहीं करता। अगर तय समय में वेरिफिकेशन नहीं हुआ, तो रिटर्न अमान्य (Invalid) माना जाता है। पोर्टल पर ‘View Filed Returns’ में जाकर सुनिश्चित करें कि स्टेटस ‘Successfully e-Verified’ दिख रहा है या नहीं।

रिफंड अटकने का सबसे आम कारण बैंक खाते से जुड़ी गलतियां हैं। आयकर विभाग केवल उसी बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप से (ECS/NEFT) रिफंड भेजता है जो पोर्टल पर पूरी तरह प्री-वैलिडेटेड और एक्टिव हो।

पोर्टल के ‘Profile’ सेक्शन में जाकर ‘My Bank Account’ चेक करें और देखें कि:

  • बैंक खाता प्री-वैलिडेटेड (Validated) है या नहीं।

  • क्या खाते पर ‘Nominated for Refund’ का टॉगल एक्टिव है।

  • बैंक खाते में आपका नाम और पैन कार्ड पर दर्ज नाम में कोई वर्तनी (Spelling) का अंतर तो नहीं है।

  • खाता एक्टिव है और इनएक्टिव/क्लोज्ड नहीं हुआ है।

    अगर खाता रिजेक्टेड दिखता है, तो सही IFSC और खाता नंबर के साथ उसे दोबारा वैलिडेट करें और ‘Refund Reissue Request’ सबमिट करें।

यदि आपके द्वारा ITR में क्लेम किए गए टीडीएस (TDS) या आमदनी का आंकड़ा विभाग के पास मौजूद एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS), टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) या फॉर्म 26AS से मेल नहीं खाता, तो सिस्टम ऑटोमैटिक रिफंड को रोक देता है।

यह तब होता है जब नियोक्ता (Employer), बैंक या ब्रोकर ने अपनी ओर से टीडीएस रिटर्न देर से फाइल किया हो या गलत पैन पर टीडीएस क्रेडिट चढ़ा दिया हो। ऐसी स्थिति में विभाग मिसमैच का समाधान होने तक रिफंड रिलीज नहीं करता। अगर आपने कोई आय (जैसे बचत खाते का ब्याज, डिविडेंड या कैपिटल गेन) छोड़ी है, तो आपको रिवाइज्ड रिटर्न (Revised Return) फाइल करना पड़ सकता है।

आयकर अधिनियम की धारा 245 के तहत, आयकर विभाग को यह अधिकार है कि यदि आपके नाम पर किसी पिछले वित्तीय वर्ष का कोई बकाया टैक्स बकाया (Outstanding Demand) है, तो वह चालू वर्ष के रिफंड से उस राशि को आंशिक या पूर्ण रूप से एडजस्ट कर सकता है।

पोर्टल पर ‘Pending Actions’ के तहत ‘Response to Outstanding Demand’ टैब में जाकर जांचें कि क्या कोई पुराना नोटिस लंबित है। यदि विभाग ने समायोजन (Adjustment) का नोटिस भेजा है और आपने सहमति नहीं दी है या रिस्पॉन्स पेंडिंग है, तो रिफंड का भुगतान रुका रहेगा।

आयकर विभाग यदि रिटर्न में कोई तकनीकी या गणना संबंधी त्रुटि पाता है, तो वह धारा 139(9) के तहत ‘डिफेक्टिव रिटर्न’ का नोटिस या धारा 143(1)(a) के तहत एडजस्टमेंट सूचना भेजता है।

अपने रजिस्टर्ड ईमेल, स्पैम फोल्डर और ई-फाइलिंग पोर्टल के ‘e-File > Pending Actions > e-Proceedings’ टैब को चेक करें। अगर विभाग ने किसी छूट (Deduction) या दस्तावेज पर स्पष्टीकरण मांगा है और आपने निर्धारित अवधि में उसका जवाब नहीं दिया, तो रिटर्न की प्रोसेसिंग और रिफंड पूरी तरह रुक जाता है।

करदाता NSDL-TIN (Protean) के रिफंड ट्रैकर पोर्टल या आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपना पैन और असेसमेंट ईयर डालकर रिफंड का रियल-टाइम स्टेटस देख सकते हैं।

आयकर अधिनियम की धारा 244A के तहत, यदि रिफंड में देरी करदाता की गलती के बिना विभागीय कारणों से होती है, तो विभाग पात्र रिफंड राशि पर 0.5% प्रति माह (6% वार्षिक) की दर से ब्याज का भुगतान भी करता है। यदि आपकी सभी 5 चीजें सही हैं और फिर भी रिफंड लंबे समय से लंबित है, तो आप ई-फाइलिंग पोर्टल के ‘e-Nivaran’ / Grievance टैब में जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।