HDFC Bank पर अमेरिका में क्लास-एक्शन मुकदमा दर्ज होते ही भारतीय शेयर बाजार में भारी हड़कंप, 52-हफ्ते के निचले स्तर पर फिसला शेयर; एक झटके में उड़े 25,000 करोड़

भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े दिग्गज और बैंकिंग सेक्टर के हैवीवेट HDFC Bank की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका (US) की एक अदालत में बैंक और उसके शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ सिक्योरिटीज फ्रॉड का क्लास-एक्शन मुकदमा दर्ज होने की खबर से गुरुवार को घरेलू बाजार में बैंक के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखी गई। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर भारी बिकवाली के चलते HDFC Bank का शेयर टूटकर 710 रुपये के अपने 52-सप्ताह (एक साल) के नए निचले स्तर पर पहुंच गया।

इस भारी गिरावट के कारण अकेले एक ही कारोबारी सत्र में बैंक के मार्केट कैपिटलाइजेशन (एम-कैप) से करीब 25,000 करोड़ रुपये का सफाया हो गया, जिसके चलते बैंक का कुल बाजार मूल्यांकन 11 लाख करोड़ रुपये के स्तर से नीचे फिसल गया।

अमेरिका के न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की जिला अदालत (U.S. District Court for the Southern District of New York) में एक अमेरिकी निवेशक ज्वलंत नटवरलाल सोनेजी द्वारा यह क्लास-एक्शन लॉसूट दायर किया गया है। इस कानूनी शिकायत में बैंक के साथ-साथ उसके प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) शशिधर जगदीशन और मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) श्रीनिवासन वैद्यनाथन को भी सीधे तौर पर पक्षकार बनाया गया है।

यह मुकदमा 17 जुलाई 2023 से 26 मई 2026 के बीच HDFC Bank के अमेरिकी डिपॉजिटरी शेयर्स (ADS) खरीदने वाले सभी वैश्विक निवेशकों की ओर से लाया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बैंक प्रबंधन ने निवेशकों और अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के समक्ष भ्रामक बयान दिए और अहम वित्तीय व विनियामक जोखिमों को छुपाया। याचिकाकर्ता ने मामले की जूरी ट्रायल कराने और निवेशकों को हुए भारी वित्तीय नुकसान के हर्जाने की मांग की है।

अमेरिकी मुकदमे की जड़ में महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) से जुड़ा एक पुराना मामला है। आरोपों के अनुसार, बैंक ने MSRDC के बड़े डिपॉजिट्स को आकर्षित करने के लिए मानक 3.5 प्रतिशत बचत दर के मुकाबले 6.01 प्रतिशत का अत्यधिक ब्याज दर देने का वादा किया था।

बैंकिंग नियमों के तहत किसी एक संस्थागत ग्राहक को तय सीमा से अधिक ब्याज देने पर पाबंदी होने के कारण, कथित रूप से 45 करोड़ रुपये की अतिरिक्त ब्याज राशि को तीसरे पक्ष के वेंडरों के जरिए सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियानों के मार्केटिंग खर्च के रूप में दिखाया गया।

इस साल मई में इस आंतरिक जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद बैंक के अमेरिकी शेयर्स में भारी गिरावट आई थी। हालांकि HDFC Bank के निदेशक मंडल ने जुलाई में एक विशेष अनुशासनात्मक समिति की जांच के आधार पर इसे किसी दुर्भावना या व्यक्तिगत लाभ के बजाय ‘कारोबारी अति-उत्साह’ (Business Overreach) माना था और शीर्ष अधिकारियों पर सांकेतिक जुर्माना लगाया था।

अमेरिकी मुकदमे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए HDFC Bank ने कहा कि यह मुकदमा पूरी तरह से आधारहीन और मेरिट-विहीन है। बैंक के प्रवक्ता के अनुसार, अमेरिका में जब भी किसी लिस्टेड कंपनी के शेयर मूल्य में गिरावट आती है, तो इस तरह के शेयरधारक मुकदमे दर्ज होना बेहद आम बात है और कई वैश्विक कंपनियां नियमित रूप से ऐसे मामलों का कानूनी बचाव करती हैं।

बैंक ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी अदालत में अपनी वित्तीय सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता का मजबूती से बचाव करेगा। बैंक के जानकारों का कहना है कि इस मुकदमे से बैंक के दैनिक वित्तीय संचालन और कोर रेवेन्यू पर कोई सीधा भौतिक प्रभाव पड़ने की संभावना बेहद सीमित है।

HDFC Bank के शेयरों पर पिछले कुछ महीनों से कई तरफा दबाव बना हुआ है। इसी साल मार्च में बैंक के अंशकालिक चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अप्रत्याशित रूप से इस्तीफा दे दिया था, जिसमें उन्होंने बैंक के कुछ तौर-तरीकों को अपने व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुकूल नहीं बताया था। उनके इस्तीफे के बाद भी बैंक के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई थी।

इसके अतिरिक्त, बैंक के दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) ऑपरेशंस के जरिए कार्लाइल के लाइफ सेटलमेंट फंड में निवेश करने वाले 75 से अधिक एनआरआई निवेशकों ने भी मिस-सेलिंग और रिडेम्पशन रुकने के आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और विदेशी नियामकों से गुहार लगाई है। इन लगातार विवादों के कारण संस्थागत निवेशकों के सेंटिमेंट पर नकारात्मक असर पड़ा है।

टेक्निकल एनालिस्ट्स के मुताबिक, HDFC Bank का शेयर अपने अहम वीकली सपोर्ट जोन 725-720 रुपये के नीचे फिसल चुका है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 30 के स्तर के करीब पहुंच रहा है, जो बियर्स (बिकवाली) के मजबूत दबाव का संकेत दे रहा है। तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि यदि शेयर में रिकवरी नहीं आती है, तो अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट 685-680 रुपये के दायरे में हो सकता है।

दूसरी ओर, वैश्विक और घरेलू ब्रोकरेज हाउस जैसे गोल्डमैन सैक्स, नोमुरा और मोतीलाल ओसवाल ने आकर्षक वैल्यूएशन को देखते हुए शेयर पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। विश्लेषकों का मानना है कि कानूनी स्पष्टता और आगामी तिमाहियों में मार्जिन सुधार के बाद ही स्टॉक में टिकाऊ तेजी देखने को मिलेगी।