10 साल के बच्चे की आवाज में जब स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने गाया था यह गीत, 55 सालों से बना हुआ है रक्षाबंधन का सबसे बड़ा ‘एंथम’

रक्षाबंधन का पावन पर्व केवल भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक ही नहीं है, बल्कि यह जीवनभर एक-दूसरे की रक्षा करने के पवित्र वचन का भी उत्सव है। बिना संगीत और मेल-मिलाप के किसी भी त्योहार की रौनक अधूरी सी लगती है। इस खास मौके पर आज हम आपको उस अमर गीत के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे विशेष रूप से राखी के त्योहार के लिए नहीं बनाया गया था, लेकिन पिछले 55 वर्षों से यह हर भाई-बहन की जुबान पर रक्षाबंधन का सबसे बड़ा ‘एंथम’ बनकर गूंज रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गीत को स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने महज 10 साल के एक बच्चे की आवाज में गाया था।

रक्षाबंधन के लिए नहीं बना था देवानंद की फिल्म का यह सदाबहार गाना

हर साल रक्षाबंधन के अवसर पर हर घर में देवानंद और जीनत अमान पर फिल्माया गया यह प्रतिष्ठित गीत—’फूलों का तारों का सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है’—पूरी शिद्दत के साथ गुनगुनाया जाता है। साल 1971 में रिलीज हुई कल्ट क्लासिक फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ का यह गाना आज राखी का पर्याय बन चुका है, लेकिन इसके पीछे एक दिलचस्प इतिहास है। जाने-माने संगीतकार राहुल देव बर्मन यानी पंचम दा ने एक इंटरव्यू में खुद इस बात का खुलासा किया था कि उन्होंने इस गाने की रचना करते समय किसी त्योहार या रक्षाबंधन को ध्यान में नहीं रखा था। इस गीत को फिल्म की कहानी और उस विशेष परिस्थिति के अनुसार ढाला गया था, जहां एक बिछड़ा हुआ भाई अपनी छोटी बहन को बचपन की यादें ताजा कराने के लिए पेड़ के पीछे छुपकर यह धुन गुनगुनाता है। हालांकि, वक्त के साथ यह मेलोडी भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का सबसे बड़ा प्रतीक बन गई।

लता मंगेशकर ने 10 साल के बच्चे की आवाज में ऐसे किया था कमाल

फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ के इस बेहद लोकप्रिय गीत के दो अलग-अलग वर्जन तैयार किए गए थे, जिसमें एक मेल और दूसरा फीमेल (या बाल स्वर) शामिल था। फिल्म में बड़े होने पर देवानंद के किरदार के लिए इस गाने को दिग्गज गायक किशोर कुमार ने अपनी आवाज दी थी, वहीं बचपन के हिस्से में 10 साल के बच्चे की भूमिका निभा रहे बाल कलाकार मास्टर सत्यजीत के लिए यह गाना स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने गाया था। लता दीदी ने एक 10 साल के छोटे बच्चे की भाव-भंगिमा और उसकी आवाज की टोन को इस खूबी के साथ पकड़ा था कि उनकी गायकी देखकर खुद संगीतकार आरडी बर्मन भी पूरी तरह हैरान रह गए थे। आज भी जब यह गाना रेडियो, टेलीविजन या सोशल मीडिया पर बजता है, तो हर उम्र के लोगों के दिलों में एक अलग ही पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं।