
इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले अजीबोगरीब ‘वेट लॉस ट्रेंड्स’ किस तरह इंसान की जिंदगी को मौत के मुहाने पर धकेल सकते हैं, इसका एक बेहद रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। चीन में रहने वाली एक युवती ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के दावों से प्रेरित होकर तेजी से वजन घटाने के लिए एक खतरनाक कदम उठाया। उसने लगातार 15 दिनों तक अन्न का एक दाना तक नहीं खाया और केवल पानी पीकर जिंदा रही। इस एक्सट्रीम वॉटर फास्टिंग से उसका वजन तो 20 किलो कम हो गया, लेकिन इसके बदले में उसने अपने शरीर और दिमाग का संतुलन पूरी तरह गंवा दिया। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि युवती का सेंट्रल नर्वस सिस्टम डैमेज हो गया और वह सामान्य इंसानों की तरह चलने के बजाय पेंगुइन की तरह लड़खड़ाकर चलने लगी।
वजन घटाने की सनक: 15 दिनों तक सिर्फ पानी पर रही निर्भर
रिपोर्ट्स के अनुसार, युवती अपने बढ़े हुए वजन और शारीरिक बनावट को लेकर लंबे समय से तनाव में थी। किसी सामाजिक कार्यक्रम और व्यक्तिगत वजहों से वह बहुत कम समय में भारी वजन घटाना चाहती थी। बिना किसी डॉक्टर या सर्टिफाइड डायटीशियन की सलाह लिए उसने ‘वॉटर फास्टिंग’ (Water Fasting) का सबसे घातक रूप अपना लिया। 15 दिनों तक उसने फल, सब्जियां, प्रोटीन या कोई भी ठोस व तरल पोषक आहार नहीं लिया। केवल दिनभर में कई लीटर सादा पानी पीकर अपनी भूख मिटाती रही। शुरुआती दिनों में वजन तेजी से गिरा, जिससे उत्साहित होकर उसने कमजोरी और चक्कर आने जैसे प्राथमिक चेतावनी संकेतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
शरीर में मची खलबली: दिमाग पर हुआ जानलेवा न्यूरोलॉजिकल अटैक
लगातार दो सप्ताह तक भोजन न मिलने के कारण युवती के शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों, खासकर विटामिन बी1 (थायमिन), सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम का स्तर शून्य के करीब पहुंच गया। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को ‘एक्यूट थायमिन डेफिशिएंसी’ कहा जाता है। थायमिन मानव मस्तिष्क के न्यूरोलॉजिकल सिग्नल्स और मांसपेशियों के संचालन के लिए सबसे महत्वपूर्ण विटामिन माना जाता है। इसकी अनुपस्थिति के कारण युवती के सेरिबैलम (दिमाग का वह हिस्सा जो शरीर का संतुलन और मांसपेशियों की गति नियंत्रित करता है) में गंभीर सूजन और न्यूरोनल डैमेज हो गया। इसे चिकित्सा जगत में ‘वर्निक एन्सेफैलोपैथी’ (Wernicke’s Encephalopathy) कहा जाता है।
‘पेंगुइन’ जैसी चाल और याददाश्त का नुकसान: डॉक्टरों के उड़े होश
15वें दिन जब युवती बिस्तर से उठने लगी, तो उसके पैरों ने पूरी तरह काम करना बंद कर दिया। उसके पैर सुन्न पड़ गए, आंखों के सामने धुंधलापन छा गया और वह बिना सहारे के सीधी खड़ी नहीं हो पा रही थी। जब परिजनों ने उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग में भर्ती कराया, तो डॉक्टरों ने देखा कि वह संतुलन खो चुकी थी और दोनों पैरों को चौड़ा करके पेंगुइन की तरह डगमगाते हुए चल रही थी, जिसे मेडिकल टर्म में ‘एटाक्सिया’ (Ataxia) कहा जाता है। इसके अलावा उसकी याददाश्त कमजोर हो गई थी, वह सामान्य सवालों के जवाब देने में असमर्थ थी और उसकी बोलने की क्षमता भी लड़खड़ा रही थी। एमआरआई और ब्लड रिपोर्ट्स देखकर डॉक्टरों की टीम सन्न रह गई।
क्रैश डाइट और वॉटर फास्टिंग क्यों हैं सीधे मौत को बुलावा?
न्यूरोलॉजिस्ट्स और पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति भोजन पूरी तरह बंद कर देता है, तो शरीर पहले लिवर और मांसपेशियों में जमा ग्लाइकोजन को बर्न करता है, जिससे भारी मात्रा में पानी घटता है। इसे लोग फैट लॉस समझ लेते हैं, जबकि वास्तव में यह मांसपेशियों (Muscle Mass) और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स का नुकसान होता है।
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मेटाबॉलिक शटडाउन: लंबे उपवास से मेटाबॉलिज्म पूरी तरह धीमा हो जाता है और शरीर ‘स्टार्वेशन मोड’ में चला जाता है।
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इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन: सोडियम और पोटेशियम की अचानक कमी से कार्डियक अरेस्ट और किडनी फेलियर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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रिफीडिंग सिंड्रोम का जोखिम: लंबे उपवास के बाद अचानक खाना खाने पर शरीर में फॉस्फेट का स्तर गिर सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
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स्थायी ब्रेन डैमेज: नसों को नुकसान पहुंचने पर कई बार मरीज जीवनभर के लिए लकवे या मानसिक विकार का शिकार हो सकता है।
अस्पताल में सघन इलाज और डॉक्टरों की सख्त चेतावनी
अस्पताल में भर्ती युवती को तुरंत इंट्रावेनस (IV) ड्रिप के माध्यम से हाई-डोज थायमिन, मल्टीविटामिन्स और इलेक्ट्रोलाइट्स दिए गए। न्यूरोलॉजिस्ट्स का कहना है कि हालांकि दवाओं के जरिए उसके दिमाग की सूजन को कम करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन नर्वस सिस्टम को हुए नुकसान को पूरी तरह ठीक होने में महीनों या सालों लग सकते हैं। कुछ मामलों में यह डैमेज जीवनभर के लिए स्थायी रह जाता है। डॉक्टरों ने साफ किया है कि इंटरनेट पर वायरल होने वाले ‘जीरो कैलोरी डाइट’ या ’10 दिन में 15 किलो घटाने’ जैसे भ्रामक विज्ञापनों और वीडियोज पर कभी आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।
वजन घटाने का सही, सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीका क्या है?
फिटनेस और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक स्वस्थ वजन घटाना एक धीमी और सतत प्रक्रिया है। शरीर को नुकसान पहुंचाए बिना वजन कम करने के लिए इन बुनियादी नियमों का पालन करना चाहिए:
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कैलोरी डेफिसिट का सही अनुपात: रोजाना की जरूरत से सिर्फ 300 से 500 कैलोरी कम करें, भोजन पूरी तरह बंद न करें।
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संतुलित पोषण: डाइट में पर्याप्त प्रोटीन, हरी पत्तेदार सब्जियां, हेल्दी फैट्स और फाइबर को अनिवार्य रूप से शामिल करें।
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नियमित शारीरिक गतिविधि: केवल भूखे रहने के बजाय रोजाना 45 मिनट कार्डियो, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या पैदल चलने की आदत बनाएं।
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विशेषज्ञ की देखरेख: किसी भी प्रकार का डाइट प्लान शुरू करने से पहले योग्य डायटीशियन और चिकित्सक से अपनी मेडिकल हिस्ट्री की जांच अवश्य कराएं।
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