फुटपाथ पर कब होगी आम जनता के चलने की सुरक्षित व्यवस्था? सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से मांगा कड़ा जवाब

देशभर की सड़कों पर पैदल चलने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को साफ शब्दों में कहा कि फुटपाथ नागरिकों की जिंदगी का एक अहम और अनिवार्य हिस्सा हैं। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर पैदल चलने वालों के लिए अतिक्रमण-मुक्त और सुरक्षित फुटपाथ बनाने के पुराने निर्देशों के पालन पर विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट की इस सख्ती से अब स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकारों पर दबाव काफी बढ़ गया है।

फुटपाथ पर चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केंद्र की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) केएम नटराज से चर्चा करते हुए कहा कि सबसे पहला और जरूरी कदम पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित जगह को सही ढंग से चिह्नित करना है, ताकि हर नागरिक को सड़क पर चलते वक्त सुरक्षा का पूरा भरोसा मिल सके। अदालत ने अपने पिछले ऐतिहासिक फैसलों को दोहराते हुए कहा कि तय फुटपाथ पर चलने का अधिकार किसी भी नागरिक का मौलिक अधिकार है। संविधान के आर्टिकल 19(1)(d) के तहत मिलने वाले ‘आवाजाही के अधिकार’ और आर्टिकल 21 यानी ‘जीवन के अधिकार’ के तहत इसे मोटर गाड़ियों की आवाजाही पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह पूरा मामला एक दुखद सड़क दुर्घटना में मुआवजे से जुड़ा है, जिसमें एक पिता ने स्कूल जाते समय अपने पांच साल के मासूम बेटे को खो दिया था।

सड़क परिवहन मंत्रालयों की एडवाइजरी और राज्यों की जवाबदेही

केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि चूंकि सड़कें और परिवहन राज्य का विषय हैं, इसलिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने शीर्ष अदालत के निर्देशों का कड़ाई से पालन करते हुए सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को पहले ही दिशा-निर्देश और एडवाइजरी जारी कर दी है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इन्हीं एडवाइजरी के अनुपालन पर सभी राज्यों से रिपोर्ट तलब की है, जिससे यह साफ हो सके कि जमीनी स्तर पर पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त बनाने की दिशा में क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।