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Paytm Unused IPO Funds: 5 साल बाद भी नहीं खर्च हुआ Paytm का IPO फंड; ₹1,686 करोड़ के इस्तेमाल और 2029 तक समय बढ़ाने पर कंपनी ने मांगी शेयरधारकों से मंजूरी

डिजिटल पेमेंट और फिनटेक दिग्गज पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (One97 Communications Ltd) द्वारा साल 2021 में लाए गए देश के सबसे बड़े आईपीओ के फंड का एक बड़ा हिस्सा करीब पांच साल बीत जाने के बाद भी खर्च नहीं हो सका है। कंपनी के पास आईपीओ से जुटाए गए पैसों में से ₹1,686 करोड़ की अनयूज्ड राशि शेष बची है। अब कंपनी ने आगामी 26वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) के लिए जारी नोटिस में शेयरधारकों से इस फंड के इस्तेमाल के दायरे को व्यापक बनाने और इसकी समयसीमा को मार्च 2029 तक बढ़ाने के लिए विशेष प्रस्ताव (Special Resolution) पर मंजूरी मांगी है।

₹2,000 करोड़ में से सिर्फ ₹314 करोड़ हुए खर्च

पेटीएम ने नवंबर 2021 में जब अपना मेगा आईपीओ पेश किया था, तब उसे कुल ₹8,119.4 करोड़ का शुद्ध फंड प्राप्त हुआ था। इस राशि में से ₹2,000 करोड़ की रकम विशेष रूप से ‘नई व्यावसायिक पहलों, अधिग्रहणों (Acquisitions) और रणनीतिक साझेदारियों’ के लिए निर्धारित की गई थी।

कंपनी की आधिकारिक फाइलिंग के अनुसार, जुलाई तक इस मद से केवल ₹314 करोड़ का ही उपयोग किया जा सका है, जबकि ₹1,686 करोड़ की राशि अभी भी बिना इस्तेमाल के कंपनी के पास सुरक्षित रखी हुई है। कुल आईपीओ फंड में से अब तक ₹6,433.4 करोड़ का इस्तेमाल किया जा चुका है।

कोर बिजनेस और प्रॉफिटेबिलिटी पर फोकस बना फंड न खर्च होने की वजह

कंपनी का कहना है कि आईपीओ के बाद उसने अंधाधुंध अधिग्रहण करने या भारी नकदी जलाने के बजाय अपने मुख्य कारोबार (Core Business) को मजबूत करने, ग्राहकों और मर्चेंट्स को जोड़ने तथा लेंडिंग, इंश्योरेंस व वेल्थ मैनेजमेंट में टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया।

ऑर्गेनिक तरीके से किए गए इन निवेशों के दम पर कंपनी ने अपने वित्तीय प्रदर्शन में मजबूती हासिल की। इसी परिचालन अनुशासन (Operational Discipline) और सधे हुए दृष्टिकोण के चलते फंड की एक बड़ी रकम बची रह गई।

कंपनी ने क्या मांगी है ढील? जानिए नया प्रस्ताव

पेटीएम अब शेयरधारकों से मंजूरी चाहती है कि बचे हुए ₹1,686 करोड़ को केवल बाहरी अधिग्रहणों तक सीमित रखने के बजाय कोर बिजनेस की प्राथमिकताओं में भी लचीलेपन के साथ तैनात किया जा सके:

  • फ्लेक्सिबल फंड एलोकेशन: कंपनी बिना अलग-अलग तय सीमाओं के इस बची हुई रकम को पेमेंट टेक्नोलॉजी, मर्चेंट नेटवर्क विस्तार, वित्तीय सेवाओं और रणनीतिक अवसरों में आवश्यकतानुसार लगा सकेगी।

  • दो साल का अतिरिक्त समय: कंपनी ने फंड खर्च करने की तय समयसीमा को दो साल और बढ़ाकर 31 मार्च 2029 तक करने का अनुरोध किया है, ताकि बाजार के अनुकूल अवसरों पर शेयरधारकों के मूल्य (Shareholder Value) को अधिकतम किया जा सके।

  • कोई नया उद्देश्य नहीं: कंपनी ने स्पष्ट किया है कि आईपीओ प्रोस्पेक्टस में बताए गए मूल उद्देश्यों से हटकर कोई नया उद्देश्य नहीं जोड़ा जा रहा है, बल्कि मौजूदा प्राथमिकताओं के बीच पूंजी के बेहतर इस्तेमाल की छूट मांगी जा रही है।

15 सितंबर को एजीएम में वोटिंग करेंगे शेयरधारक

इस प्रस्ताव को पारित करने के लिए कंपनी को 15 सितंबर को आयोजित होने वाली वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों से विशेष बहुमत (Special Resolution) की आवश्यकता होगी।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी अनयूज्ड नकदी का होना कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति और पूंजी प्रबंधन में अनुशासन को दर्शाता है। यदि शेयरधारकों से यह मंजूरी मिल जाती है, तो पेटीएम को अपने लेंडिंग और पेमेंट इकोसिस्टम को आक्रामक रूप से बढ़ाने के लिए बाजार से नया कर्ज या इक्विटी जुटाए बिना आंतरिक संसाधनों से ही भरपूर लिक्विडिटी मिल जाएगी।