
कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु समेत राज्य भर के लाखों फ्लैट खरीदारों और अपार्टमेंट निवासियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य विधानसभा में ‘कर्नाटक अपार्टमेंट स्वामित्व विधेयक’ (Karnataka Apartment Ownership Bill) पेश किया गया है। इस नए विधेयक का मुख्य उद्देश्य हाउसिंग सोसायटियों में सालों से चले आ रहे विवादों, बिल्डरों की मनमानी, अवैध डुप्लिकेट रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWAs) के टकराव और मेंटेनेंस शुल्क से जुड़े झगड़ों का स्थायी समाधान करना है।
‘एक परिसर, एक एसोसिएशन’: खत्म होगा गुटबाजी का खेल
नए कानून के तहत अब किसी भी अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स या आवासीय लेआउट में केवल एक ही आधिकारिक रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को कानूनी मान्यता मिलेगी।
अक्सर देखा जाता था कि एक ही बड़ी सोसाइटी के अलग-अलग टावरों या गुटों द्वारा कई अलग-अलग सोसायटियां पंजीकृत करा ली जाती थीं, जिससे मेंटेनेंस फंड के प्रबंधन और साझा सुविधाओं (क्लब हाउस, पार्क, सुरक्षा) के संचालन में भारी विवाद और कानूनी मुकदमेबाजी होती थी। नए नियम लागू होने के बाद सभी फ्लैट मालिकों को अनिवार्य रूप से एक ही केंद्रीय पंजीकृत एसोसिएशन के तहत आना होगा।
विवाद निपटाने के लिए बनेगा नया सक्षम प्राधिकारी और अपीलीय ट्रिब्यूनल
सोसायटियों के भीतर होने वाले विवादों को अदालतों में सालों तक खिंचने से रोकने के लिए विधेयक में एक त्रिस्तरीय विवाद निवारण तंत्र (Dispute Redressal Mechanism) का प्रावधान किया गया है:
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सक्षम प्राधिकारी (Competent Authority): प्रत्येक जिले या नगर निगम क्षेत्र में एक प्रशासनिक अधिकारी को सक्षम प्राधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जो निवासियों और RWA के बीच के विवादों की प्राथमिक सुनवाई करेगा।
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अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal): यदि कोई पक्ष सक्षम प्राधिकारी के आदेश से असंतुष्ट होता है, तो वह निर्धारित समय सीमा के भीतर अपीलीय अधिकरण में अपील दायर कर सकेगा।
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त्वरित निपटारा: मेंटेनेंस बकाए की वसूली, कॉमन एरिया पर अवैध कब्जे और चुनाव में धांधली जैसे मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाएगा।
बिल्डरों की मनमानी पर लगाम: कॉमन एरिया और जमीन का ट्रांसफर अनिवार्य
यह नया विधेयक बिल्डरों द्वारा प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद भी कॉमन एरिया या अविभाजित भूमि शेयर (UDS) को अपने पास रोके रखने की प्रथा पर भी सख्त रोक लगाता है।
प्रोजेक्ट को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) मिलने और निर्धारित संख्या में फ्लैटों की रजिस्ट्री हो जाने के बाद प्रमोटर (बिल्डर) के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह कॉमन एरिया, ओपन स्पेस और इंफ्रास्ट्रक्चर का मालिकाना हक औपचारिक रूप से पंजीकृत RWA को ट्रांसफर करे। इसके अलावा, मेंटेनेंस के नाम पर जमा किए गए सिंकिंग फंड (Sinking Fund) का पूरा हिसाब-किताब भी नई एसोसिएशन को सौंपना होगा।
फ्लैट खरीदारों को क्या होगा सीधा फायदा?
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पारदर्शी चुनाव और ऑडिट: RWA के चुनाव नियमित और पारदर्शी तरीके से होंगे और सालाना वित्तीय ऑडिट की रिपोर्ट सभी सदस्यों के लिए सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा।
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प्रॉपर्टी की सुरक्षित ओनरशिप: प्रत्येक अपार्टमेंट ओनर को अपने फ्लैट और कॉमन एरिया में उसके हिस्से का स्पष्ट कानूनी विलेख (Deed of Apartment) मिलेगा।
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समय और पैसे की बचत: छोटे-मोटे झगड़ों के लिए दीवानी अदालतों (Civil Courts) के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।
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