
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को शेयर बाजार में महारत्न गैस ट्रांसमिशन कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड (GAIL India Ltd) के शेयरों में जोरदार हलचल देखने को मिल सकती है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ने देश भर में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) के परिवहन और सुरक्षित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए करीब 1,800 किलोमीटर लंबी तीन प्रमुख एलपीजी पाइपलाइन परियोजनाओं को हरी झंडी दी है। लगभग ₹7,000 करोड़ (70 बिलियन रुपये) के अनुमानित पूंजीगत व्यय वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को विकसित करने की आधिकारिक जिम्मेदारी पीएसयू दिग्गज गेल को सौंपी गई है।
किन 6 राज्यों से होकर गुजरेगा नया 1,800 किमी का नेटवर्क?
नियामक बोर्ड द्वारा मंजूर किया गया यह समर्पित एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क देश के छह प्रमुख राज्यों—तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा—में फैला होगा। इस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को तीन अलग-अलग रणनीतिक खंडों (Sections) में विभाजित किया गया है:
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चेरलापल्ली (तेलंगाना) से नागपुर (महाराष्ट्र): इस खंड की कुल लंबाई 556 किलोमीटर होगी, जो दक्षिण और मध्य भारत के बीच एलपीजी की थोक आपूर्ति को तेज करेगा।
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झांसी (उत्तर प्रदेश) से सितारगंज (उत्तराखंड): यह 611 किलोमीटर लंबा रूट उत्तर भारत के मैदानी और तराई क्षेत्रों में रिफाइनरियों से बॉटलिंग प्लांट्स तक सीधी गैस कनेक्टिविटी स्थापित करेगा।
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शिकरपुर (महाराष्ट्र) से गोवा और हुबली (कर्नाटक): इस 633 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए पश्चिमी तट और दक्षिणी कर्नाटक के औद्योगिक व घरेलू बाजारों को सीधे जोड़ा जाएगा।
सड़क टैंकरों से मुक्ति और लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कटौती
भारत अपनी कुल एलपीजी मांग का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसकी लैंडिंग मुख्य रूप से तटीय बंदरगाहों पर होती है। वर्तमान में बंदरगाहों और रिफाइनरियों से एलपीजी को देश के भीतरी हिस्सों में मौजूद बॉटलिंग प्लांट्स तक पहुंचाने के लिए मुख्य रूप से भारी सड़क टैंकरों (Tank Trucks) का इस्तेमाल किया जाता है।
सड़क मार्ग से होने वाले गैस परिवहन में दुर्घटनाओं के जोखिम, ट्रैफिक जाम और भारी कार्बन उत्सर्जन को देखते हुए पीएनजीआरबी (PNGRB) ने प्राथमिक परिवहन को पूरी तरह पाइपलाइन आधारित बनाने की पहल की है। पाइपलाइन से थोक ढुलाई शुरू होने पर तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की लॉजिस्टिक्स लागत में भारी बचत होगी और सुरक्षित ‘लाइन-पैक स्टोरेज’ के जरिए आपात स्थिति में भी गैस की निर्बाध आपूर्ति बनी रहेगी।
देश का कॉमन-कैरियर LPG नेटवर्क 9,500 KM के पार पहुंचेगा
इस नई परियोजना के पूरा होने के बाद भारत में अधिकृत कॉमन-कैरियर एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क की कुल लंबाई मौजूदा 7,700 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 9,500 किलोमीटर हो जाएगी। ओपन-एक्सेस ‘कॉमन-कैरियर’ मॉडल के तहत आईओसी (IOCL), बीपीसीएल (BPCL) और एचपीसीएल (HPCL) जैसी अन्य तेल कंपनियां भी गेल के इस बुनियादी ढांचे का उपयोग निर्धारित टैरिफ पर कर सकेंगी। इससे गेल को आगामी कई दशकों तक स्थिर ट्रांसमिशन टैरिफ और मजबूत नकदी प्रवाह (Cash Flow) हासिल होगा।
सोमवार को GAIL के स्टॉक पर क्यों रहेगी निवेशकों की नजर?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, ₹7,000 करोड़ का यह नया इंफ्रास्ट्रक्चर आवंटन गेल की दीर्घकालिक ट्रांसमिशन आय (Transmission Revenue) और ऑर्डर विजिबिलिटी को बड़ा सहारा देगा। गैस ट्रांसमिशन सेगमेंट में पहले से ही 70% से अधिक बाजार हिस्सेदारी रखने वाली इस महारत्न कंपनी के लिए यह विस्तार उसके कोर बिजनेस की री-रेटिंग का बड़ा ट्रिगर साबित हो सकता है।
हालिया तिमाहियों में मजबूत वित्तीय नतीजों और आकर्षक डिविडेंड यील्ड के बाद नए प्रोजेक्ट की मंजूरी से संस्थागत निवेशकों (FIIs/DIIs) की खरीदारी में तेजी आने की उम्मीद है।
(डिस्क्लेमर: यह समाचार केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे किसी शेयर में निवेश की सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है, निवेश से पूर्व प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।)
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