
साल 2023 में देशभर में भारी राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी बहस छेड़ने वाली फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ (The Kerala Story) से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी कार्यवाही समाप्त कर दी है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन जजों की पीठ ने फिल्म के प्रमाणन (CBFC Certification) को रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा करते हुए कहा कि फिल्म के सिनेमाघरों और ओटीटी पर रिलीज हो जाने के बाद अब ये याचिकाएं निष्प्रभावी (Infructuous) हो चुकी हैं। हालांकि, अदालत ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा फिल्मों को दिए जाने वाले सर्टिफिकेट को चुनौती देने से जुड़े व्यापक कानूनी सवाल को भविष्य के लिए खुला रखा है।
क्या था ‘द केरला स्टोरी’ को लेकर मुख्य विवाद?
सुदीप्तो सेन के निर्देशन और विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित फिल्म ‘द केरला स्टोरी’ मई 2023 में रिलीज हुई थी। फिल्म के शुरुआती टीजर और प्रचार में दावा किया गया था कि केरल की लगभग 32,000 गैर-मुस्लिम युवतियों का धोखे और ब्रेनवॉश के जरिए धर्म परिवर्तन कराकर उन्हें आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) में शामिल होने के लिए सीरिया और अफगानिस्तान भेजा गया।
इस आंकड़े को लेकर केरल की राजनीतिक पार्टियों, मुस्लिम संगठनों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध जताया और इसे एकतरफा प्रोपेगैंडा तथा हेट स्पीच करार दिया। बाद में निर्माताओं ने कोर्ट में सहमति देते हुए आंकड़े को संशोधित किया और स्पष्ट किया कि फिल्म तीन विशिष्ट महिलाओं की कहानियों पर आधारित है।
याचिकाकर्ताओं की दलील: ‘ओटीटी पर जारी है फिल्म, तय हों नफरती भाषण के नियम’
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं (कुर्बान अली और बी. आर. अरविंदकशन) की ओर से पेश वकील निजाम पाशा ने दलील दी कि फिल्म के रिलीज हो जाने के बावजूद कानूनी मुद्दे अभी भी जीवित हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म अभी भी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद है।
वकील ने अदालत से मांग की कि कथित तौर पर नफरत फैलाने वाली और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली फिल्मों के प्रमाणन को लेकर सुप्रीम कोर्ट को सख्त दिशानिर्देश (Guidelines) तय करने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा सिनेमैटोग्राफ कानून के तहत किसी फिल्म के सीबीएफसी सर्टिफिकेट के खिलाफ तीसरे पक्ष (पीड़ित नागरिकों) के पास अदालत में रिट याचिका दायर करने के अलावा कोई वैधानिक उपाय उपलब्ध नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की दो टूक टिप्पणी: ‘अगली फिल्म का इंतजार करना होगा’
पीठ ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सुनते हुए कहा कि यह फिल्म काफी पहले रिलीज हो चुकी है और इसके संबंध में अब किसी विशिष्ट आदेश की आवश्यकता नहीं है। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने हल्की टिप्पणी करते हुए कहा, “इस मुकदमे को किसी अन्य फिल्म का इंतजार करना होगा… जब कोई अन्य विवादित फिल्म आएगी, तब हम इस कानूनी सवाल की गहराई में जाएंगे।”
वहीं, चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता से कहा कि यदि वे फिल्मों में हेट स्पीच को रोकने के लिए सामान्य दिशानिर्देश चाहते हैं, तो इसके लिए अलग से एक व्यापक रिट याचिका दायर कर सकते हैं। इसके साथ ही पीठ ने सीबीएफसी प्रमाणन की न्यायिक समीक्षा से जुड़े कानून के सवाल को खुला छोड़ते हुए सभी लंबित याचिकाओं का निस्तारण कर दिया।
निर्माताओं की याचिका भी हुई वापस, पश्चिम बंगाल बैन का मामला खत्म
इसी सुनवाई के दौरान फिल्म के निर्माताओं (सनशाइन पिक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड और विपुल अमृतलाल शाह) द्वारा दायर याचिका को भी औपचारिक रूप से वापस ले लिया गया। यह याचिका तब दायर की गई थी जब पश्चिम बंगाल सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर राज्य में फिल्म के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने मई 2023 में ही राज्य सरकार के इस प्रतिबंध पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अब चूंकि फिल्म का थियेट्रिकल रन पूरा हो चुका है, इसलिए निर्माताओं ने अपनी अर्जी वापस ले ली।
girls globe