
सनातन हिंदू धर्म और पूजा-पाठ में दीपक प्रज्वलित करने को केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि साक्षात सकारात्मक ऊर्जा, ज्ञान, तेज और ईश्वर के प्राकट्य का प्रतीक माना गया है। शास्त्रों में अग्नि देव को प्रत्यक्ष देवता और ‘हव्यवाहन’ माना गया है, जो हमारी प्रार्थनाओं और आहुतियों को सीधे ईश्वर तक पहुंचाते हैं। अक्सर लोग सुबह और शाम की पूजा में पूरी श्रद्धा के साथ दीया जलाते हैं, लेकिन अनजाने में कुछ ऐसी सूक्ष्म गलतियां कर बैठते हैं, जिससे पूजा का शुभ फल मिलने के बजाय घर में नकारात्मकता, दरिद्रता और वास्तु दोष उत्पन्न होने लगता है। धर्मशास्त्रों, गरुड़ पुराण और वास्तु शास्त्र में दीपक जलाने के कई कठोर नियम बताए गए हैं, जिनमें से एक गलती को सबसे बड़ा दोष माना गया है।
दीपक से दीपक जलाना: शास्त्रों में सबसे बड़ा वर्जित कर्म
पूजा-अर्चना या आरती के दौरान सबसे आम और गंभीर गलती जो लोग करते हैं, वह है ‘एक जलते हुए दीपक से दूसरा दीपक जलाना’।
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शास्त्रों का सख्त निर्देश: धर्मग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि यदि कोई व्यक्ति एक जलते हुए दीपक की लौ से दूसरा दीपक या अगरबत्ती/धूपबत्ती जलाता है, तो वह पूजा दोषपूर्ण मानी जाती है।
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दरिद्रता और रोग का कारण: पद्म पुराण और भविष्य पुराण के अनुसार, दीपक से दीपक जलाने से घर में आर्थिक तंगी, कर्ज और पारिवारिक सदस्यों में शारीरिक व्याधियां (बीमारियां) बढ़ती हैं।
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अग्नि का अपमान: हर दीपक का अपना स्वतंत्र स्थान, उद्देश्य और संकल्प होता है। जब आप एक दिए से दूसरा दीया जलाते हैं, तो पहले दीपक की ऊर्जा और शुचिता खंडित हो जाती है। इसलिए हर नए दीपक को हमेशा माचिस या अलग जलती हुई तीली से ही प्रज्वलित करना चाहिए।
खंडित या टूटे हुए दीपक का कभी न करें उपयोग
मिट्टी के दीये का उपयोग करते समय यह जरूर देखें कि वह कहीं से चटका, टूटा या खुरदरा न हो:
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अशुभ ऊर्जा का प्रवेश: खंडित दीये में तेल या घी डालकर जलाने से वास्तु दोष बनता है और मां लक्ष्मी अप्रसन्न होती हैं।
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धातु के बर्तनों की सफाई: यदि आप पीतल, तांबे या चांदी के दीपक का प्रयोग करते हैं, तो उसे हर रोज अच्छी तरह मांजकर और धोकर ही दोबारा जलाएं। बासी या जूठे दीपक में नई बाती लगाना वर्जित माना गया है।
बाती के नियम: गोल बाती बनाम लंबी बाती का सही चुनाव
दीपक में लगाई जाने वाली बाती का भी शास्त्र सम्मत विधान है, जिसे लेकर अक्सर लोग भ्रमित रहते हैं:
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लंबी बाती (खड़ी बाती): लंबी बाती का प्रयोग हमेशा माता लक्ष्मी, मां दुर्गा, सरस्वती और कुलदेवी की पूजा में किया जाता है। लंबी बाती धन, यश और वंश वृद्धि का कारक मानी जाती है।
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गोल बाती (फूल बाती): गोल बाती का प्रयोग भगवान शिव, श्री हरि विष्णु, हनुमान जी और बटुक भैरव की उपासना में किया जाता है। यह स्थिरता, आत्मबल और शांति प्रदान करती है।
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बाती की संख्या: किसी भी शुभ कार्य में कभी भी एक ही दीपक में दो अलग-अलग तरह के तेल/घी या टूटी हुई बातीयों को जोड़कर नहीं जलाना चाहिए।
घी और तेल के दीपक के लिए अलग-अलग दिशा और स्थान
वास्तु शास्त्र के अनुसार दीपक को सही दिशा और सही हाथ की तरफ रखना अनिवार्य है:
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शुद्ध देसी घी का दीपक: भगवान के सामने खड़े होने पर घी का दीपक हमेशा आपके बाएं हाथ (Left Hand) की तरफ यानी भगवान के दाहिने हाथ की तरफ होना चाहिए।
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तिल या सरसों के तेल का दीपक: तेल का दीपक हमेशा आपके दाहिने हाथ (Right Hand) की तरफ यानी भगवान के बाएं हाथ की तरफ रखा जाना चाहिए।
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दीपक की लौ की दिशा:
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पूर्व दिशा: स्वास्थ्य, आयु और सकारात्मक विचारों में वृद्धि करती है।
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उत्तर दिशा: धन लाभ, व्यापारिक प्रगति और सुख-समृद्धि लाती है।
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दक्षिण दिशा: पूजा के दीपक की लौ कभी भी दक्षिण दिशा की ओर नहीं होनी चाहिए (यह केवल यम और पितरों के निमित्त जलाए जाने वाले दीपक के लिए होती है)।
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जमीन पर सीधे कभी न रखें दीपक: ‘आसन’ देना है जरूरी
शास्त्रों में नियम है कि दीपक को कभी भी सीधे फर्श या जमीन पर न रखें। अग्नि देव को हमेशा एक ‘आसन’ प्रदान करना चाहिए। दीपक स्थापित करने से पहले उसके नीचे थोड़े से अक्षत (साबुत चावल), फूल की पंखुड़ियां या एक छोटी प्लेट रखें। बिना आसन के रखा गया दीपक पृथ्वी का ताप बढ़ाता है और पूजा का पुण्य फल अधूरा रह जाता है।
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