
टेलीविजन जगत की मशहूर अभिनेत्री और अपनी बेबाक अदाकारी के लिए पहचानी जाने वाली श्वेता तिवारी एक बार फिर से विवादों के घेरे में हैं। इस बार वजह उनकी कोई फिल्म या शो नहीं, बल्कि एक पुराना बयान है जिसे लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। श्वेता तिवारी को एमएनएस (MNS) समर्थकों द्वारा दी जा रही गालियों और अभद्र भाषा का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति में ‘मराठी माणूस’ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर हो रही गुंडागर्दी के मुद्दे को हवा दे दी है। फैंस और तमाम सोशल मीडिया यूजर्स अब एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे से सीधा सवाल कर रहे हैं कि क्या पार्टी का ‘मराठी माणूस’ प्रेम और विचारधारा इसी तरह की अभद्रता को बढ़ावा देने के लिए है?
विवाद की शुरुआत: एक पुराना बयान और बढ़ती नफरत
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब श्वेता तिवारी का एक पुराना वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर दोबारा वायरल होने लगा। इस क्लिप के वायरल होते ही एमएनएस (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) से जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर श्वेता तिवारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। देखते ही देखते उनकी पोस्ट्स और कमेंट्स में भद्दी गालियों और धमकियों की भरमार हो गई। श्वेता तिवारी, जो खुद एक प्रतिष्ठित अभिनेत्री हैं और मनोरंजन उद्योग का एक बड़ा चेहरा हैं, उनके प्रति इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना न केवल कानूनन गलत है, बल्कि यह सार्वजनिक शिष्टाचार की मर्यादाओं को भी तार-तार करने वाला है।
एमएनएस कार्यकर्ताओं का रवैया और ‘मराठी माणूस’ का मुद्दा
राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस लंबे समय से महाराष्ट्र में ‘मराठी माणूस’ के हितों की रक्षा करने का दावा करती आई है। हालांकि, अक्सर उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर सार्वजनिक स्थलों और सोशल मीडिया पर हिंसा तथा अभद्रता फैलाने के आरोप लगते रहे हैं। श्वेता तिवारी के मामले में भी जिस तरह से एमएनएस समर्थकों ने एक महिला अभिनेत्री के प्रति इतनी निम्न स्तरीय भाषा का प्रयोग किया है, उसने आम जनता के बीच गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग सोशल मीडिया पर यह पूछ रहे हैं कि क्या पार्टी के झंडे तले इस तरह की असभ्य हरकतों को अनुमति दी गई है? क्या पार्टी प्रमुख राज ठाकरे इस पर संज्ञान लेंगे या फिर उनकी चुप्पी इस तरह की नफरत को और बढ़ावा देगी?
महिलाओं के प्रति बढ़ती ऑनलाइन हिंसा पर उठते सवाल
यह पहली बार नहीं है जब मनोरंजन जगत की किसी महिला हस्ती को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग या भद्दी गालियों का शिकार होना पड़ा है। लेकिन इस बार यह मामला इसलिए अधिक गंभीर है क्योंकि इसे एक राजनीतिक विचारधारा के नाम पर अंजाम दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब राजनीतिक दल अपनी विचारधारा को आक्रामक बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को खुली छूट दे देते हैं, तो उसका असर समाज के ताने-बाने पर बुरा पड़ता है। श्वेता तिवारी को निशाना बनाकर की जा रही यह अभद्रता न केवल उनकी व्यक्तिगत गरिमा को ठेस पहुंचाती है, बल्कि यह उन सभी महिलाओं के लिए एक खतरे की घंटी है जो अपनी राय रखने या सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने का साहस करती हैं।
राज ठाकरे और एमएनएस नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल
जनता और सोशल मीडिया यूजर्स लगातार राज ठाकरे से यह सवाल कर रहे हैं कि क्या उन्होंने अपने समर्थकों को यही संस्कार दिए हैं? क्या महाराष्ट्र की महान संस्कृति, जो संतों और समाज सुधारकों की धरती मानी जाती है, वहां महिलाओं के प्रति ऐसी नफरत फैलाना ‘मराठी माणूस’ की विचारधारा का हिस्सा है? अब तक एमएनएस नेतृत्व की तरफ से इस अभद्र व्यवहार पर कोई आधिकारिक बयान या माफीनामा सामने नहीं आया है। यह चुप्पी न केवल पार्टी के प्रति लोगों के विश्वास को कम कर रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि राजनीतिक संरक्षण में कुछ भी कहना या करना जायज है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए भी यह एक चुनौती है कि वे ऐसी ऑनलाइन नफरत और महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा पर कैसे अंकुश लगाती हैं।
सोशल मीडिया पर एकजुट हुए प्रशंसक और बुद्धिजीवी
इस पूरे प्रकरण में श्वेता तिवारी के समर्थन में न केवल उनके फैंस बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग और सोशल मीडिया पर सक्रिय बुद्धिजीवी भी खुलकर सामने आए हैं। लोगों का कहना है कि अगर किसी को श्वेता के बयान से कोई आपत्ति थी, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख सकते थे या कानूनी रास्ता अपना सकते थे, लेकिन भद्दी गालियां देना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। ट्विटर, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर ‘श्वेता तिवारी के साथ खड़ा होना’ जैसे हैशटैग्स ट्रेंड कर रहे हैं। समाज में इस तरह की गिरती हुई भाषा और राजनीतिक नफरत के खिलाफ यह एक महत्वपूर्ण आवाज है।
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