
सनातन धर्म में चातुर्मास (आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी) के चार महीनों को तप, साधना, शुद्धि और आत्म-कल्याण के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों में जगत के पालनहार भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में लीन रहते हैं और इस दौरान प्रकृति व वनस्पति की सेवा सीधे ईश्वर की उपासना के समान मानी जाती है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि चातुर्मास के दौरान विशिष्ट आध्यात्मिक पौधों को घर के आंगन में लगाने और नित्य उनकी पूजा करने से घर के सभी वास्तु दोष समाप्त होते हैं, कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं और परिवार में सुख, शांति तथा आर्थिक संपन्नता का वास होता है।
1. तुलसी का पौधा: मां लक्ष्मी का वास और घर की सकारात्मक ऊर्जा भगवान विष्णु को तुलसी पत्र अत्यंत प्रिय हैं और उनकी कोई भी पूजा या भोग तुलसी दल के बिना स्वीकार्य नहीं माना जाता। चातुर्मास में घर की उत्तर या उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में तुलसी का पौधा लगाना परम कल्याणकारी होता है।
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नियम व लाभ: प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद तुलसी जी को तांबे के लोटे से जल अर्पित करें और शाम के समय गाय के शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। इससे घर से नकारात्मक ऊर्जा, ग्रह कलह और आर्थिक बाधाएं हमेशा के लिए दूर होती हैं।
2. केले का पेड़: देवगुरु बृहस्पति और भगवान सत्यनारायण की कृपा शास्त्रों के अनुसार, केले के पेड़ में साक्षात भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का वास होता है। यदि आपकी कुंडली में गुरु कमजोर है या विवाह व करियर में रुकावटें आ रही हैं, तो चातुर्मास में केले का पौधा लगाना अत्यंत शुभ माना गया है।
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नियम व लाभ: केले के पौधे को घर के पिछले हिस्से या ईशान कोण में लगाएं। हर गुरुवार को हल्दी मिश्रित जल, चने की दाल और गुड़ अर्पित करने से भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और जातक को अखंड धन-संपत्ति का वरदान देते हैं। इसे तुलसी के साथ पास-पास लगाने से लक्ष्मी-नारायण योग बनता है।
3. शमी का पौधा: शनि दोष से मुक्ति और भगवान शिव का आशीर्वाद चातुर्मास के भीतर पड़ने वाले सावन और भाद्रपद के महीनों में शमी के पौधे का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। शमी पत्र भगवान शिव और गणेश जी को अत्यंत प्रिय हैं, साथ ही यह पौधा न्याय के देवता शनिदेव को भी शांत रखता है।
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नियम व लाभ: शमी के पौधे को घर के मुख्य द्वार से बाहर निकलते समय दाहिनी ओर या पश्चिम दिशा में लगाएं। शनिवार की शाम को शमी के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से साढ़ेसाती, ढैय्या और राहु-केतु के अशुभ प्रभावों से पूर्ण सुरक्षा मिलती है।
4. आंकड़े (मदार) का पौधा: शिव कृपा और नजर दोष से रक्षा सफेद मदार या श्वेतार्क का पौधा चातुर्मास में भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। मान्यता है कि आंकड़े का पौधा जिस घर के बाहर होता है, उस परिवार पर किसी भी प्रकार की तंत्र बाधा या नजर दोष का असर नहीं होता।
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नियम व लाभ: इस पौधे को घर के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर दाहिनी तरफ लगाएं। इसके सफेद पुष्प नित्य शिवलिंग पर अर्पित करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है और लंबे समय से अटका हुआ धन वापस लौटता है।
5. अपराजिता (विष्णुप्रिया): आर्थिक तंगी को जड़ से खत्म करने वाला दिव्य पौधा नीले रंग के फूलों वाली अपराजिता की बेल को ‘विष्णुप्रिया’ और ‘लक्ष्मीप्रिया’ कहा जाता है। चातुर्मास के दौरान घर में अपराजिता लगाना अपार धन खींचने का अचूक साधन माना गया है।
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नियम व लाभ: इसे घर की उत्तर या पूर्व दिशा में लगाएं। बुधवार और शुक्रवार के दिन अपराजिता के नीले फूल भगवान नारायण और मां महालक्ष्मी के चरणों में अर्पित करने से व्यापार में लगातार तरक्की होती है और कर्ज के बोझ से मुक्ति मिलती है।
चातुर्मास में इन बातों का रखें विशेष ध्यान इन पवित्र पौधों को हमेशा स्वच्छ और पवित्र स्थान पर ही लगाएं। पौधों के आसपास कभी भी कूड़ा-करकट, जूते-चप्पल या कांटेदार कैक्टस जैसे पौधे न रखें। रविवार और एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें और सूर्यास्त के बाद पौधों को जल न दें। पूरे चातुर्मास में श्रद्धापूर्वक इन पौधों की देखभाल करने से घर में खुशहाली और आध्यात्मिक शांति का स्थायी वास होता है।
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