
बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर इन दिनों प्रतियोगी छात्रों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है। शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) का आधिकारिक शेड्यूल जारी किए जाने के बावजूद छात्रों का महाधरना और विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है और यह आंदोलन अब दूसरे दिन भी पूरी ताकत के साथ जारी है। दूर-दराज के जिलों से पटना पहुंचे हजारों अभ्यर्थी अपनी विभिन्न मांगों और विसंगतियों को दूर कराने की मांग को लेकर डटे हुए हैं। छात्रों का कहना है कि केवल परीक्षा का शेड्यूल जारी कर देना ही काफी नहीं है, बल्कि चयन प्रक्रिया और पात्रता नियमों में कई ऐसी कमियां हैं जिन्हें सुधारा जाना बेहद जरूरी है। राजधानी के प्रमुख धरना स्थलों पर पुलिस और प्रशासन की कड़ी चौकसी के बीच छात्रों का यह प्रदर्शन लगातार तूल पकड़ता जा रहा है, जिससे प्रशासनिक अमले की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। आइए इस विस्तृत लेख में जानते हैं कि पटना में चल रहे इस छात्र महाधरना के पीछे की असल वजहें क्या हैं और TRE-4 परीक्षा को लेकर छात्रों का गुस्सा क्यों शांत नहीं हो रहा है।
TRE-4 परीक्षा का शेड्यूल जारी होने के बावजूद क्यों जारी है विरोध?
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) और शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक नियुक्ति परीक्षा के चौथे चरण यानी TRE-4 का शेड्यूल और परीक्षा तिथियां घोषित किए जाने के बाद उम्मीद यह की जा रही थी कि छात्र शांत हो जाएंगे। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है। शेड्यूल आने के बाद भी छात्र सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इस बार की नियमावली में कई ऐसे प्रावधान हैं जो उनके हितों के खिलाफ हैं। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा में पदों की संख्या, अपीयरिंग छात्रों को मौका देने और आयु सीमा जैसी कई महत्वपूर्ण मांगों पर सरकार और आयोग की तरफ से कोई स्पष्ट राहत नहीं दी गई है। यही वजह है कि तमाम घोषणाओं के बाद भी छात्रों का अविश्वास बना हुआ है और वे अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
पटना की सड़कों पर उबला छात्रों का जनसैलाब और पुलिस की चौकसी
बिहार के अलग-अलग जिलों जैसे गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर और आरा समेत कई इलाकों से आए हजारों छात्र पटना में एकजुट हो चुके हैं। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए ये युवा अपनी मांगों के समर्थन में लगातार नारेबाजी कर रहे हैं। छात्रों के इस उग्र प्रदर्शन को देखते हुए पटना जिला प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रहा है। धरना स्थल और आसपास के मुख्य मार्गों पर भारी संख्या में पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स और वज्र वाहनों को तैनात किया गया है ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे। प्रशासन लगातार छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है, लेकिन छात्र अपनी जिद पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगों पर ठोस लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
छात्रों की प्रमुख मांगें और आयोग का रुख
इस महाधरना प्रदर्शन के दौरान छात्रों की ओर से कई सूत्रीय मांगें रखी गई हैं, जिनमें मुख्य रूप से रिक्त पदों की संख्या में भारी बढ़ोतरी करना, परीक्षा कैलेंडर को पारदर्शी बनाना और उन तमाम अभ्यर्थियों को मौका देना शामिल है जो तकनीकी कारणों से आवेदन करने से वंचित रह गए हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार को रोजगार के नाम पर खानापूर्ति नहीं करनी चाहिए, बल्कि हर योग्य युवा को शिक्षक बनने का निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए। दूसरी ओर, शिक्षा विभाग और आयोग के अधिकारियों का यह तर्क है कि वे नियमों के दायरे में रहकर ही पूरी पारदर्शिता के साथ परीक्षाएं आयोजित करवा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा के सुचारू संचालन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और छात्रों को भ्रमित होने के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।
इस आंदोलन का आगामी राजनीतिक और प्रशासनिक असर
बिहार की राजनीति में शिक्षा और शिक्षक बहाली हमेशा से एक बहुत बड़ा और संवेदनशील मुद्दा रहा है। आगामी चुनावों और राजनीतिक सरगर्मी के बीच छात्रों का यह महाधरना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को भुनाने के लिए लगातार छात्रों के समर्थन में उतर रहे हैं, जिससे सियासी पारा काफी हाई हो गया है। प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों और छात्र प्रतिनिधियों के बीच लगातार बातचीत के दौर जारी हैं ताकि किसी तरह बीच का रास्ता निकाला जा सके। बहरहाल, पटना में चल रहा यह धरना इस बात का प्रमाण है कि बिहार का युवा अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर अब किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है और आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है।
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