Wednesday , August 19 2026

सावन का अंतिम प्रदोष व्रत कब है? बन रहा त्रिपुष्कर योग, पूजा के लिए सवा दो घंटे का खास मुहूर्त

सनातन धर्म में सावन के महीने का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व माना गया है। इस पवित्र मास में भगवान शिव की आराधना के लिए हर एक तिथि को बेहद खास माना जाता है। पंचांग के अनुसार सावन का महीना अब अपने अंतिम चरण की ओर आगे बढ़ रहा है और इसी के साथ सावन मास का अंतिम प्रदोष व्रत भी नजदीक आ गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत का संबंध देवों के देव महादेव की उपासना से है, और जब यह व्रत सावन मास में पड़ता है तो इसका पुण्य कई गुना अधिक बढ़ जाता है। इस बार सावन का यह आखिरी प्रदोष व्रत कई दुर्लभ संयोगों और बेहद शुभ योगों के साथ आ रहा है, जो शिव भक्तों के लिए साधना और सिद्धि प्राप्त करने का स्वर्णिम अवसर लेकर आया है।

सावन के अंतिम प्रदोष व्रत की सही तिथि और दिन

वैदिक पंचांग की गणना के मुताबिक, सावन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यह पावन व्रत रखा जाएगा। इस बार सावन का यह अंतिम प्रदोष व्रत 25 अगस्त 2026, मंगलवार के दिन पड़ रहा है। मंगलवार के दिन त्रयोदशी तिथि होने के कारण इसे ‘भौम प्रदोष व्रत’ के नाम से भी जाना जाएगा। पंचांग के अनुसार श्रावण शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 25 अगस्त 2026 को सुबह 06 बजकर 20 मिनट पर होगा, और इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 26 अगस्त 2026 को सुबह 07 बजकर 59 मिनट पर होगा। चूंकि प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा संध्याकाल यानी प्रदोष काल में करने का विधान है, इसलिए उदयातिथि और प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी के आधार पर यह व्रत 25 अगस्त को ही रखा जाएगा।

बन रहा है अद्भुत मंगला गौरी और त्रिपुष्कर योग का संयोग

इस बार सावन के आखिरी भौम प्रदोष व्रत पर एक अत्यंत दुर्लभ और मंगलकारी संयोग का निर्माण हो रहा है। 25 अगस्त 2026 को मंगलवार होने के कारण सावन का अंतिम ‘मंगला गौरी व्रत’ भी इसी दिन है। एक ही दिन प्रदोष व्रत और मंगला गौरी व्रत का एक साथ पड़ना सोने पर सुहागा जैसा है। इस विशेष संयोग में भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती और संकटモचन हनुमान जी की भी एक साथ आराधना की जा सकेगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से व्रतियों को एक साथ दो बड़े व्रतों का पुण्य फल प्राप्त होता है, जिससे जीवन के सभी प्रकार के कष्ट, संकट और अमंगल दूर हो जाते हैं।

पूजा के लिए सवा दो घंटे का मिल रहा है खास मुहूर्त

प्रदोष व्रत में भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष काल के समय को सबसे उत्तम माना गया है। पंचांग के अनुसार 25 अगस्त 2026 को संध्याकाल में पूजा के लिए कुल सवा दो घंटे यानी लगभग 2 घंटे 13 मिनट का अत्यंत शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है। इस दिन शाम को 06 बजकर 51 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 04 मिनट तक प्रदोष काल की अवधि रहेगी। शिव भक्त इस निर्धारित सवा दो घंटे के शुभ मुहूर्त में विधि-विधान के साथ देवाधिदेव महादेव का रुद्राभिषेक और पूजन संपन्न कर सकते हैं। इसके अलावा इस दिन के अन्य शुभ मुहूर्तों की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:27 बजे से 05:11 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक, और विजय मुहूर्त दोपहर 02:32 बजे से 03:24 बजे तक रहेगा। इन सभी मुहूर्तों में भी ईश्वर का ध्यान करना बहुत कल्याणकारी होता है।

भौम प्रदोष व्रत का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

भौम प्रदोष व्रत का सीधा संबंध मंगल ग्रह (भौम) और हनुमान जी से भी माना गया है। जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष होता है या जिन्हें भूमि, भवन, संपत्ति संबंधी विवादों का सामना करना पड़ रहा है, उनके लिए यह व्रत किसी वरदान से कम नहीं है। इस दिन सच्चे मन से शिवोपासना करने से कर्ज या ऋण से मुक्ति मिलती है, अदम्य साहस और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है, तथा उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। सावन के आखिरी मंगलवार और प्रदोष का यह मिलन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और सभी प्रकार की बाधाओं को हमेशा के लिए समाप्त कर देता है।

प्रदोष व्रत की सरल और सटीक पूजा विधि

सावन के अंतिम भौम प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का दृढ़ संकल्प लें। दिनभर मन ही मन शिव के पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते रहें। प्रदोष काल यानी शाम के समय पुनः स्नान करके या हाथ-पैर धोकर शुद्ध हो जाएं और किसी नजदीकी शिव मंदिर में जाएं। मंदिर में शिवलिंग पर पवित्र गंगाजल, गाय का दूध, दही, शहद और घी से पंचामृत अभिषेक करें। इसके बाद भगवान को बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, अक्षत, धूप, दीप और चंदन अर्पित करें। पूजन के दौरान प्रदोष व्रत की कथा का पाठ अवश्य करें या सुनें। अंत में भगवान शिव और माता मंगला गौरी की भव्य आरती करके अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।