
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी यूजीसी-नेट (UGC NET) की तैयारी में जुटे लाखों अभ्यर्थियों के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण आधिकारिक फैसला लिया है। जून 2026 सत्र की परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्रों में सामने आई गंभीर तथ्यात्मक, अनुवाद और मुद्रण संबंधी गलतियों की जांच के बाद एनटीए ने तीन सबसे बड़े विषयों—अंग्रेजी (English), वाणिज्य (Commerce) और समाजशास्त्र (Sociology) की परीक्षा को दोबारा (Re-Exam) आयोजित कराने का ऐलान किया है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह री-एग्जाम 9 और 10 सितंबर 2026 को देश भर के निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT Mode) में आयोजित किया जाएगा। एजेंसी ने अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि दोबारा परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को न तो कोई नया आवेदन फॉर्म भरना होगा और न ही किसी प्रकार की अतिरिक्त परीक्षा फीस चुकानी होगी।
यूजीसी-नेट री-एग्जाम का विषयवार और शिफ्ट-वार संपूर्ण शेड्यूल
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा जारी आधिकारिक टाइम-टेबल के अनुसार, तीनों विषयों की पुनर्रचित परीक्षाएं दो दिनों में तीन अलग-अलग शिफ्टों में संपन्न कराई जाएंगी:
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अंग्रेजी (English – Subject Code 30): 9 सितंबर 2026 को पहली पाली (Shift 1) में सुबह 09:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।
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कॉमर्स (Commerce – Subject Code 08): 9 सितंबर 2026 को दूसरी पाली (Shift 2) में दोपहर 03:00 बजे से सायं 06:00 बजे तक।
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सोशियोलॉजी (Sociology – Subject Code 05): 10 सितंबर 2026 को पहली पाली (Shift 1) में सुबह 09:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।
प्रत्येक परीक्षा सत्र 3 घंटे (180 मिनट) का होगा, जिसमें बिना किसी ब्रेक के पेपर-1 (जनरल टीचिंग एंड रिसर्च एप्टीट्यूड) और पेपर-2 (संबंधित विषय) के कुल 150 बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) हल करने होंगे।
67 सवाल हूबहू रिपीट और विचारकों के गलत नाम: क्यों लेना पड़ा री-एग्जाम का फैसला?
यूजीसी नेट जैसी देश की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता को लेकर पहली बार इतने बड़े पैमाने पर विसंगतियां सामने आईं, जिसके बाद छात्रों और शिक्षक संघों ने सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक कड़ा विरोध जताया था। विवाद गहराने के बाद एनटीए ने विषय विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति गठित की थी।
जांच समिति की रिपोर्ट में जो चौंकाने वाले खुलासे हुए, उन्होंने परीक्षा प्रणाली की लापरवाही को उजागर कर दिया:
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अंग्रेजी के पेपर में 67 सवाल रिपीट: जांच में पाया गया कि अंग्रेजी विषय के पेपर-2 में कुल 100 विषय-विशिष्ट सवालों में से 67 सवाल वर्ष 2024 के पुराने प्रश्नपत्र से हूबहू बिना किसी बदलाव के उतार दिए गए थे। यहां तक कि चार विकल्पों (A, B, C, D) का क्रम तक नहीं बदला गया था।
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समाजशास्त्र में विचारकों के नामों की हास्यास्पद गलतियां: सोशियोलॉजी के पेपर में स्थापित वैश्विक और भारतीय समाजशास्त्रियों के नामों की भयानक स्पेलिंग मिस्टेक की गई थी। प्रसिद्ध समाजशास्त्री जॉर्ज रिट्जर (George Ritzer) का नाम ‘Putzer’ छाप दिया गया था। भारतीय समाजशास्त्र के जनक कहे जाने वाले जी.एस. घुरिये (G.S. Ghurye) का नाम ‘Ghunye’ और ए.आर. देसाई (A.R. Desai) का नाम ‘A.K. Desai’ लिखा गया था। इसके अलावा दार्शनिक मार्था नुसबाम का नाम ‘Nusbaut’ और टैल्कोट पार्सन्स का नाम ‘Parsow’ कर दिया गया था।
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अनुवाद और व्याकरण की भारी त्रुटियां: हिंदी अनुवाद में गूगल ट्रांसलेटर की तरह ‘Social’ शब्द का अनुवाद ‘Oval’ जैसा निरर्थक शब्द कर दिया गया था।
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में दो टूक कहा कि केवल आपत्ति दर्ज कराकर कुछ सवालों को ड्रॉप (Drop) करने से निष्पक्ष मेरिट तय नहीं हो सकती, क्योंकि इससे मेधावी छात्रों के साथ घोर अन्याय होगा। इसलिए परीक्षा की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए तीनों विषयों की परीक्षा पूरी तरह रद्द कर नए सिरे से कराना ही एकमात्र न्यायसंगत विकल्प था।
अभ्यर्थियों को नहीं भरना होगा नया फॉर्म: जानिए कौन हो सकेगा शामिल?
एनटीए ने इस संबंध में अभ्यर्थियों के सभी संशयों को दूर करते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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पुराना रजिस्ट्रेशन ही रहेगा मान्य: जिन अभ्यर्थियों ने जून 2026 सत्र के लिए पूर्व में सफलतापूर्वक ऑनलाइन आवेदन किया था और परीक्षा शुल्क जमा किया था, उनका वही पुराना एप्लीकेशन नंबर (Application Number) मान्य रहेगा। उन्हें किसी भी नए पोर्टल पर जाकर री-रजिस्ट्रेशन करने की आवश्यकता नहीं है।
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शून्य अतिरिक्त शुल्क: री-एग्जाम में बैठने वाले किसी भी छात्र से कोई अलग या अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा।
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उपस्थिति को लेकर नियम: वे सभी अभ्यर्थी जिन्होंने पहले जारी किए गए एडमिट कार्ड के आधार पर परीक्षा दी थी, वे स्वतः इस री-एग्जाम के लिए पात्र होंगे।
पुराना एडमिट कार्ड नहीं चलेगा: एनटीए जारी करेगा नए हॉल टिकट
परीक्षार्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जून में आयोजित मूल परीक्षा का पुराना एडमिट कार्ड इस री-एग्जाम के लिए वैध नहीं होगा। परीक्षा की नई तारीख, नए परीक्षा केंद्र और संशोधित शिफ्ट टाइमिंग के साथ एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट पर पूरी तरह नया एडमिट कार्ड जारी किया जाएगा।
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एग्जाम सिटी इंटिमेशन स्लिप (Exam City Slip): परीक्षा से लगभग 7 से 10 दिन पहले (अगस्त के अंतिम सप्ताह में) अभ्यर्थियों को उनके परीक्षा शहर की अग्रिम सूचना पर्ची जारी की जाएगी, ताकि दूर-दराज के छात्र समय पर अपना यात्रा और ट्रेन आरक्षण करा सकें।
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एडमिट कार्ड रिलीज डेट: नए एडमिट कार्ड परीक्षा की तारीख से 4 दिन पूर्व आधिकारिक पोर्टल पर लाइव कर दिए जाएंगे।
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डाउनलोड करने का तरीका: अभ्यर्थी एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाकर अपने पुराने एप्लीकेशन नंबर और जन्मतिथि (Date of Birth) तथा सिक्योरिटी पिन दर्ज करके अपना नया एडमिट कार्ड पीडीएफ डाउनलोड कर सकेंगे।
परीक्षा केंद्र पर ले जाने के लिए 4 अनिवार्य दस्तावेज और कड़े सुरक्षा नियम
9 और 10 सितंबर को परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होते समय अभ्यर्थियों को इन बातों का विशेष ध्यान रखना होगा:
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नए एडमिट कार्ड का स्पष्ट प्रिंटआउट: ए4 साइज के सफेद पेपर पर डाउनलोड किए गए नए एडमिट कार्ड का रंगीन या स्पष्ट ब्लैक एंड व्हाइट प्रिंटआउट।
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मूल और वैध फोटो पहचान पत्र: आधार कार्ड (मूल प्रति / ई-आधार), पैन कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस में से कोई एक ओरिजिनल आईडी अनिवार्य है (फोटोकॉपी या मोबाइल फोटो स्वीकार नहीं की जाएगी)।
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पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ: वही रंगीन फोटो जो ऑनलाइन आवेदन पत्र भरते समय अपलोड की गई थी, उसे उपस्थिति पत्रक (Attendance Sheet) पर चिपकाने के लिए साथ ले जाना होगा।
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पारदर्शी पेन और वॉटर बॉटल: एक साधारण पारदर्शी बॉलपॉइंट पेन और पारदर्शी पानी की बोतल ले जाने की अनुमति होगी। किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ डिवाइस, बैग या नोट्स परीक्षा हॉल के अंदर पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे।
जेआरएफ और असिस्टेंट प्रोफेसर की दौड़ में दोबारा मिलेगा बराबरी का मौका
इस री-एग्जाम के फैसले का देश भर के अकादमिक जगत और शोधार्थियों ने स्वागत किया है। प्रोफेसर और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए एक-एक अंक की प्रतिस्पर्धा होती है। गलत अनुवाद और आउट-ऑफ-सिलेबस या रिपीटेड सवालों की वजह से जिन गंभीर और मेहनती छात्रों का मनोबल टूट गया था, उन्हें अब अपनी वास्तविक योग्यता साबित करने का एक निष्पक्ष और पारदर्शी मंच मिलेगा। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अभ्यर्थी अब किसी भी भ्रामक अफवाह पर ध्यान न दें और 9-10 सितंबर के री-एग्जाम के लिए अपने रिवीजन को तेज कर दें।
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