Nag Panchami 2026: कालसर्प दोष से मुक्ति और सुख-समृद्धि के लिए नाग पंचमी पर करें ये खास उपाय, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानी 17 अगस्त 2026 को नाग पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में नाग पंचमी के दिन नाग देवता और भगवान शिव की पूजा का विशेष विधान है। चूंकि देवों के देव महादेव के गले में नागराज वासुकी हमेशाि विराजमान रहते हैं, इसलिए सावन के महीने में इस पर्व का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प योग या राहु-केतु से जुड़े दोष होते हैं, उनके लिए नाग पंचमी का दिन विशेष रूप से शांति और उपाय करने के लिए बेहद फलदायी माना जाता है।

नाग पंचमी का महत्व और कालसर्प दोष की मान्यता

हिंदू पौराणिक कथाओं और ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार, जब जन्म कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, तो उसे कालसर्प योग या कालसर्प दोष कहा जाता है। हालांकि इसको लेकर ज्योतिषविदों में अलग-अलग मत हैं और केवल इसी योग से जीवन की सभी परेशानियों को नहीं जोड़ा जा सकता, फिर भी धार्मिक दृष्टिकोण से नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से मानसिक शांति और सुरक्षा का अहसास होता है। इस दिन सच्चे मन से शिवाराधना करने से जीवन की कई बाधाएं दूर होती हैं और भगवान शिव के साथ-साथ नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

नाग पंचमी 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त और समय

पंचांग के अनुसार, 17 अगस्त को पंचमी तिथि शाम लगभग 5:00 बजे तक रहेगी। नाग पंचमी की पूजा और अनुष्ठान के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना गया है। कई प्रमुख पंचांगों के अनुसार पूजा का शुभ समय सुबह 5:51 बजे से लेकर 8:29 बजे तक रहेगा, यानी कुल 2 घंटे 37 मिनट का अनुकूल समय प्राप्त होगा। हालांकि, स्थानीय सूर्योदय और राहुकाल के आधार पर समय में थोड़ा बदलाव हो सकता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली के पंचांग के अनुसार 17 अगस्त को राहुकाल सुबह 7:29 से 9:08 बजे तक रहेगा, इसलिए श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार ही पूजा का सही समय निर्धारित करना चाहिए।

नाग पंचमी की सरल और प्रभावी पूजा विधि

नाग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत-पूजा का संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव के मंदिर जाएं या घर पर ही शिव परिवार की पूजा करें। शिवलिंग पर पवित्र जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल और चंदन अर्पित करें। इसके बाद नाग देवता की तस्वीर या चांदी की प्रतिमा की विधि-विधान से पूजा करें। पूजा के दौरान नाग देवता को हल्दी, अक्षत, रोली, फूल और कुश अर्पित करें। ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार, इस दिन चांदी या तांबे के नाग-नागिन का जोड़ा अर्पित करना और राहु-केतु के शांति मंत्रों का जाप करना भी बहुत लाभकारी माना गया है।

इन जरूरी बातों का रखें विशेष ध्यान

आज के आधुनिक समय में वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यह बेहद जरूरी है कि नाग पंचमी के पावन अवसर पर किसी भी जीवित सांप को पकड़ने, उन्हें कैद करने या दूध पिलाने जैसी प्रथाओं से पूरी तरह बचा जाए। प्रकृति और जीवों के प्रति दया भाव रखते हुए केवल नाग देवता की प्रतिमा, तस्वीर या प्रतीकात्मक रूप की ही पूजा करनी चाहिए। इस दिन किसी भी जीव-जंतु को नुकसान न पहुंचाने का संकल्प लें और पर्यावरण की रक्षा का संदेश दें।