
पश्चिम बंगाल की राजनीति से रविवार सुबह एक बेहद स्तब्ध करने वाली खबर सामने आई। राज्य विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर, पूर्व कैबिनेट मंत्री और बीरभूम जिले के कद्दावर तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता डॉ. आशीष बनर्जी का शव रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका पाया गया। यह पार्टी कार्यालय रामपुरहाट नगर पालिका के वार्ड नंबर 5 स्थित हत्तालापारा इलाके में उनके निजी आवास से बिल्कुल सटा हुआ है।
सुबह जब स्थानीय कार्यकर्ताओं और परिजनों ने उनका शव कार्यालय के भीतर लटकता देखा, तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना मिलते ही बीरभूम जिला पुलिस और रामपुरहाट थाने की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल को सील करते हुए शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेज दिया है। एक दिन पहले ही 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह में तिरंगा फहराने वाले 75 वर्षीय वरिष्ठ नेता के इस तरह अचानक चले जाने से पूरे पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में गहरा शोक और सन्नाटा पसर गया है।
सुसाइड नोट में छलका दर्द: ‘मेरी मौत का कोई जिम्मेदार नहीं, मैं कभी भ्रष्ट नहीं था’
पुलिस की प्राथमिक छानबीन के दौरान घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया गया है। बीरभूम के पुलिस अधीक्षक (SP) विदित राज भुंदेश के अनुसार, शुरुआती तौर पर यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है। बरामद सुसाइड नोट में पूर्व डिप्टी स्पीकर ने लिखा है कि उनकी मौत के लिए कोई भी व्यक्ति जिम्मेदार नहीं है और वे अपनी मर्जी से यह कदम उठा रहे हैं।
इसके साथ ही, नोट में उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुचिता का जिक्र करते हुए बेहद भावुक शब्दों में लिखा कि वे जीवन भर बेदाग रहे और उन्होंने कभी किसी प्रकार का भ्रष्टाचार नहीं किया। सूत्रों के मुताबिक, नोट में तारापीठ-रामपुरहाट विकास प्राधिकरण (TRDA) से जुड़े कथित आरोपों और उस पर उठ रही उंगलियों का भी अप्रत्यक्ष संदर्भ है, जिसके वे लंबे समय तक अध्यक्ष रहे थे। पुलिस हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स और फॉरेंसिक टीम की मदद से सुसाइड नोट की आधिकारिक पुष्टि कर रही है और उनके मोबाइल फोन व कॉल डिटेल्स की भी तकनीकी जांच की जा रही है।
प्रोफेसर से डिप्टी स्पीकर तक: 25 साल तक रामपुरहाट के अजेय चेहरा रहे आशीष बनर्जी
डॉ. आशीष बनर्जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे शिक्षा जगत में भी एक प्रतिष्ठित स्थान रखते थे। बर्दवान विश्वविद्यालय से बंगाली साहित्य में एमए और 1985 में पीएचडी (PhD) करने वाले आशीष बनर्जी एक सेवानिवृत्त एसोसिएट प्रोफेसर थे। वे बेहद विनम्र और पढ़े-लिखे राजनेताओं में गिने जाते थे।
उनकी राजनीतिक यात्रा बेहद शानदार रही:
-
लगातार 5 बार विधायक: उन्होंने 2001 में पहली बार रामपुरहाट विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2006, 2011, 2016 और 2021 के चुनावों में लगातार जीत हासिल करते हुए वे 25 वर्षों तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे।
-
ममता कैबिनेट में अहम मंत्रालय: 2011 में जब तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक परिवर्तन किया और ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनीं, तब आशीष बनर्जी को कैबिनेट में शामिल किया गया। उन्होंने राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री और बाद में कृषि मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं।
-
विधानसभा में डिप्टी स्पीकर का पद: अपनी संसदीय समझ और सौम्य स्वभाव के कारण उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा का डिप्टी स्पीकर नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने सदन की मर्यादाओं को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
-
तारापीठ का विकास: तारापीठ रामपुरहाट विकास प्राधिकरण (TRDA) के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने विश्वप्रसिद्ध तारापीठ शक्तिपीठ मंदिर क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, सड़कों और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं के आधुनिकीकरण में बड़ा योगदान दिया।
2026 के चुनावी झटके और पार्टी कोर कमेटी से इस्तीफे की पृष्ठभूमि
आशीष बनर्जी के इस अप्रत्याशित कदम के पीछे हाल के महीनों में घटे राजनीतिक घटनाक्रमों को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में रामपुरहाट सीट पर उन्हें अपने राजनीतिक जीवन की पहली बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार ध्रुब साहा ने उन्हें 24 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित कर दिया था। 25 साल तक लगातार अजेय रहने के बाद मिली इस अप्रत्याशित हार ने उन्हें व्यक्तिगत और राजनीतिक रूप से गहरा आघात पहुंचाया था।
हार के बाद बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस के भीतर भी खींचतान तेज हो गई थी। जून 2026 में आशीष बनर्जी ने टीएमसी की बीरभूम जिला कोर कमेटी के अध्यक्ष पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भेजे पत्र में स्पष्ट लिखा था कि कोर कमेटी अपनी संगठनात्मक और राजनीतिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में पूरी तरह निष्क्रिय हो चुकी है। वे पूर्व विधायक अभिजीत सिन्हा के रुख से सहमत थे, जिन्होंने भी इसी तरह के आरोप लगाकर इस्तीफा दिया था। आशीष बनर्जी ने ऐलान कर दिया था कि वे पद छोड़कर केवल पार्टी के एक साधारण सदस्य के रूप में ही काम करेंगे। चुनावी हार और जिले की अंदरूनी राजनीति से उपजी उपेक्षा ने उन्हें मानसिक रूप से काफी आहत कर रखा था।
बीरभूम की राजनीति में अनुब्रत मंडल का दौर और सत्ता समीकरण
बीरभूम जिले की राजनीति हमेशा से राज्य भर में चर्चा का विषय रही है। लंबे समय तक बीरभूम के टीएमसी जिलाध्यक्ष रहे अनुब्रत मंडल के दौर में आशीष बनर्जी उनके करीबी सहयोगी तो रहे, लेकिन अपने सीधे और गैर-विवादास्पद स्वभाव के कारण वे हमेशा आक्रामक गुटबाजी से दूर रहे।
हाल के वर्षों में जब केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाइयों और राजनीतिक बदलावों के बाद बीरभूम में पार्टी का संगठनात्मक ढांचा लड़खड़ाया, तो आशीष बनर्जी को जिले की कमान संभालने के लिए कोर कमेटी का मुखिया बनाया गया था। हालांकि, संगठन के अंदर बढ़ते अंतर्कलह और कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य बिठाने की चुनौतियों के बीच वे असहज महसूस कर रहे थे। स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि राजनीति में बढ़ता तनाव और सार्वजनिक जीवन में चरित्र पर लगने वाले आक्षेप उनके जैसे संजीदा और शिक्षक पृष्ठभूमि वाले नेता के लिए असहनीय हो गए थे।
पार्टी दफ्तर के बाहर उमड़ा जनसैलाब, समर्थकों की आंखें नम
रविवार सुबह जैसे ही आशीष बनर्जी के निधन की खबर बीरभूम और आसपास के जिलों में फैली, रामपुरहाट स्थित उनके आवास और पार्टी कार्यालय के बाहर हजारों समर्थकों, स्थानीय निवासियों और पार्टी कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई स्तब्ध था कि इलाके का ‘आशीष दा’ के नाम से लोकप्रिय नेता अब उनके बीच नहीं रहा।
टीएमसी नेता अब्बास हुसैन ने मीडिया से बातचीत में रुंधे गले से कहा कि सुबह सवा सात बजे जब यह खबर मिली तो पैरों तले जमीन खिसक गई। किसी को यकीन नहीं हो रहा कि हमेशा शांत और सबको साथ लेकर चलने वाले आशीष दा ने ऐसा आत्मघाती कदम उठा लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे हर दिन सुबह उठकर आम जनता की समस्याएं सुनते थे और किसी भी नागरिक की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते थे।
फॉरेंसिक जांच और पुलिस की कानूनी कार्रवाई
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस हर पहलू से जांच पड़ताल कर रही है। रामपुरहाट सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी और सीआईडी (CID) की विशेष टीम ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट्स और अन्य भौतिक साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुसाइड नोट मिलने के बावजूद वे हत्या, आत्महत्या के लिए उकसाने या किसी बाहरी दबाव जैसे सभी संभावित एंगल्स की निष्पक्षता से जांच कर रहे हैं।
शव का पोस्टमार्टम मजिस्ट्रेट की निगरानी में वीडियोग्राफी के साथ कराया जा रहा है ताकि मौत के सटीक समय और कारणों की वैज्ञानिक पुष्टि हो सके। जिला प्रशासन ने इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है।
राजनीतिक जगत में शोक: ममता बनर्जी और विपक्ष ने जताया गहरा दुख
आशीष बनर्जी के असामयिक निधन पर पश्चिम बंगाल के राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व ने इसे पार्टी और बंगाल की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि आशीष बनर्जी का जाना बीरभूम के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में एक ऐसा शून्य छोड़ गया है जिसे भरना असंभव होगा।
वहीं भारतीय जनता पार्टी, वाममोर्चा और कांग्रेस के नेताओं ने भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर पूर्व डिप्टी स्पीकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। विरोधी दलों के नेताओं ने कहा कि आशीष बनर्जी एक भद्रलोक राजनेता थे जिन्होंने हमेशा विपक्ष का भी सम्मान किया। एक अनुभवी शिक्षक, संवेदनशील जनप्रतिनिधि और सुलझे हुए राजनेता का इस तरह संदिग्ध परिस्थितियों में दुनिया छोड़ जाना समूचे समाज और राजनीति के लिए गहरे आत्ममंथन का विषय है।
girls globe