उत्तराखंड-हिमाचल में लैंडस्लाइड से थर्राए पहाड़, ओडिशा में महानदी के उफान से 10 जिले डूबे; IMD ने आज कई राज्यों में जारी किया रेड अलर्ट, जानिए अपने शहर के मौसम का हाल

देश के अधिकांश हिस्सों में मॉनसून 2026 अपने सबसे आक्रामक और विनाशकारी रूप में पहुंच चुका है। उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों से लेकर पूर्वी भारत के तटीय इलाकों तक कुदरत का कहर साफ देखा जा सकता है। जहां एक तरफ उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय अंचलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भयावह भूस्खलन (Landslides) ने पहाड़ों की नींव हिला दी है, वहीं दूसरी तरफ ओडिशा में बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने गहरे कम दबाव के क्षेत्र (Deep Depression) के चलते आई भीषण बाढ़ ने लाखों लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज भी देश के 15 से अधिक राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए कई जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है।

उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश का तांडव: चारधाम मार्ग बाधित और लैंडस्लाइड का खौफ

उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं दोनों ही मंडलों में पिछले 48 घंटों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचा रखी है। देहरादून, चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, नैनीताल और बागेश्वर जिलों में नदियां और बरसाती नाले खतरे के निशान के ऊपर बह रहे हैं। अलकनंदा, मंदाकिनी, भागीरथी और गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर को पार कर चुका है, जिससे निचले तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

पहाड़ों से लगातार बोल्डर और मलबा गिरने के कारण ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-58) और ऋषिकेश-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर अवरुद्ध हो गए हैं। भूस्खलन के कारण चारधाम यात्रा पर आए सैकड़ों तीर्थयात्री सुरक्षित पड़ावों पर फंसे हुए हैं। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संवेदनशील मार्गों पर रात के समय आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें संवेदनशील स्थानों पर लगातार मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को निकालने के राहत कार्य में जुटी हुई हैं।

हिमाचल प्रदेश में फ्लैश फ्लड का खौफ: नदियां उफान पर, 150 से अधिक सड़कें बंद

हिमाचल प्रदेश में भी मॉनसून का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। कुल्लू, मंडी, शिमला, सिरमौर और कांगड़ा जिलों में बादल फटने (Cloudburst) और अचानक आई बाढ़ (Flash Floods) जैसी स्थितियों ने स्थानीय प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ब्यास, सतलुज और रावी नदियों का तेज बहाव अपने साथ भारी मलबा लेकर आ रहा है, जिससे कई तटबंधों और पुलों को नुकसान पहुंचा है।

राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के अनुसार, भूस्खलन और सड़कों के धंसने के कारण प्रदेश की 150 से अधिक संपर्क सड़कें और दो राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात के लिए पूरी तरह बंद हैं। ग्रामीण इलाकों में बिजली के खंभे और पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त होने से सैकड़ों गांवों में ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन गई है। मौसम विभाग ने शिमला, कुल्लू और मंडी में अगले 24 घंटों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी करते हुए स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को नदियों, नालों और संवेदनशील ढलानों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है।

ओडिशा में बाढ़ का कहर: महानदी उफान पर, 10 से अधिक जिले जलमग्न

उत्तर के पहाड़ों से इतर पूर्वी भारत के तटीय राज्य ओडिशा में बाढ़ की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के तंत्र के कारण राज्य के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। महानदी, ब्राह्मणी और वैतरणी नदियों में पानी की भारी आवक के चलते संबलपुर स्थित हीराकुंड बांध (Hirakud Dam) के 20 से अधिक स्लुइस गेट खोल दिए गए हैं।

बांध से प्रति सेकंड लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण कटक, पुरी, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा और संबलपुर सहित 10 से अधिक निचले जिलों के गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। हजारों एकड़ उपजाऊ धान की फसलें जलमग्न हो गई हैं और सैकड़ों गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग टूट चुका है। ओडिशा सरकार ने प्रभावित जिलों में अलर्ट जारी करते हुए स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया है और तटीय बस्तियों से लोगों को सुरक्षित शेल्टर होम में शिफ्ट करने के लिए बोट्स और रेस्क्यू टीमों को तैनात किया है।

मैदानी इलाकों में भी बादलों का डेरा: दिल्ली-एनसीआर, यूपी और बिहार का हाल

मॉनसून ट्रफ रेखा अपनी सामान्य स्थिति से दक्षिण की ओर खिसककर सक्रिय बनी हुई है, जिसका सीधा असर उत्तर भारत के मैदानी राज्यों पर पड़ रहा है:

  • दिल्ली-एनसीआर: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे सटे नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद व फरीदाबाद में आज आसमान में घने बादल छाए रहेंगे। मौसम विभाग के अनुसार, रुक-रुक कर मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है। बारिश से तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी, लेकिन जलभराव के चलते सुबह और शाम के पीक आवर्स में ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

  • उत्तर प्रदेश: पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मॉनसून पूरी तरह सक्रिय है। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, बरेली और मेरठ समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट है। तराई के जिलों (लखीमपुर खीरी, बहराइच, पीलीभीत) में घाघरा और शारदा नदी के बढ़ते जलस्तर पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।

  • बिहार: बिहार के उत्तरी जिलों (अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, सुपौल) में भारी बारिश के कारण कोसी और बागमती नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में राज्य के कई हिस्सों में वज्रपात (ठनका) गिरने की प्रबल चेतावनी दी है और किसानों को खुले खेतों में न जाने की सलाह दी है।

आज का मौसम पूर्वानुमान: IMD ने किन राज्यों में जारी किया अलर्ट?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा वेदर बुलेटिन के अनुसार आज देश भर में मौसमी गतिविधियों का विभाजन इस प्रकार रहेगा:

  • रेड अलर्ट राज्य: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र, ओडिशा के तटीय एवं आंतरिक जिले, और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश (204 मिमी से अधिक) का रेड अलर्ट है।

  • ऑरेंज अलर्ट राज्य: हिमाचल प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेश, विदर्भ, कोंकण व गोवा (मुंबई समेत), और पश्चिम बंगाल में भारी से बहुत भारी बारिश (115 से 204 मिमी) का ऑरेंज अलर्ट रहेगा।

  • येलो अलर्ट राज्य: पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम, मेघालय और गुजरात में गरज-चमक के साथ मध्यम बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए मौसम विभाग की सख्त एडवाइजरी

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और मौसम विभाग ने आम जनता, विशेषकर पहाड़ी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  • पहाड़ों की गैर-जरूरी यात्रा से बचें: जब तक मौसम साफ न हो, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों की अनावश्यक यात्रा को पूरी तरह टाल दें।

  • नदी तटों और झरनों के पास सेल्फी न लें: अचानक जलस्तर बढ़ने और फ्लैश फ्लड के खतरे को देखते हुए किसी भी नदी, नाले या प्राकृतिक जलप्रपात के निकट न जाएं।

  • बिजली कड़कने के दौरान खुले में न रहें: बारिश और आकाशीय बिजली चमकने के समय ऊंचे पेड़ों, लोहे के खंभों या मोबाइल टावरों के नीचे शरण न लें; तुरंत पक्के मकानों में जाएं।

  • आधिकारिक वेदर अलर्ट्स पर नजर रखें: सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल मौसम विभाग (IMD), राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला प्रशासन के अधिकृत बुलेटिन का ही पालन करें।

मॉनसून की यह व्यापक सक्रियता जहां किसानों के लिए खरीफ फसलों के लिहाज से फायदेमंद साबित हो सकती है, वहीं पहाड़ों पर भूस्खलन और मैदानी-तटीय क्षेत्रों में बाढ़ के बढ़ते खतरे ने सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह हाई अलर्ट पर ला खड़ा किया है।