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‘दुनिया से जो मिलता है उससे बेहतर और सस्ता देना होगा…’, स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी का MSME और विनिर्माण क्षेत्र को बड़ा संदेश

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी दिल्ली स्थित लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था, विनिर्माण (Manufacturing) और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के भविष्य को लेकर एक बहुत ही महत्वपूर्ण और दूरदर्शी संदेश दिया है। प्रधानमंत्री ने देश के एमएसएमई और विनिर्माण क्षेत्र से स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्ष 2014 के बाद से भारत ने दुनिया के लगभग 40 प्रमुख देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं, लेकिन इन समझौतों का वास्तविक लाभ हमारे कारोबारियों और उद्योगों को तभी मिल पाएगा, जब वे वैश्विक स्तर पर उपलब्ध उत्पादों की तुलना में कहीं अधिक अच्छे और किफायती उत्पादों का निर्माण करेंगे।

एफटीए को बताया व्यापार का बड़ा अवसर, लुधियाना से तिरुपुर तक का किया जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को देश के औद्योगिक विकास के लिए एक सुनहरा अवसर करार देते हुए कहा कि पंजाब के लुधियाना से लेकर तमिलनाडु के तिरुपुर तक का वस्त्र (Textile) उद्योग पूरी दुनिया के बाजारों तक अपनी पहुंच बना सकता है। इसके अलावा, इन समझौतों के कारण केरल से लेकर गुजरात, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल तक के झींगा (Shrimp) निर्यात की संभावनाओं में भी भारी इजाफा हुआ है। प्रधानमंत्री ने देश के सभी एमएसएमई उद्योगों का आह्वान किया कि 40 देशों के साथ हुए ये एफटीए उनके व्यापार को कई गुना बढ़ाने का एक स्वर्णिम मौका लेकर आए हैं, जिसका भरपूर उपयोग किया जाना चाहिए।

गुणवत्ता और लागत में कमी पर दिया विशेष जोर

लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने एक बार फिर इस बात पर विशेष बल दिया कि यदि हमें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिकना है तो विनिर्माण की लागत को कम करना होगा और उत्पाद की गुणवत्ता (Quality) को सर्वोच्च स्तर पर ले जाना होगा। उन्होंने कहा कि हमें केवल अंतिम उत्पाद ही नहीं बल्कि छोटे-छोटे पार्ट्स का निर्माण भी देश के भीतर ही करना होगा, ताकि पूरी वैल्यू चेन भारत के पास ही सुरक्षित रहे। डिजाइनिंग से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक के हर चरण में भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक सबसे भरोसेमंद और मजबूत केंद्र बनना होगा। देश की निर्माण इकाइयों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने में सक्षम होना चाहिए, जो पूरी तरह से यूजर-फ्रेंडली हों और जिनकी पैकेजिंग अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार दुनिया भर के खरीदारों को आकर्षित करने वाली हो।

निर्यात में दहाई अंक की बढ़ोतरी और एमएसएमई की भूमिका

विदेश व्यापार के जानकारों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों के दौरान देश के निर्यात (Export) में दर्ज की गई दहाई अंक की जोरदार बढ़ोतरी इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि दुनिया भर के बाजारों में भारतीय वस्तुओं की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। यह सब केवल भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता में हुए सुधार के कारण ही संभव हो सका है। वर्तमान में अमेरिका, चीन, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, जर्मनी और फ्रांस जैसे विकसित देशों में भारतीय सामानों का निर्यात लगातार बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक मंच पर ‘मेड इन इंडिया’ की ब्रांडिंग और मजबूत हुई है। चूंकि देश के कुल निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत का बहुमूल्य योगदान अकेले एमएसएमई सेक्टर का है, इसलिए प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विशेष रूप से एमएसएमई को संबोधित किया, क्योंकि विनिर्माण क्षेत्र के बढ़ने से देश में रोजगार के नए अवसरों का भी बड़े पैमाने पर सृजन होता है।

दुनिया के प्रमुख देशों के साथ हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते

बीते कुछ वर्षों के दौरान भारत ने दुनिया के तमाम प्रमुख और प्रभावशाली देशों के साथ रणनीतिक एफटीए समझौते किए हैं। इस सूची में ऑस्ट्रेलिया, यूएई, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और ओमान जैसे देश प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही, यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ भी आगामी वर्ष से एफटीए के पूरी तरह अमल में आने की पूरी संभावना है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भी भारत का व्यापारिक एफटीए दस्तावेज पूरी तरह से तैयार हो चुका है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को एक नई वैश्विक ऊंचाई प्रदान करेगा।