
केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें इस समय पूरी तरह से 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर टिकी हुई हैं। देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारी इस बात का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि नए वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों के बाद उनकी बेसिक सैलरी में कितना बंपर इजाफा होगा। विभिन्न कर्मचारी यूनियनों और जानकारों के अनुमानों के मुताबिक, इस बार न्यूनतम बेसिक पे 30,000 रुपये या उससे भी अधिक होने की मजबूत संभावना जताई जा रही है। सैलरी में यह बढ़ोतरी पूरी तरह से फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) के फार्मूले पर तय होगी, जिसे लेकर हर तरफ चर्चाओं का बाजार गर्म है।
80 सालों का सफर: 55 रुपये से शुरू होकर 18,000 रुपये तक पहुंचा न्यूनतम मूल वेतन
क्या आप जानते हैं कि भारत में जब से वेतन आयोग के गठन की शुरुआत हुई है, तब से लेकर अब तक सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे में कितना बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव आ चुका है? आज जिस न्यूनतम बेसिक सैलरी की शुरुआत सीधे 18,000 रुपये से होती है, उसका यह पूरा सफर आज से करीब 80 साल पहले मात्र 55 रुपये महीने से शुरू हुआ था। समय-समय पर देश में गठित विभिन्न वेतन आयोगों ने देश की आर्थिक स्थिति और महंगाई को ध्यान में रखते हुए सरकारी कर्मचारियों के वेतनमान में संशोधन किए, जिसके कारण न्यूनतम बेसिक पे में लगातार भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सभी वेतन आयोगों के इतिहास पर एक नजर
भारत की स्वतंत्रता के बाद से अब तक सात वेतन आयोग अपनी रिपोर्ट सौंप चुके हैं और कर्मचारियों का वेतन तय कर चुके हैं:
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पहला वेतन आयोग (1946-47): इस दौरान न्यूनतम बेसिक पे मात्र 55 रुपये और अधिकतम 2,000 रुपये तय की गई थी।
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दूसरा वेतन आयोग (1957-59): इस आयोग की सिफारिशों के बाद न्यूनतम मूल वेतन बढ़कर 80 रुपये और अधिकतम 3,000 रुपये हो गया था।
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तीसरा वेतन आयोग (1972-73): इसमें न्यूनतम बेसिक पे को बढ़ाकर 196 रुपये और अधिकतम 3,500 रुपये किया गया।
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चौथा वेतन आयोग (1983-86): इस आयोग के लागू होने पर न्यूनतम वेतन में बड़ा उछाल आया और यह 750 रुपये तथा अधिकतम 8,000 रुपये पहुंच गया।
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पांचवां वेतन आयोग (1994-97): इसके तहत न्यूनतम मूल वेतन 2,550 रुपये और अधिकतम 26,000 रुपये निर्धारित किया गया था।
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छठा वेतन आयोग (2006-08): इस आयोग के प्रभावी होने पर न्यूनतम बेसिक पे सीधे छलांग लगाकर 7,000 रुपये और अधिकतम 80,000 रुपये हो गई थी।
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सातवां वेतन आयोग (2014-16): वर्तमान में लागू इस सातवें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये और अधिकतम 2.25 लाख रुपये (जबकि कैबिनेट सचिव के लिए 2.50 लाख रुपये) तय किया गया है।
कब से लागू होगा 8वां वेतन आयोग और क्या हो सकती है नई बेसिक सैलरी?
नियमों और सैद्धांतिक रूप से 8वां केंद्रीय वेतन आयोग 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी माना जा रहा है, हालांकि इसे जमीनी स्तर पर लागू करने और कर्मचारियों के खातों में बढ़ा हुआ वेतन आने की अंतिम तिथि इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग अपनी आधिकारिक रिपोर्ट सरकार को कब सौंपता है और केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इसे कब मंजूरी मिलती है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के अंतर्गत न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये है, लेकिन यदि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को बेहतर रखा जाता है, तो न्यूनतम मूल वेतन 30,000 रुपये के आंकड़े को आसानी से पार कर जाएगा।
संभावित फिटमेंट फैक्टर और अनुमानित सैलरी गणित
विशेषज्ञों और विभिन्न अनुमानित गणनाओं के अनुसार, यदि 1.92 का फिटमेंट फैक्टर लगाया जाता है तो न्यूनतम बेसिक पे बढ़कर लगभग 34,560 रुपये हो सकती है। वहीं, यदि इसे बढ़ाकर 2.28 किया जाता है तो यह करीब 41,040 रुपये तक पहुंच सकती है। इसके अलावा, 2.57 के फिटमेंट फैक्टर पर यह राशि लगभग 46,260 रुपये और 2.86 के उच्च फैक्टर पर लगभग 51,480 रुपये तक भी संभव है। हालांकि, यह सभी आंकड़े फिलहाल कयासों और संभावित गणित पर आधारित हैं, और वास्तविक वेतन की स्थिति 8वें वेतन आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह से साफ हो सकेगी।
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