Saturday , August 15 2026

क्या आप बच्चे को सही तरीके से करा रही हैं स्तनपान? जानिए मां और शिशु के लिए सबसे सुरक्षित और आरामदायक पोजीशंस

शिशु के जन्म के बाद का शुरुआती दौर मां और बच्चे दोनों के लिए ही बहुत संवेदनशील और भावनात्मक होता है। इस दौरान एक नवजात शिशु के शारीरिक विकास, मानसिक वृद्धि और मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए मां का दूध किसी अमृत से कम नहीं माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे के पहले छह महीनों तक उसे केवल और केवल स्तनपान ही कराना चाहिए। हालांकि, बहुत सी नई माताओं के मन में हमेशा यह सवाल और उलझन बनी रहती है कि क्या वे अपने बच्चे को सही तरीके से दूध पिला रही हैं या नहीं। स्तनपान कराने का सही तरीका न केवल बच्चे के पेट को आसानी से भरने में मदद करता है, बल्कि मां को पीठ दर्द, स्तन में सूजन और क्रैक निप्पल जैसी समस्याओं से भी बचाता है। यदि आप भी एक नई मां हैं या जल्द ही मां बनने वाली हैं, तो स्तनपान कराने की सही पोजीशंस और वैज्ञानिक तरीकों की यह विस्तृत जानकारी आपके और आपके नन्हे शिशु के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। आइए जानते हैं कि बच्चे को दूध पिलाने की कौन सी पोजीशन सबसे बेस्ट और आरामदायक मानी जाती है।

स्तनपान का सही तरीका और ‘लैचिंग’ का महत्व

बच्चे को दूध पिलाने की प्रक्रिया में सबसे पहला और महत्वपूर्ण चरण ‘लैचिंग’ (Latching) यानी बच्चे द्वारा मां के स्तन को सही ढंग से मुंह में पकड़ना होता है। यदि बच्चे की लैचिंग सही नहीं है, तो उसे पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं मिल पाएगा और मां को भी अत्यधिक दर्द व तकलीफ का सामना करना पड़ेगा। सही लैचिंग के लिए यह जरूरी है कि बच्चा केवल निप्पल को ही न पकड़े, बल्कि निप्पल के आसपास के काले हिस्से (Areola) का अधिकांश भाग उसके मुंह के अंदर होना चाहिए। बच्चे का निचला होंठ बाहर की तरफ मुड़ा हुआ होना चाहिए और उसकी ठुड्डी (Chin) मां के स्तन से सटकी होनी चाहिए। जब बच्चा इस सही पोजीशन में दूध चुंबन करता है, तो उसे दूध आसानी से प्राप्त होता है और स्तनपान का यह सफर दोनों के लिए बेहद सुकून भरा बन जाता है।

पहली बेस्ट पोजीशन: क्रैडल होल्ड (Cradle Hold), पारंपरिक और सबसे लोकप्रिय तरीका

क्रैडल होल्ड स्तनपान कराने की सबसे पुरानी, आम और पारंपरिक पोजीशन है, जिसे ज्यादातर माताएं सहज रूप से अपनाती हैं। इस पोजीशन में मां आराम से किसी चेयर या बेड पर सीधी बैठकर अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखती है। जिस तरफ से बच्चे को दूध पिलाना होता है, मां अपनी उसी तरफ की बांह के मोड़ पर बच्चे का सिर टिकाती है और उसका शरीर अपनी गोद में सीधा रखती है। बच्चे का पेट मां के पेट से सटा हुआ होना चाहिए ताकि उसे किसी प्रकार की असहजता न हो। यह पोजीशन उन स्वस्थ और पूर्ण विकसित नवजात शिशुओं के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है जो अच्छी तरह से लैच करना सीख चुके हैं। इसके अलावा यह मां और बच्चे के बीच आई कॉन्टैक्ट और भावनात्मक जुड़ाव को भी और अधिक गहरा करती है।

दूसरी बेस्ट पोजीशन: क्रॉस-क्रैडल होल्ड (Cross-Cradle Hold), नए जन्मे शिशुओं के लिए वरदान

यदि आपका शिशु अभी बहुत छोटा है, समय से पहले जन्मा है (Premature) या उसे ठीक से स्तन पकड़ने यानी लैच करने में कठिनाई आ रही है, तो क्रॉस-क्रैडल होल्ड आपके लिए सबसे बेस्ट विकल्प है। इस पोजीशन में मां क्रैडल होल्ड से विपरीत हाथ का उपयोग करती है। यानी यदि आप बाएं स्तन से दूध पिला रही हैं, तो अपने दाहिने हाथ से बच्चे के सिर और गर्दन को पीछे से संभालती हैं और बाएं हाथ से स्तन को नीचे से सपोर्ट देती हैं। इस पोजीशन का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इसमें मां को बच्चे के सिर पर पूरा नियंत्रण मिलता है, जिससे वह आसानी से बच्चे के चेहरे को सही एंगल पर लाकर स्तन से जोड़ सकती है। शुरुआती हफ्तों में जब बच्चा दूध पीना सीख रहा होता है, तब यह पोजीशन डॉक्टरों और लैक्टेशन कंसल्टेंट्स द्वारा सबसे ज्यादा रिकमेंड की जाती है।

तीसरी बेस्ट पोजीशन: फुटबॉल होल्ड (Football Hold), सिजेरियन डिलीवरी के बाद है बेहद आरामदायक

कई माताओं की डिलीवरी सिजेरियन (C-Section) के जरिए होती है, जिसके बाद पेट के टांकों पर दबाव पड़ने के कारण उन्हें सामान्य तरीके से बैठने और बच्चे को संभालने में काफी दर्द और परेशानी महसूस होती है। ऐसे में फुटबॉल होल्ड पोजीशन उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस पोजीशन में बच्चे को अपनी बांह पर इस तरह से रखा जाता है जैसे कोई फुटबॉल या हैंडबैग पकड़े हुए हो। बच्चे के पैर आपकी कोहनी के पीछे की तरफ होते हैं और उसका सिर आपके हाथों की हथेलियों पर सामने की ओर होता है। इस पोजीशन में बच्चे का वजन आपके पेट और टांकों पर बिल्कुल नहीं पड़ता है, जिससे सिजेरियन ऑपरेशन के बाद रिकवर कर रही माताओं को स्तनपान कराते समय दर्द का अहसास नहीं होता है। इसके अलावा जुड़वां बच्चों (Twins) को एक साथ दूध पिलाने के लिए भी यह पोजीशन सबसे बेहतरीन मानी जाती है।

चौथी बेस्ट पोजीशन: साइड-लियिंग पोजीशन (Side-Lying Position), रात के समय और आराम के लिए बेस्ट

रात के समय जब नींद पूरी नहीं होती और बार-बार उठकर बैठना मां के लिए थका देने वाला काम होता है, तब साइड-लियिंग या करवट लेकर लेटने वाली पोजीशन सबसे अधिक आरामदायक साबित होती है। इस पोजीशन में मां और बच्चा दोनों बिस्तर पर करवट लेकर आमने-सामने लेट जाते हैं। मां अपना एक हाथ सिर के नीचे या तकिए के सहारे रखती है और दूसरे हाथ से बच्चे को अपनी तरफ हल्का सा सटाकर दूध पिलाती है। यह पोजीशन उन माताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जिन्हें कठिन प्रसव के बाद बैठने में अत्यधिक शारीरिक कमजोरी या दर्द महसूस होता है। हालांकि, इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि दूध पिलाते समय बच्चे की नाक के पास कोई चादर या तकिया न आए जिससे उसकी सांस लेने में रुकावट हो।

स्तनपान के दौरान इन छोटी-छोटी बातों का रखें विशेष ध्यान

सही पोजीशन चुनने के साथ-साथ कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना भी एक मां के लिए बहुत जरूरी है। स्तनपान कराते समय हमेशा अपने शरीर को रिलैक्स रखें और अपनी पीठ के पीछे एक अच्छा कुशन या तकिया जरूर लगाएं ताकि आपकी रीढ़ की हड्डी पर जोर न पड़े। बच्चे को दूध पिलाने के बाद उसे डकार (Burp) जरूर दिलाएं ताकि उसके पेट में गई हुई हवा बाहर निकल सके और उसे गैस या पेट दर्द की समस्या न हो। यदि आपको स्तनपान के दौरान किसी भी प्रकार की गंभीर समस्या, लगातार दर्द या दूध उतरने में दिक्कत आ रही है, तो किसी योग्य डॉक्टर या लैक्टेशन एक्सपर्ट से सलाह लेने में बिल्कुल संकोच न करें। एक सहज और सही स्तनपान प्रक्रिया न केवल बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करती है, बल्कि मातृत्व के इस खूबसूरत सफर को और अधिक आनंदमय बनाती है।