
भारत के रक्षा बलों में अधिकारी (Officer) बनकर देश सेवा करने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC द्वारा आयोजित की जाने वाली एनडीए परीक्षा सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित जरिया मानी जाती है। हालांकि, अक्सर 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी कर रहे या पास कर चुके विद्यार्थियों के मन में यह बड़ा सवाल रहता है कि फॉर्म भरते समय NDA और NA का विकल्प क्यों होता है और इन दोनों में असल अंतर क्या है? यदि आप भी सेना में जाने की इच्छा रखते हैं और इन दोनों के बीच का फर्क समझना चाहते हैं, तो यह विस्तृत गाइड आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। आइए जानते हैं कि एनडीए और एनए क्या हैं, इनके बीच क्या अंतर है और 12वीं के तुरंत बाद छात्र किस प्रकार सेना के इन प्रतिष्ठित विंग्स में प्रवेश पाकर अपना शानदार करियर बना सकते हैं।
क्या है NDA और NA का पूरा मतलब और इनका संक्षिप्त परिचय
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि इन दोनों शब्दों का पूरा नाम क्या है। NDA का पूरा नाम नेशनल डिफेंस एकेडमी (National Defence Academy) है, जबकि NA का पूरा नाम नेवल एकेडमी (Naval Academy – 10+2 Cadet Entry Scheme) है। यूपीएससी (UPSC) द्वारा साल में दो बार राष्ट्रीय स्तर पर एनडीए और एनए की संयुक्त परीक्षा आयोजित की जाती है। परीक्षा का पैटर्न, प्रश्न पत्र और चयन प्रक्रिया दोनों के लिए बिल्कुल एक समान होती है, लेकिन दोनों के माध्यम से मिलने वाली ट्रेनिंग और आगे की सर्विस विंग में बुनियादी अंतर होता है। जो छात्र सेना, नौसेना या वायु सेना में जाना चाहते हैं, वे इसी एक साझा परीक्षा के जरिए अपनी योग्यता और वरीयता (Preference) के आधार पर चयन की प्रक्रिया में भाग लेते हैं।
NDA और NA में मुख्य अंतर: विंग्स और ट्रेनिंग का फर्क
अब बात करते हैं कि इन दोनों विकल्पों में मुख्य अंतर कहां आता है। जब कोई छात्र एनडीए (NDA) चुनता है, तो उसे पुणे के खड़कवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी में ट्रेनिंग दी जाती है। यहां से ट्रेनिंग पूरी होने के बाद कैडेट्स को उनकी पसंद और मेरिट के अनुसार भारतीय थल सेना (Indian Army), भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) या फिर भारतीय नौसेना (Indian Navy) के विंग में भेजा जाता है। इसके विपरीत, जब कोई छात्र विशेष रूप से एनए (NA – Naval Academy) का विकल्प चुनता है, तो उसकी शुरुआती और विशेषीकृत ट्रेनिंग केरल के एझिमला स्थित प्रतिष्ठित इंडियन नेवल एकेडमी (INEA) में होती है। नेवल एकेडमी के माध्यम से केवल और केवल भारतीय नौसेना (Indian Navy) के एक्जीक्यूटिव ब्रांच में 10+2 कैडेट एंट्री स्कीम के तहत पक्के तौर पर अधिकारी के रूप में कमिशन दिया जाता है।
12वीं के बाद सेना में अफसर बनने की पूरी चयन प्रक्रिया
भारतीय सशस्त्र बलों में 12वीं कक्षा के बाद प्रवेश पाने की यह प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और अनुशासित होती है। इसके लिए सबसे पहले उम्मीदवार को यूपीएससी की एनडीए एवं एनए परीक्षा के लिए आवेदन करना होता है। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए शैक्षणिक योग्यता यह है कि छात्र ने किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा पास की हो। एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि यदि आप एयरफोर्स या नेवल विंग में जाना चाहते हैं, तो आपके 12वीं में फिजिक्स और मैथमेटिक्स विषय होने अनिवार्य हैं, जबकि आर्मी विंग के लिए किसी भीिता प्राप्त स्ट्रीम (आर्ट्स, कॉमर्स या साइंस) से 12वीं पास छात्र आवेदन कर सकता है। परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवारों को देश के सबसे कठिन और प्रतिष्ठित SSB (Services Selection Board) इंटरव्यू के पांच दिवसीय दौर से गुजरना पड़ता है, जिसमें मानसिक, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक परीक्षण किया जाता है।
मेडिकल फिटनेस, ट्रेनिंग और करियर का सुनहरा भविष्य
एसएसबी इंटरव्यू और मेडिकल जांच में पूरी तरह से फिट पाए जाने वाले होनहार युवाओं को अंतिम मेरिट लिस्ट के आधार पर अकादमियों में प्रवेश मिलता है। एनडीए या एनए में चयनित होने के बाद कैडेट्स को लगभग 3 से 4 साल की बेहद कठिन और उच्च स्तर की संयुक्त सैन्य और शैक्षणिक ट्रेनिंग दी जाती है। इस दौरान कैडेट्स को ग्रेजुएशन की डिग्री (जैसे B.Sc., B.A., या B.Tech) भी देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के समन्वय से प्रदान की जाती है। ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद कैडेट्स को भारतीय सेना में ‘Lieutenant’ या समकक्ष रैंक के साथ परमानेंट कमीशन अधिकारी के रूप में तैनात किया जाता है। यह करियर न केवल आपको समाज में मान-सम्मान और एक बेहतरीन जीवनशैली देता है, बल्कि देश की अखंडता की रक्षा करने का अप्रतिम अवसर भी प्रदान करता है।
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