
भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) ने पिछले 35 वर्षों में एक बेहद रोमांचक, उतार-चढ़ाव से भरा और ऐतिहासिक सफर तय किया है। साल 1986 में जब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स (Sensex) लॉन्च हुआ था, तब शायद ही किसी ने सोचा था कि यह बाजार कभी देश की रीढ़ और आम आदमी के सपनों की उड़ान बनेगा। शुरुआती दौर से लेकर आज 2026 के आधुनिक दौर तक, दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) ने कई बड़े आर्थिक बदलाव, ऐतिहासिक तेजी, और काले अध्यायों को अपनी आंखों से देखा है। इस लंबी यात्रा में भारतीय資本 बाजार ने न केवल वैश्विक झटकों का सामना किया, बल्कि खुद को तकनीकी रूप से बेहद मजबूत भी बनाया है।
1991 के आर्थिक सुधार और सेंसेक्स का आगाज
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में साल 1991 एक मील का पत्थर साबित हुआ। देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा लाई गई नई आर्थिक नीति (LPG Policy – Liberalization, Privatization, and Globalization) ने भारतीय अर्थव्यवस्था के बंद दरवाजों को पूरी दुनिया के लिए खोल दिया। विदेशी निवेश (FII) के रास्ते खुले और भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने का अवसर मिला। इस उदारीकरण की लहर ने शेयर बाजार में नई ऊर्जा फूंक दी। सेंसेक्स जो अपनी शुरुआत के वक्त काफी निचले पायदान पर था, वह आर्थिक सुधारों की हवा मिलते ही तेजी से ऊपर चढ़ने लगा। निवेशकों और आम जनता के बीच शेयर बाजार को लेकर एक नया उत्साह पैदा होने लगा था, लेकिन इस तेजी के पीछे कुछ ऐसा पक रहा था जो आगे चलकर देश के वित्तीय इतिहास को हिलाकर रख देने वाला था।
हर्षद मेहता घोटाला 1992: जब दलाल स्ट्रीट पर आया भूचाल
साल 1992 भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे काला और सनसनीखेज साल बन गया। इस दौर में एक साधारण ब्रोकर से ‘द बिग बुल’ बने हर्षद मेहता ने अपनी चालाकी और बैंकिंग प्रणाली के सिस्टम loopholes का फायदा उठाकर शेयर बाजार में पैसों की बाढ़ ला दी। हर्षद मेहता ने बैंक रिसीप्ट (BR) और रेडी फॉरवर्ड डील्स के जरिए बैंकिंग सिस्टम से भारी-भरकम रकम निकालकर सीधे स्टॉक मार्केट में झोंक दी, जिससे एसीसी (ACC) जैसी कंपनियों के शेयर आसमान छूने लगे। बाजार में कृत्रिम तेजी का ऐसा दौर आया कि आम निवेशक अंधी दौड़ में शामिल हो गए। लेकिन 23 अप्रैल 1992 को पत्रकार सुचेता दलाल ने द टाइम्स ऑफ इंडिया में एक रिपोर्ट के जरिए इस साढ़े चार हजार करोड़ रुपये के महार्स घोटाले का पर्दाफाश कर दिया। इस खुलासे के बाद बाजार धड़ाम हो गया, लाखों निवेशकों की गाढ़ी कमाई डूब गई और हर्षद मेहता सलाखों के पीछे चला गया, जिससे पूरे देश में वित्तीय तंत्र की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए।
डॉट-कॉम क्रैश से लेकर 2008 की वैश्विक मंदी तक की चुनौतियां
हर्षद मेहता स्कैम के बाद भारतीय शेयर बाजार ने कई कड़े सबक सीखे और रेगुलेटर को मजबूत करने के लिए साल 1992 में ही सेबी (SEBI – Securities and Exchange Board of India) को वैधानिक ताकतें दी गईं। इसके बावजूद बाजार के लिए रास्ते आसान नहीं थे। नए millennium की शुरुआत में ग्लोबल स्तर पर आया ‘डॉट-कॉम बबल क्रैश’ (Dot-Com Crash) ने टेक्नोलॉजी शेयरों की हवा निकाल दी, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। अभी बाजार इस झटके से संभल ही रहा था कि साल 2008 में दुनिया ने ‘ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस’ (Global Financial Crisis) का सामना किया। अमेरिकी हाउसिंग मार्केट और लेहमैन ब्रदर्स के पतन ने भारतीय बाजार को बुरी तरह झकझोर दिया। सेंसेक्स एक ही झटके में अपनी आधी से ज्यादा ऊंचाई खो बैठा। विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से अपना पैसा तेजी से निकालना शुरू कर दिया, जिससे चारों तरफ निराशा का माहौल छा गया था।
कोविड-19 महामारी और बाजार का नया ऐतिहासिक पुनरुत्थान
समय का पहिया आगे बढ़ा और साल 2020 में आई कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी ने एक बार फिर पूरी दुनिया को ठप कर दिया। मार्च 2020 में जब लॉकडाउन लगा, तो भारतीय शेयर बाजार में कुछ ही दिनों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई, जिसे सर्किट ब्रेकर तक का सामना करना पड़ा। निवेशकों को लगा कि शायद 2008 जैसी मंदी लौट आई है। लेकिन इस बार रिकवरी उतनी ही हैरान करने वाली थी जितनी गिरावट तेज थी। सरकार के आर्थिक पैकेजों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और सबसे बढ़कर भारत के घरेलू खुदरा निवेशकों (Retail Investors) की फौज ने बाजार का रुख बदल दिया। डीमैट खातों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई। SIP (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के कल्चर ने देश के छोटे-छोटे शहरों से लेकर गांवों तक के युवाओं को शेयर बाजार से जोड़ा, जिससे बाजार को एक घरेलू सुरक्षा कवच मिल गया।
2024 से 2026 तक: नए शिखर और आधुनिक जेनेरेटेक एरा का बाजार
वर्ष 2024 में भारतीय सेंसेक्स ने अपनी ऐतिहासिक यात्रा तय करते हुए पहली बार 80,000 के जादुई आंकड़े को पार किया, जो देश की मजबूत होती आर्थिक स्थिति और कॉर्पोरेट सेक्टर के विस्तार की गवाही देता है। आज साल 2026 तक पहुंचते-पहुंचते भारतीय शेयर बाजार दुनिया के सबसे गतिशील बाजारों में शुमार हो चुका है। अब पारंपरिक ट्रेडिंग के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग (Algo Trading), और आधुनिक Generative Engine Optimization आधारित वित्तीय विश्लेषणों ने निवेशकों का गेम बदल दिया है। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं समय-समय पर बाजार को डराती हैं, लेकिन 1986 के 550 अंकों से शुरू होकर 2026 तक का यह 35 साल लंबा सफर इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि भारतीय शेयर बाजार हर बड़ी मंदी को चीरकर नई ऊंचाइयों को छूने का माद्दा रखता है।
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