
देशभर के वकीलों, लीगल प्रोफेशन और कानूनी शिक्षा को नियंत्रित करने वाली देश की सर्वोच्च संस्था ‘बार काउंसिल ऑफ इंडिया’ (Bar Council of India – BCI) इन दिनों अपने एक कड़े फैसले और विवाद के चलते काफी सुर्खियों में है। हैदराबाद की प्रतिष्ठित एनएएलएसएआर (NALSAR) यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को लेकर उपजे छात्रों के विरोध के बाद BCI ने सीधे तौर पर कार्रवाई करते हुए चर्चा का केंद्र बिंदु बन गई है। आइए जानते हैं कि आखिर बार काउंसिल ऑफ इंडिया क्या है, इसका गठन कैसे होता है, इसके अधिकार क्या हैं और यह संस्था अचानक चर्चा में क्यों आ गई है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) क्या है और इसका गठन कैसे होता है?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया भारत में वकीलों, विधिक शिक्षा और कानून के पेशे की शीर्ष नियामक संस्था (Apex Regulatory Body) है। इसका गठन और संरचना मुख्य रूप से ‘अधिवक्ता अधिनियम, 1961’ (Advocates Act, 1961) के प्रावधानों के तहत की जाती है। BCI के सदस्य सीधे तौर पर देश की अलग-अलग राज्य बार काउंसिलों द्वारा चुने जाते हैं। हर राज्य बार काउंसिल अपने सदस्यों में से प्रतिनिधियों को BCI के लिए चुनती है। इसके अलावा, देश के अटॉर्नी जनरल (Attorney General) और सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) इस काउंसिल के पदेन (Ex-officio) सदस्य होते हैं।
जब BCI के सभी सदस्य चुनकर आ जाते हैं, तो वे आपस में बहुमत के आधार पर एक सदस्य को अध्यक्ष (Chairman) और एक को उपाध्यक्ष (Vice-Chairman) के रूप में चुनते हैं। इन दोनों का कार्यकाल दो वर्षों का होता है, जिसके बाद दोबारा चुनाव की प्रक्रिया होती है। ऐतिहासिक रूप से देखें तो ब्रिटिश काल में उच्च न्यायालयों के अधीन नियमन व्यवस्था थी, लेकिन बाद में एस.आर. दास समिति (ऑल इंडिया बार कमिटी, 1951) की सिफारिशों के आधार पर संसद ने 1961 में अधिवक्ता अधिनियम पारित किया, जिसके तहत आधुनिक BCI का औपचारिक गठन हुआ।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के मुख्य कार्य और अधिकार क्या हैं?
BCI के पास देश की कानूनी व्यवस्था और वकीलों को लेकर व्यापक विधिक अधिकार होते हैं। इसके मुख्य कार्यों और अधिकारों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
-
कानूनी शिक्षा का मानक तय करना: देश भर के लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का स्तर क्या हो, पाठ्यक्रम में किन विषयों को शामिल किया जाए और लॉ डिग्रेटियों को मान्यता देना BCI का मुख्य काम है।
-
वकीलों का पंजीकरण: यह देश में वकीलों के नामांकन और राज्य बार काउंसिलों के कामकाज की निगरानी करने के साथ-साथ अखिल स्तर पर नियम बनाता है।
-
व्यावसायिक नैतिकता और आचार संहिता: अदालतों में गरिमा और अनुशासन बनाए रखने के लिए वकीलों के आचरण और नियमों को तय करने का अधिकार इसी संस्था के पास है।
-
अनुशासनात्मक कार्रवाई: यदि कोई वकील अपने पेशे के नियमों का गंभीर उल्लंघन करता है या दुराचार में लिप्त पाया जाता है, तो BCI के पास उसकी वकालत का लाइसेंस निलंबित या रद्द करने की पूर्ण शक्ति होती है। इसके अलावा यह वकीलों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं भी संचालित करती है।
हाल ही में NALSAR यूनिवर्सिटी विवाद के कारण क्यों चर्चा में आई BCI?
हाल के दिनों में BCI के सुर्खियों में आने की मुख्य वजह हैदराबाद की प्रतिष्ठित एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ (NALSAR) के छात्रों और प्रशासन के बीच हुआ वैचारिक मतभेद है। यूनिवर्सिटी के आगामी दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को आमंत्रित किया गया था। यूनिवर्सिटी के छात्रों के एक वर्ग ने इस आमंत्रण का विरोध करते हुए एक खुला पत्र जारी किया।
छात्रों का तर्क था कि हाल ही में जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ज्यादतियों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर उनकी असहमति है, इसलिए संस्था को ऐसे समय में अतिथि चयन को लेकर संवेदनशील होना चाहिए। इस विरोध और पत्र के बाद मामला काफी तूल पकड़ गया।
BCI का सख्त फरमान और उसके बाद हुआ संशोधन
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने आक्रामक रुख अपनाते हुए एक सर्कुलर जारी कर दिया। BCI ने सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि वे NALSAR के 2026 बैच के पास आउट होने वाले छात्रों का वकील के रूप में नामांकन तब तक रोक कर रखें जब तक अगला आदेश नहीं आता। काउंसिल का तर्क था कि इस तरह के अभियानों से न्यायिक संस्थाओं की गरिमा प्रभावित होती है, जिसे पेशेवर अनुशासनहीनता माना जाएगा। हालांकि, इस मनमाने आदेश की चौतरफा तीखी आलोचना और विरोध होने के बाद BCI ने कुछ ही घंटों में अपने इस आदेश को संशोधित कर दिया और बाद में पूरी कार्रवाई बंद करने की घोषणा कर दी।
girls globe