12 राज्यों में कुदरत का कहर: स्वतंत्रता दिवस से पहले उत्तराखंड-हिमाचल में भारी तबाही

देश भर में 79वें स्वतंत्रता दिवस के जश्न की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, लेकिन इस बीच कुदरत का कड़ा इम्तिहान भी जारी है। देश के 12 से अधिक राज्यों में मानसून इस समय अपने विकराल रूप में नजर आ रहा है। उत्तर भारत से लेकर मध्य और पूर्वी भारत तक मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह पटरी से उतार दिया है। सबसे भयावह स्थिति पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बनी हुई है, जहां लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और कई स्थानों पर पहाड़ों के खिसकने से राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो चुके हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज यानी 14 अगस्त के लिए कई राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए रेड और ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है।

स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच देश भर में मानसून का तांडव

स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर जहां स्कूलों, सरकारी दफ्तरों और लाल किले से लेकर राज्यों की राजधानियों तक में परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रिहर्सल चल रही है, वहीं आसमान से बरसती आफत ने चिंता बढ़ा दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के तटीय क्षेत्रों में बना गहरा दबाव (Depression) धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है, जिससे मैदानी और पहाड़ी इलाकों में मानसूनी हवाएं बेहद सक्रिय हो गई हैं। इस मौसमी तंत्र के असर से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर दक्षिण के तटीय क्षेत्रों तक बादलों का डेरा जमा हुआ है और रह-रहकर तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो रही है।

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन से तबाही, नदियां खतरे के निशान के पार

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मानसून की मार सबसे खतरनाक साबित हो रही है। हिमाचल प्रदेश के शिमला, मंडी, कुल्लू और चंबा जिलों में जगह-जगह लैंडस्लाइड होने की खबरें सामने आ रही हैं, जिसके चलते सैकड़ों सड़कें संपर्क मार्गों से कट गई हैं। मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के कुछ संवेदनशील इलाकों में आज अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। व्यास और सतलुज नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की हिदायत दी गई है।

उधर, उत्तराखंड के चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों में स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। केदारनाथ और बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मलबा आने से यातायात बार-बार प्रभावित हो रहा है। ऋषिकेश में गंगा नदी खतरे के निशान के पास बह रही है। स्थानीय प्रशासन ने नदी तटों के पास अलर्ट जारी किया है और पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं को भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की ओर न जाने की सख्त सलाह दी है।

दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा-पंजाब में जलभराव का संकट

देश की राजधानी दिल्ली और इससे सटे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम व फरीदाबाद में भी आज सुबह से ही आसमान में काले बादलों का जमावड़ा बना हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और चंडीगढ़ में 14 और 15 अगस्त के दौरान मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। 15 अगस्त को लाल किले पर होने वाले मुख्य समारोह को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस और नगर निगम जलभराव से निपटने के लिए विशेष इंतजाम कर रहे हैं। हरियाणा और पंजाब के कई जिलों में भी बिजली कड़कने और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है।

उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में भारी बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट

उत्तर प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में मानसून की सक्रियता लगातार बनी हुई है। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज और आगरा समेत कई जिलों में रुक-रुक कर मूसलाधार बारिश हो रही है। आईएमडी ने उत्तर प्रदेश में 14 अगस्त से 18 अगस्त तक बारिश का सिलसिला जारी रहने का पूर्वानुमान व्यक्त किया है, जिसमें तराई इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने का भी भारी खतरा जताया गया है।

बिहार और मध्य प्रदेश की बात करें तो मध्य प्रदेश के पूर्वी जिलों और छत्तीसगढ़ में भारी से बेहद भारी बारिश के आसार हैं। छत्तीसगढ़ में भारी तबाही मचाने वाली बारिश की आशंका को देखते हुए हाई अलर्ट पर रहने को कहा गया है। वहीं बिहार के पटना, गया और भागलपुर में अगले 48 घंटों के दौरान मध्यम से भारी वर्षा हो सकती है। झारखंड और ओडिशा में भी साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से नदियों के उफान में आने का खतरा मंडरा रहा है।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी चक्रवाती बारिश का दौर

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों—असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और त्रिपुरा में भी कुदरत का मिजाज काफी सख्त बना हुआ है। ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर बढ़ने से कई ग्रामीण क्षेत्र जलमग्न हो चुके हैं। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल और सिक्किम के उप-हिमालयी क्षेत्रों में तेज आंधी और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश की चेतावनी दी गई है। मछुआरों को समुद्र तट के पास न जाने और सुरक्षित स्थानों पर बने रहने की सलाह दी गई है।

15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के दिन कैसा रहेगा देश भर का मौसम?

हर नागरिक के मन में यह सवाल है कि क्या 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के जश्न में बारिश खलल डालेगी? मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 15 अगस्त को भी मानसून का असर कमजोर नहीं होगा। उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों, विशेषकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस की सुबह हल्की से मध्यम बारिश या बौछारें पड़ने की संभावना है। राष्ट्रीय ध्वजारोहण समारोहों के आयोजकों को बारिश से बचाव के पुख्ता इंतजाम करने की सलाह दी गई है। पहाड़ी राज्यों में 15 अगस्त को भी लैंडस्लाइड का जोखिम बना रहेगा।

प्रशासन की तैयारियां और आम जनता के लिए सुरक्षा गाइडलाइन

आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे जलभराव वाले रास्तों और उफनती नदियों से दूर रहें। पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने से पहले मौसम विभाग के अपडेट अवश्य चेक करें और बेवजह की यात्राओं से बचें।