
क्रिकेट जगत से इस वक्त एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। इंग्लैंड क्रिकेट टीम के नए टेस्ट कप्तान बनते ही अनुभवी बल्लेबाज जो रूट (Joe Root) ने अपने सख्त तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। कप्तान की कमान संभालते ही जो रूट ने टीम पर लागू किए गए विवादित ‘मिडनाइट कर्फ्यू’ (Midnight Curfew) नियम को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। जो रूट के इस फैसले के बाद से क्रिकेट गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर यह मिडनाइट कर्फ्यू नियम क्या था, इसे क्यों लागू किया गया था और क्यों जो रूट ने कप्तान बनते ही इसे हटाने का बड़ा कदम उठाया? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की पूरी और विस्तार से जानकारी।
क्या था विवादित ‘मिडनाइट कर्फ्यू’ नियम और क्यों पड़ा इसकी जरूरत?
इंग्लैंड पुरुष क्रिकेट टीम के भीतर अनुशासन बनाए रखने और खिलाड़ियों के मैदान के बाहर के व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए प्रबंधन द्वारा ‘मिडनाइट कर्फ्यू’ यानी रात का पहरा नियम लागू किया गया था। इस नियम के तहत खिलाड़ियों के रात में एक निश्चित समय (विशेषकर 12 बजे के बाद) के बाद होटल के कमरों से बाहर निकलने या पब-क्लब जाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई थी। इस नियम को कड़ाई से लागू करने के पीछे मुख्य वजह यह थी कि पिछले कुछ दौरों (जैसे एशेज सीरीज और न्यूजीलैंड दौरा) के दौरान इंग्लैंड के कुछ प्रमुख खिलाड़ियों का नाम देर रात की पार्टियों, शराब के सेवन और नाइटक्लब के बाहर हुई झड़पों जैसी अनुशासनहीनता की घटनाओं में सामने आया था। टीम की छवि खराब होने और मैदान पर खराब प्रदर्शन के बाद इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) और प्रबंधन ने खिलाड़ियों पर नकेल कसने के लिए इस सख्त कर्फ्यू को अनिवार्य कर दिया था।
बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन के विवाद के बाद गरमाया था मामला
यह नियम उस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा और विवादों के घेरे में आ गया जब इंग्लैंड के तत्कालीन कप्तान बेन स्टोक्स (Ben Stokes) और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन पर इस मिडनाइट कर्फ्यू के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा। न्यूजीलैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट मैच में शानदार जीत दर्ज करने के बाद इन खिलाड़ियों के देर रात तक बाहर रहने की खबरें सामने आईं, जिसके बाद अनुशासन समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन्हें कुछ मैचों के लिए निलंबित कर दिया था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद इंग्लिश क्रिकेट में उथल-पुथल मच गई थी, बेन स्टोक्स ने अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया, और मुख्य कोच ब्रेंडन मैकुलम को भी अपने पद से हटना पड़ा। इसके बाद ही चयनकर्ताओं ने जो रूट को एक बार फिर से इंग्लैंड की लाल गेंद (Test) की कप्तानी सौंपने का फैसला किया।
कप्तान बनते ही जो रूट ने क्यों हटवाया यह नियम?
कप्तानी संभालने के तुरंत बाद एक पॉडकास्ट में बातचीत करते हुए जो रूट ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी टीम में अब इस प्रकार के किसी भी तानाशाही कर्फ्यू के लिए कोई जगह नहीं होगी। जो रूट ने अपने बयान में कहा कि उनका मानना है कि इस तरह के पाबंदी वाले नियम कभी असरदार साबित नहीं होते हैं। यदि आप चाहते हैं कि खिलाड़ी मैदान पर अपनी पूरी जिम्मेदारी निभाएं, तो उन्हें मैदान के बाहर एक परिपक्व और समझदार वयस्क की तरह सोचना और फैसले लेना सिखाना होगा। रूट ने साफ कहा कि खिलाड़ी अच्छी तरह जानते हैं कि इंग्लैंड के लिए खेलने की क्या जिम्मेदारी होती है और उन्हें अपनी पर्सनल लाइफ तथा प्रोफेशनलिज्म के बीच संतुलन कैसे बनाना है।
“खिलाड़ी परिपक्व वयस्क हैं, अपनी जिम्मेदारी खुद समझें”
जो रूट ने खिलाड़ियों को खुली छूट देते हुए यह भी कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि अनुशासनहीनता को बढ़ावा दिया जाएगा, बल्कि वे चाहते हैं कि टीम के भीतर एक मजबूत और सकारात्मक संस्कृति विकसित हो। उन्होंने हंसते हुए कहा कि जीत का जश्न मनाने और साथियों के साथ एक ‘समझदार बियर’ (Sensible beer) पीने पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए, क्योंकि खिलाड़ी भी आखिरकार इंसान ही हैं। मुख्य कोच स्टीफन फ्लेमिंग (Stephen Fleming) और कप्तान जो रूट की यह नई जोड़ी चाहती है कि पूरी टीम का फोकस केवल मैदान के शानदार प्रदर्शन और खेल पर रहे, न कि बाहर के नियमों की उलझनों पर। आगामी पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट सीरीज से इस नए युग की आधिकारिक शुरुआत होने जा रही है।
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