रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का साया: क्या भारत में मान्य होगा सूतक काल? जानिए भाई को राखी बांधने का सही और सटीक शुभ मुहूर्त

भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह के प्रतीक पावन पर्व रक्षाबंधन को लेकर इस बार लोगों के मन में एक बड़ी उलझन और जिज्ञासा बनी हुई है। पंचांग के अनुसार, इस साल रक्षाबंधन के पावन अवसर पर आकाश में चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) का साया मंडराने वाला है। इस खगोलीय घटना के सामने आने के बाद से ही देश भर की बहनों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस ग्रहण का प्रभाव भारत में दिखाई देगा? क्या सूतक काल मान्य होगा और सबसे अहम बात यह है कि भाई की कलाई पर राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त कौन सा रहेगा? आइए जानते हैं इस सभी सवालों के जवाब और ज्योतिषीय गणना की पूरी सच्चाई।

क्या रक्षाबंधन के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में आएगा नजर?

ज्योतिषीय गणना और खगोलीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार रक्षाबंधन के पर्व पर लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा। जानकारों का कहना है कि जब कोई ग्रहण किसी देश या क्षेत्र विशेष में दिखाई नहीं देता, तो वहां उसका धार्मिक या सूतक प्रभाव भी मान्य नहीं होता है। यही वजह है कि भारत में रहने वाले लोगों को इस ग्रहण को लेकर घबराने या किसी भी तरह की अशुभ आशंका रखने की कोई आवश्यकता नहीं है। देश भर में बहनें बिना किसी संकोच और धार्मिक बाधा के पारंपरिक उल्लास के साथ यह त्योहार मना सकेंगी।

सूतक काल के नियमों को लेकर क्या कहते हैं पंडित?

शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल आरंभ हो जाता है, जिसके दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है। चूंकि इस बार का चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार भारत में नजर नहीं आएगा, इसलिए यहां सूतक काल का कोई भी नियम लागू नहीं होगा। मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और रसोई या खाने-पीने की चीजों पर भी इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। फिर भी, यदि कोई मानसिक शांति के लिए सावधानी रखना चाहता है, तो वह ग्रहण काल के दौरान अपने इष्टदेव का स्मरण कर सकता है।

भाई को राखी बांधने का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त

पर्व के दिन राखी बांधने का सही समय जानना हर बहन के लिए सबसे जरूरी होता है। इस साल रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया या अन्य कोई विशेष बाधा न होने के कारण दिनभर शुभ योग बने हुए हैं। ज्योतिष आचार्यों के अनुसार, सुबह सूर्योदय के साथ ही राखी बांधने का सिलसिला शुरू हो जाएगा, जो पूरे दिन और शाम तक जारी रह सकता है। हालांकि, दोपहर का समय (अभिजीत मुहूर्त या प्रदोष काल) भाई को तिलक लगाने और कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने के लिए सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है। बहनें अपने पारिवारिक पंचांग और सुविधा के अनुसार इस पावन बेला में भाई की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए राखी बांध सकती हैं।