Thursday , August 13 2026

अविवाहित लड़कियों के लिए हरियाली तीज के नियम और पूजा विधि

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हरियाली तीज का पर्व न केवल सुहागिन महिलाओं के लिए, बल्कि अविवाहित लड़कियों के लिए भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी और इसी तिथि पर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया था। यही कारण है कि कुंवारी कन्याएं मनचाहा, योग्य और संस्कारी जीवनसाथी पाने के लिए हरियाली तीज का व्रत और पूजन करती हैं। हालांकि, विवाहित महिलाओं और अविवाहित कन्याओं के लिए इस व्रत के नियमों में कुछ भिन्नता होती है, जिसका ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।

1. अविवाहित लड़कियों के लिए व्रत के मुख्य नियम

  • फलाहार या जलाहार व्रत: विवाहित महिलाएं जहां निर्जला (बिना जल के) व्रत रखती हैं, वहीं अविवाहित लड़कियां अपनी क्षमतानुसार फलाहारी या जलाहारी व्रत रख सकती हैं। स्वास्थ्य सही न होने पर एक समय फल और दूध का सेवन किया जा सकता है।

  • हरे और लाल वस्त्रों का चयन: पूजा के दिन हरे, लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें। इस दिन काले या सफेद रंग के कपड़े पहनने से पूरी तरह बचना चाहिए।

  • श्रृंगार के नियम: कुंवारी कन्याएं हाथों में मेहंदी लगा सकती हैं और हल्का श्रृंगार कर सकती हैं। हालांकि, उन्हें सुहाग की सामग्री (जैसे सिंदूर, बिछिया या मंगलसूत्र) चढ़ाने या धारण करने से बचना चाहिए।

  • सात्विकता और संयम: व्रत वाले दिन मन में किसी के प्रति कड़वाहट न लाएं, ब्रह्मचर्य का पालन करें और सात्विक विचार बनाए रखें।

2. मनोकामना पूर्ति के लिए चरणबद्ध पूजा विधि

अविवाहित कन्याओं को हरियाली तीज के दिन शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा इस प्रकार करनी चाहिए:

  1. प्रातः स्नान व संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, हरे रंग के वस्त्र धारण करें और हाथ में जल लेकर मनचाहे वर या शीघ्र विवाह की मनोकामना के साथ व्रत का संकल्प लें।

  2. मूर्ति स्थापना: पूजा स्थान की सफाई करके एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा या मिट्टी के पार्थिव शिवलिंग की स्थापना करें।

  3. सामग्री अर्पित करना: सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें। इसके बाद भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग और चंदन चढ़ाएं। माता पार्वती को लाल चुनरी, पुष्प और फल अर्पित करें।

  4. मंत्र जाप और कथा: पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ और माता पार्वती के मंत्र ‘ॐ उमामहेश्वराभ्यां नमः’ का जाप करें। इसके बाद हरियाली तीज की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।

  5. आरती और भोग: अंत में धूप-दीप जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और खीर या हलवे का भोग लगाएं।

3. शीघ्र विवाह और मनचाहा वर पाने के विशेष उपाय

  • बेलपत्र पर चंदन: 108 बेलपत्रों पर पीले चंदन से ‘राम’ या ‘ॐ’ लिखकर भगवान शिव को अर्पित करें। इससे विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।

  • पार्वती जी को पीले पुष्प: माता पार्वती को पीले फूल और हल्दी की गांठें अर्पित करने से मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और कुंडली का गुरु ग्रह मजबूत होता है।

  • सुहागिनों को दान: पूजा संपन्न होने के बाद अपनी सामर्थ्य अनुसार किसी सुहागिन महिला या ब्राह्मणी को फल, मिठाई और हरे वस्त्र दान करें और उनका आशीर्वाद लें।

सकारात्मक फल के लिए रखें ध्यान

हरियाली तीज का व्रत केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। अविवाहित कन्याएं यदि सच्चे मन और सही नियमों के साथ यह व्रत करती हैं, तो उनकी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।