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हरियाली अमावस्या 2026 पर बना सूर्य ग्रहण का दुर्लभ संयोग: जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त, ग्रहण का समय और भारत में सूतक काल की स्थिति

श्रावण मास की अमावस्या को हिंदू धर्म में अति पवित्र माना गया है, जिसे मुख्य रूप से ‘हरियाली अमावस्या’ के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2026 में हरियाली अमावस्या पर एक बेहद खास और दुर्लभ खगोलीय घटना घटित हो रही है—इस दिन खग्रास (पूर्ण) सूर्य ग्रहण का अद्भुत संयोग बन रहा है। धार्मिक दृष्टिकोण से अमावस्या तिथि पितरों के तर्पण, पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और पर्यावरण संरक्षण हेतु पौधे लगाने के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। वहीं दूसरी ओर, सूर्य ग्रहण का संयोग होने से इस दिन का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

हरियाली अमावस्या 2026: स्नान-दान और पूजा का शुभ मुहूर्त

हरियाली अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त से ही पवित्र नदियों में स्नान और दान का कार्य प्रारंभ हो जाता है। इस दिन दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और भगवान शिव व माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है।

  • अमावस्या तिथि का प्रारंभ: 11 अगस्त 2026, रात 10:34 बजे से

  • अमावस्या तिथि का समापन: 12 अगस्त 2026, रात 08:30 बजे तक

  • स्नान-दान का ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:23 बजे से 05:08 बजे तक

  • शुभ अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:52 बजे तक

इस अवधि में गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि नदी जाना संभव न हो तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें और तत्पश्चात तिल, वस्त्र, अन्न, और छाते का दान करें।

12 अगस्त 2026 सूर्य ग्रहण का सटीक समय और स्थान

यह सूर्य ग्रहण वर्ष 2026 का एक प्रमुख खगोलीय इवेंट है। भारतीय समयानुसार (IST) इस ग्रहण का समय रात के समय पड़ रहा है:

  • सूर्य ग्रहण का प्रारंभ: 12 अगस्त 2026, रात 09:05 बजे से

  • सूर्य ग्रहण का चरम (Peak): रात 10:55 बजे

  • सूर्य ग्रहण का समापन: 13 अगस्त 2026, मध्यरात्रि 12:45 बजे (तड़के)

दृश्यता (कहां-कहां दिखेगा): यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और अटलांटिक महासागर के क्षेत्रों में दिखाई देगा। यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में यह आंशिक रूप से नजर आएगा।

क्या भारत में लागू होगा सूतक काल?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल केवल वहीं मान्य होता है जहाँ सूर्य ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है। चूँकि 12 अगस्त 2026 का यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार रात्रि के समय लग रहा है, इसलिए यह भारत में अदृश्य (नजर नहीं आएगा) रहेगा।

भारत में दृश्य न होने के कारण यहाँ सूतक काल के नियम लागू नहीं होंगे। श्रद्धालु बिना किसी संशय या रुकावट के हरियाली अमावस्या के सभी धार्मिक अनुष्ठान, मंदिर दर्शन, स्नान-दान, पितृ तर्पण और पूजा-पाठ संपन्न कर सकते हैं।

हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण का महत्व

हरियाली अमावस्या का सीधा संबंध प्रकृति से है। इस दिन पौधा लगाना महादान माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन पीपल, बरगद, नीम, आंवला या तुलसी का पौधा रोपने से त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।