एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग के बाद भी बना रहता है दिल का दौरा पड़ने का जोखिम: एक्सपर्ट्स से जानें दोबारा अटैक आने की वजहें और दिल को सुरक्षित रखने के जरूरी उपाय

आज के समय में हृदय रोग (कार्डियोवैस्कुलर डिजीज) एक बेहद गंभीर और आम स्वास्थ्य समस्या बन चुके हैं। जब किसी व्यक्ति की कोरोनरी धमनी (हृदय तक खून ले जाने वाली नस) में ब्लॉकेज हो जाता है, तो डॉक्टर एंजियोप्लास्टी प्रक्रिया के जरिए उसमें ‘स्टेंट’ (एक छोटी धातु की जालीदार ट्यूब) डालते हैं। स्टेंट नसों को खोलकर रक्त के प्रवाह को तुरंत बहाल कर देता है, जिससे मरीज की जान बच जाती है। हालांकि, कई लोगों के मन में यह गलतफहमी होती है कि एक बार स्टेंट डल जाने के बाद उन्हें कभी दोबारा हार्ट अटैक नहीं आ सकता और उनका दिल हमेशा के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो गया है। कार्डियोलॉजिस्ट्स (हृदय रोग विशेषज्ञ) इस धारणा को पूरी तरह गलत मानते हैं। आइए एक्सपर्ट्स से विस्तार से समझते हैं कि स्टेंटिंग के बाद दोबारा हार्ट अटैक का खतरा क्यों बना रहता है और इससे बचने के लिए मरीज को किन सावधानियों का पालन करना चाहिए।

स्टेंटिंग के बाद भी क्यों आ सकता है दोबारा हार्ट अटैक?

हृदय विशेषज्ञों के अनुसार, स्टेंट कोई ऐसा इलाज नहीं है जो दिल की बीमारियों को जड़ से खत्म कर दे, बल्कि यह केवल एक बंद पड़ी नस को खोलने की एक यांत्रिक (मैकेनिकल) प्रक्रिया है। स्टेंट डलवाने के बाद भी मरीज को दोबारा हार्ट अटैक आने के दो मुख्य कारण होते हैं। पहला कारण है ‘इन-स्टेंट रेस्टेनोसिस’ (In-Stent Restenosis)। इस स्थिति में जिस जगह पर स्टेंट लगाया गया है, वहां समय के साथ दोबारा नई टिश्यू ग्रोथ (ऊतक) होने लगती है या थक्का (क्लॉट) जमने लगता है, जिससे वही नस फिर से बंद हो जाती है।

दूसरा और सबसे प्रमुख कारण है शरीर की अन्य नसों में नया ब्लॉकेज बनना। यदि मरीज अपनी जीवनशैली, खान-पान और आदतों में बदलाव नहीं करता, तो कोलेस्ट्रॉल और फैट (प्लाक) दिल की दूसरी नई नसों में जमा होने लगता है। जब ये नई नसें 70 से 90 प्रतिशत तक ब्लॉक हो जाती हैं या उनमें मौजूद प्लाक फट जाता है, तो मरीज को दोबारा गंभीर हार्ट अटैक का सामना करना पड़ सकता है।

स्टेंट थ्रोम्बोसिस और दवाइयां छोड़ने का खतरा

स्टेंट डलवाने के शुरुआती कुछ हफ्तों या महीनों में ‘स्टेंट थ्रोम्बोसिस’ का खतरा सबसे ज्यादा होता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें स्टेंट के अंदर अचानक खून का थक्का बन जाता है, जो पूरी तरह से ब्लड सप्लाई को रोक देता है। यह स्थिति बेहद जानलेवा साबित हो सकती है और इसके कारण तत्काल मैसिव हार्ट अटैक आ सकता है।

डॉक्टर्स का कहना है कि स्टेंट थ्रोम्बोसिस होने का सबसे बड़ा कारण मरीजों द्वारा लापरवाही बरतना है। एंजियोप्लास्टी के बाद डॉक्टर मरीज को खून पतला करने वाली दवाइयां (एंटी-प्लेटलेट मेडिसिन) नियमित रूप से लेने की सख्त सलाह देते हैं। कई बार मरीज खुद को ठीक महसूस करने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेना बंद कर देते हैं या खुराक छोड़ देते हैं। दवाइयां रोकने से खून गाढ़ा होने लगता है और स्टेंट के अंदर थक्का जमने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

एंजियोप्लास्टी के बाद दिल को सेहतमंद रखने के लिए एक्सपर्ट टिप्स

यदि आपकी एंजियोप्लास्टी हुई है और स्टेंट लगा है, तो दोबारा हार्ट अटैक के खतरे को टालने के लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का सेवन बिना एक भी दिन मिस किए समय पर करें। अपनी जीवनशैली में तुरंत सुधार लाएं। अपने आहार से सैचुरेटेड फैट, तला-भुना खाना, अत्यधिक नमक, चीनी और प्रोसेस्ड फूड को पूरी तरह हटा दें। इसके स्थान पर ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और ऑलिव ऑयल जैसी सेहतमंद चीजों को अपनी डाइट में शामिल करें।

धूम्रपान और शराब के सेवन से पूरी तरह दूरी बना लें, क्योंकि तंबाकू नसों में प्लाक जमाने की प्रक्रिया को बहुत तेज कर देता है। डॉक्टर की अनुमति से रोजाना 30 मिनट हल्की वॉक या योग करें ताकि ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बना रहे। इसके अलावा, अपने ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल (डायबिटीज) और कोलेस्ट्रॉल को हमेशा नियंत्रण में रखें तथा समय-समय पर अपने कार्डियोलॉजिस्ट से फॉलो-अप चेकअप कराते रहें।