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यूपी चुनाव में मदरसों पर घमासान, डिप्टी सीएम के ‘आतंकवाद ट्रेनिंग सेंटर’ वाले बयान के बाद सीएम योगी का बड़ा एक्शन

उत्तर प्रदेश की राजनीति में मदरसों का मुद्दा एक बार फिर से सबसे बड़ा हॉट टॉपिक बन गया है। आगामी राजनीतिक हलचल और चुनावी सरगर्मियों के बीच राज्य में मदरसों की कार्यप्रणाली, शिक्षा व्यवस्था और सरकारी अनुदान को लेकर तीखा सियासी संग्राम छिड़ गया है। इस गर्माती राजनीति के बीच उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री की तरफ से मदरसों को लेकर एक बेहद विवादित और कड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने इन्हें ‘आतंकवाद का ट्रेनिंग सेंटर’ तक करार दे दिया है। इस बयान के ठीक बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने मदरसों के खिलाफ एक और सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें कॉलेज लेवल की उच्च डिग्रियां देने के अधिकार को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है।

डिप्टी सीएम के बयान से गरमाई सियासत

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के इस तीखे बयान के बाद विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों की तरफ से जबरदस्त विरोध प्रदर्शन और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार चुनावी फायदे के लिए ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है और एक विशेष समुदाय को निशाना बना रही है। वहीं, सत्ता पक्ष का कहना है कि मदरसों में मिलने वाली शिक्षा और वहां की गतिविधियों की पारदर्शी जांच होना बेहद जरूरी है ताकि देश की आंतरिक सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। इस बयानबाजी ने राज्य के राजनीतिक तापमान को काफी बढ़ा दिया है।

सीएम योगी का बड़ा एक्शन, छीना डिग्री बांटने का अधिकार

डिप्टी सीएम के बयान के बाद योगी सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। सरकार ने मदरसों को कॉलेज लेवल की कामिल (स्नातक) और फाजिल (परास्नातक) जैसी डिग्रियां प्रदान करने के अधिकार को छीन लिया है। सरकार का तर्क है कि मदरसा बोर्ड का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पारंपरिक और आधुनिक स्कूली शिक्षा देना है, न कि उच्च शिक्षा संस्थान के रूप में विश्वविद्यालय स्तर की डिग्रियां बांटना। इस फैसले के बाद अब उत्तर प्रदेश के मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए सामान्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का ही रुख करना होगा।

शिक्षा के आधुनिकीकरण पर सरकार का जोर

राज्य सरकार का यह कड़ा कदम मदरसों की शिक्षा प्रणाली को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने और उसमें पारदर्शिता लाने के प्रयासों का हिस्सा बताया जा रहा है। सरकार का यह भी मानना है कि मदरसों में आधुनिक विषयों जैसे गणित, विज्ञान और कंप्यूटर की शिक्षा को अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए ताकि वहां पढ़ने वाले छात्र भी देश के विकास में अपना पूरा योगदान दे सकें। हालांकि, इस फैसले के बाद प्रदेश का सियासी पारा सातवें आसमान पर है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा चुनाव का एक बड़ा केंद्र बिंदु बनने जा रहा है।