
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की फिटनेस एक बार फिर टीम प्रबंधन और चयनकर्ताओं के लिए सिरदर्द बन गई है। बुमराह श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए हैं, जिससे टीम इंडिया की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। उन्होंने अपना पिछला टेस्ट मैच नवंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था। 32 वर्षीय बुमराह को इंग्लैंड दौरे पर वनडे सीरीज के दौरान घुटने में चोट लगी थी और वह उससे पूरी तरह नहीं उबर पाए हैं। हालांकि उनका वर्कलोड लगातार मैनेज किया जाता रहा है, लेकिन अहम दौरों से पहले उनका चोटिल होना उनके इंटरनेशनल करियर की दीर्घकालिक फिटनेस पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू हो रही इस टेस्ट सीरीज के लिए बुमराह के रिप्लेसमेंट के रूप में जम्मू-कश्मीर के युवा पेसर आकिब नबी को टीम में शामिल किया गया है, जो आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) 2025-27 का अहम हिस्सा है।
क्या बीसीसीआई को अब बुमराह से आगे की सोचनी चाहिए
लगातार चोटों से जूझ रहे जसप्रीत बुमराह के विकल्प के तौर पर अब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को भविष्य की रणनीति तैयार करनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट जैसे चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट के लिए बोर्ड को युवा तेज गेंदबाजों का एक मजबूत पूल तैयार करना चाहिए ताकि किसी भी महत्वपूर्ण सीरीज से पहले अचानक संकट खड़ा न हो। वर्तमान भारतीय गेंदबाजी आक्रामक यूनिट में बुमराह के बाद मोहम्मद सिराज ही सबसे अनुभवी तेज गेंदबाज बचे हैं। ऐसे में आगामी चुनौतियों और नवंबर में होने वाले न्यूजीलैंड दौरे को ध्यान में रखते हुए टीम मैनेजमेंट को लंबी अवधि की योजना पर काम करना बेहद जरूरी हो गया है।
किन युवा गेंदबाजों को मिल सकता है मौका, चयनकर्ताओं के सामने क्या हैं विकल्प
वरिष्ठ तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी लंबे समय से भारतीय टीम से बाहर चल रहे हैं और मार्च 2025 के बाद से उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। ऐसे में टेलीग्राफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीसीआई के एक अंदरूनी सूत्र का कहना है कि यदि न्यूजीलैंड दौरे तक यह स्पष्ट हो जाता है कि टीम डब्ल्यूटीसी फाइनल की दौड़ से बाहर है, तो तुषार देशपांडे, गुरजपनीत सिंह और नचिकेत भूटे जैसे गेंदबाजों को आजमाने का सही समय होगा। ये गेंदबाज अच्छी गति पैदा करने की क्षमता रखते हैं और जब तक इन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं परखा जाएगा, तब तक उनकी असल क्षमता का पता नहीं चल सकेगा। इसके अलावा, राजस्थान के अनुभवी कोच अंशु जैन का मानना है कि अशोक शर्मा जैसे युवा पेसर भी लाल गेंद से लगातार तेज गेंदबाजी करते हुए एक दिन में 25 ओवर तक फेंकने की बेहतरीन फिटनेस और क्षमता रखते हैं। हालांकि अधिकांश युवा खिलाड़ी अब आईपीएल और सफेद गेंद के क्रिकेट की ओर आकर्षित होते हैं, फिर भी रेड-बॉल क्रिकेट के प्रति समर्पित युवा प्रतिभाओं को तलाशना और तराशना अब समय की सबसे बड़ी मांग बन गया है।
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